Bhuwan Chandra Khanduri passes away: उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारे से एक बहुत ही दुखद खबर सामने आ रही है. उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल रिटायर भुवन चंद्र खंडूरी का निधन हो गया है. वह 92 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे. उनके जाने की खबर से पूरी राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है. मेजर जनरल खंडूरी को उनकी अनुशासित कार्यशैली और कड़क छवि के लिए जाना जाता था.
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आपको बता दें कि भुवन चंद्र खंडूरी पिछले कई समय से अस्वस्थ चल रहे थे. उनका इलाज देहरादून के मैक्स अस्पताल में चल रहा था. उनके निधन की सूचना मिलते ही पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में मायूसी छा गई है. वहीं प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) के निधन पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने उनके निधन को उत्तराखंड और राष्ट्रीय राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है.
कौन थे भुवन चंद्र खंडूरी?
एक अक्टूबर 1934 को देहरादून में जन्मे भुवन चंद्र खंडूरी ने राजनीति में आने से पहले भारतीय सेना की कोर ऑफ इंजीनियर्स में अपनी सेवाएं दी थीं. वह इंजीनियरिंग कोर में अधिकारी रहे और अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए साल 1982 में 'अति विशिष्ट सेवा मेडल' से सम्मानित किए गए. सेना से मेजर जनरल के पद से रिटायर होने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और राजनीति के जरिए जनता की सेवा शुरू की. वे केंद्र सरकार में राज्य मंत्री रहे, इसके बाद साथ ही दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी रहे. भुवन चंद्र खंडूरी की कड़क और ईमानदार छवि के कारण जनता के बीच उनकी एक अलग पहचान थी.
1991 में गढ़वाल लोकसभा सीट से बने थे सांसद
भुवन चंद्र खंडूरी पहली बार साल 1991 में गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे. इसके बाद वह कई बार संसद पहुंचे और भाजपा के एक मजबूत पहाड़ी चेहरे के रूप में पहचान बनाई. अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्हें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई. उनके कार्यकाल में देश में सड़क क्रांति की मजबूत नींव रखी गई. प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को जमीन पर उतारने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है. दूरदराज के गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने के पीछे खंडूरी की प्रशासनिक सख्ती और दूरदृष्टि को आज भी याद किया जाता है.
कब बने थे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री?
उत्तराखंड में भाजपा सरकार बनने के बाद भुवन चंद्र खंडूरी पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने. उनका कार्यकाल सख्त प्रशासन और जीरो टॉलरेंस नीति के लिए जाना जाता है. भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी साफ-सुथरी छवि इतनी मजबूत थी कि सरकारी तंत्र में भी उनका नाम अनुशासन के प्रतीक के रूप में लिया जाता था. उन्होंने साल 2007 से 2009 तक मुख्यमंत्री पद संभाला. इसके बाद रमेश पोखरियाल निशंक को राज्य की कमान सौंपी गई. हालांकि भाजपा ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया और साल 2011 में उन्हें दूसरी बार मुख्यमंत्री बनाया गया.
बेटी हैं उत्तराखंड विधानसभा की स्पीकर
भुवन चंद्र खंडूरीकी बेटी रितु खंडूरी वर्तमान में उत्तराखंड विधानसभा की स्पीकर हैं. वहीं उनके बेटे मनीष खंडूरी भी राजनीति में सक्रिय हैं. मनीष पहले कांग्रेस में थे, लेकिन बाद में भाजपा में शामिल हो गए. खंडूरी परिवार उत्तराखंड के बड़े राजनीतिक परिवारों में गिना जाता है. पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा उनके कजिन हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के परिवार से भी उनका करीबी संबंध रहा है.
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