Badrinath Kedarnath Karmchari Andolan: बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अंतर्गत काम करने वाले अस्थायी कर्मचारियों ने अपनी बरसों पुरानी मांगों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. दशकों से धामों में अपनी सेवाएं दे रहे लगभग 300 अस्थायी कर्मी अब अपनी आवाज शासन और प्रशासन तक पहुंचाने के लिए क्रमिक अनशन पर बैठ गए हैं. कर्मचारियों का साफ कहना है कि लंबे समय से निष्ठापूर्वक काम करने के बाद भी विभाग उनकी सुध नहीं ले रहा है, जिससे परेशान होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है. क्या है उनकी मांगे और क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन विस्तार से जानिए इस खबर में...
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अलग-अलग दिन शुरू हुआ प्रदर्शन का सिलसिला
धामों में कर्मचारियों के इस अनशन की शुरुआत अलग-अलग तारीखों से हुई है. केदारनाथ धाम में कर्मचारियों ने 13 अक्टूबर से ही मंदिर प्रांगण में धरना देना शुरू कर दिया था. वहीं दूसरी तरफ, बदरीनाथ मंदिर सहित समिति के अन्य अधीनस्थ मंदिरों के अस्थायी कार्मिकों ने आज यानी 14 अक्टूबर से इस क्रमिक अनशन में हिस्सा लिया है. सभी कर्मचारी प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक मंदिर प्रांगण में अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं.
15 से 20 वर्षों की सेवा के बावजूद अनदेखी का आरोप
प्रदर्शन कर रहे कर्मियों का कहना है कि वे पिछले 15 से 20 सालों से बदरीनाथ, केदारनाथ और अन्य संबंधित मंदिरों में लगातार काम कर रहे हैं. धामों की यात्रा व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने में उनकी अहम भूमिका रहती है. इसके बावजूद उनके नियमितीकरण (पक्का करने) और वेतन से जुड़ी समस्याओं का आज तक कोई पक्का समाधान नहीं निकाला गया है. कर्मचारियों की मांग है कि उनके लिए 'वन टाइम सेटलमेंट' योजना लागू की जाए और 'समान कार्य के लिए समान वेतन' का नियम दिया जाए.
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
कर्मचारियों ने याद दिलाया कि केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव के दौरान 11 अक्टूबर 2024 को अगस्त्यमुनि में एक कार्यक्रम हुआ था. उस समय प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर समिति के अस्थायी कर्मचारियों के लिए समान वेतन और वन टाइम सेटलमेंट की व्यवस्था करने का वादा किया था. हालांकि, इस घोषणा को लंबा समय बीत जाने के बाद भी अब तक धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. इसी वादाखिलाफी से आहत होकर कर्मचारियों ने आंदोलन का रुख अपनाया है.
दिवंगत कर्मियों के परिवारों की मदद न मिलने पर रोष
आंदोलनकारी कर्मचारियों ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया है. उनका आरोप है कि सेवा के दौरान काल के गाल में समा चुके करीब एक दर्जन (12) कर्मचारियों के परिवारों और आश्रितों को मृत्यु के बाद भी कोई आर्थिक सहायता नहीं दी गई. कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने पूर्व में भी बीकेटीसी के प्रभारी अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर समय रहते इन सभी समस्याओं को सुलझाने का अनुरोध किया था, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया.
अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
फिलहाल कर्मचारियों ने अपनी रणनीति साफ कर दी है. योजना के अनुसार, अभी एक सप्ताह तक रोजाना दो घंटे का यह शांतिपूर्ण क्रमिक अनशन जारी रहेगा. लेकिन यदि इस एक हफ्ते के भीतर बीकेटीसी प्रबंधन और शासन की तरफ से मांगों पर कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो वे काम पूरी तरह बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन कर्मचारियों की इन मांगों पर क्या रुख अपनाता है.
इनपुट: प्रवीण सेमवाल
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