चमोली के बलवंत सिंह पंवार मौत केस में बवाल… हाईवे जाम के आरोप में UKD की महिला नेता समेत 15 पर केस, जानें क्या है पूरा मामला

चमोली के बलवंत सिंह पंवार की संदिग्ध मौत के बाद उत्तराखंड में माहौल गरमा गया है. पोस्टमार्टम में देरी को लेकर भड़के परिजनों के बीच हाईवे जाम और हंगामे ने नया मोड़ ले लिया है. अब पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए नामजद और अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी है.

बलवंत सिंह केस में पुलिस का एक्शन
बलवंत सिंह केस में पुलिस का एक्शन

सिद्धांत उनियाल

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Balwant Singh Panwar Case: चमोली जिले के जोशीमठ ब्लॉक के मोल्टा गांव निवासी 65 वर्षीय बलवंत सिंह पंवार की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद उपजे जनाक्रोश का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. इस मामले में अब राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीकोट के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम और हंगामे के मामले में श्रीनगर कोतवाली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. पुलिस ने मामले में उत्तराखंड क्रांति दल महिला मोर्चा की गढ़वाल अध्यक्ष सरस्वती देवी और युवा नेता सुधीर जोशी सहित 15 से 16 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. आरोप है कि इन लोगों ने बलवंत सिंह पंवार के पोस्टमार्टम के दौरान परिजनों को उकसाया और नेशनल हाईवे पर जाम लगाकर आवश्यक सेवाओं को बाधित किया.

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परिजनों को उकसाने के आरोप में केस दर्ज

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 7 अप्रैल को श्रीकोट मोर्चरी के पास यातायात और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उपनिरीक्षक राजेश असवाल तैनात थे. उन्होंने तहरीर दी कि उत्तराखंड क्रांति दल महिला मोर्चा की गढ़वाल अध्यक्ष सरस्वती देवी और युवा नेता सुधीर जोशी ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को उकसाया. इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने भीड़ को राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने के लिए प्रेरित किया. पुलिस ने इन दोनों के साथ ही 15 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ लोक उपद्रव और लोक सेवक के काम में बाधा डालने जैसी धाराओं में केस दर्ज किया है.

जानें पुलिस की तहरीर में क्या लगे आरोप 

तहरीर के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने दोपहर 12:10 बजे से 12:40 बजे तक ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद कर दिया था. इस आधे घंटे के चक्का जाम की वजह से सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. पुलिस के मुताबिक, इस दौरान एंबुलेंस और अन्य जरूरी सेवाओं के वाहन भी जाम में फंस गए, जिससे मरीजों और आम जनता को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया NHRC की गाइडलाइन के तहत होनी थी और AIIMS ऋषिकेश से डॉक्टरों का पैनल रास्ते में था जिस कारण थोड़ा समय लग रहा था.

पुलिस कर्मियों को धमकाने का भी आरोप

पुलिस की तहरीर में यह भी बताया गया है कि 6 अप्रैल की रात को जब पंचायतनामा की कार्रवाई चल रही थी तब एक शख्स ने पुलिसकर्मियों को धमकाने की कोशिश की थी. आरोप है कि उस व्यक्ति ने सरकारी दस्तावेज फाड़ने का भी प्रयास किया था. प्रभारी निरीक्षक कुलदीप सिंह ने बताया कि इन सभी गतिविधियों को देखते हुए पुलिस ने सख्त कदम उठाया है और आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है.

क्या है बलवंत सिंह पंवार का पूरा मामला

यह पूरा विवाद जोशीमठ ब्लॉक के मोल्टा गांव निवासी 65 वर्षीय बलवंत सिंह पंवार की मौत से जुड़ा है. परिजनों का आरोप है कि बीते हफ्ते सुबह सादे कपड़ों में आई हरियाणा की रोहतक पुलिस ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और बलवंत सिंह को जबरन अपने साथ ले जाने लगे. परिजनों के अनुसार पुलिस ने बताया था कि उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज है. रास्ते में कर्णप्रयाग के पास बलवंत सिंह की तबीयत बिगड़ गई और श्रीनगर बेस अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

हरियाणा पुलिस की टीम पर भी केस दर्ज

बता दें कि बलवंत सिंह पंवार 20 सालों तक ग्राम प्रधान रहे हैं. उनकी मौत के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और वे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं. इस मामले में पीड़ित परिवार की शिकायत पर चमोली पुलिस ने भी कार्रवाई की है. चमोली एसपी ने बताया कि परिजनों की तहरीर पर हरियाणा के 5 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और मामले की जांच की जा रही है.

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