चारधाम यात्रा 2026 शुरू… इस धाम के दर्शन से करें यात्रा की शुरूआत, जानें क्या है सही क्रम

Chardham Yatra 2026 Guide: चारधाम यात्रा शुरू होते ही लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए निकल पड़ते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत धाम से शुरुआत आपकी पूरी यात्रा का फल अधूरा कर सकती है? सदियों पुरानी परंपरा में एक खास क्रम छिपा है, जो आपकी इस पवित्र यात्रा को सफल और पूर्ण बनाता है.

Chardham yatra route
Chardham yatra route

न्यूज तक डेस्क

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Chardham Yatra 2026 : चारधाम यात्रा 2026 की शुरुआत 19 अप्रैल यानी अक्षय तृतीया के शुभ दिन से शुरू हो गई है. ऐसे में कई बार श्रद्धालु बिना जानकारी के सीधे किसी भी धाम की ओर दर्शन के लिए निकल पड़ते हैं, लेकिन जानकार बताते हैं कि ऐसा करना यात्रा के फल को अधूरा छोड़ सकता है. सदियों पुरानी इस यात्रा का भी एक तय क्रम है, जो इसके महत्व को और बढ़ा देता है. इसलिए अगर आप भी इस पवित्र यात्रा यानी की चार धाम के दर्शन की तैयारी कर रहे हैं तो पहले ये जानना बेहद जरूरी है कि इसकी सही शुरुआत आखिर किस धाम यानी की कौन से मंदिर से होती है.

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इस धाम से होती है यात्रा की शुरुआत

परंपरा के अनुसार इस यात्रा की शुरुआत हमेशा उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री धाम से ही की जाती है. यमुनोत्री को इस यात्रा का पहला पड़ाव माना जाता है. समुद्र तल से 3,291 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यमुनोत्री धाम देवी यमुना का निवास स्थान है. पौराणिक कथाओं के मुताबिक यमुना जी को यमराज की बहन माना गया है. ऐसी मान्यता है कि जो भक्त यहां के पवित्र जल में स्नान कर माता यमुना के दर्शन करते हैं उन्हें अपने पापों से मुक्ति मिल जाती है और उनके मोक्ष का रास्ता खुल जाता है. यही वजह है कि यात्रा को सफल और शुभ बनाने के लिए श्रद्धालु सबसे पहले यमुनोत्री पहुंचकर पूजा करते हैं. यमुनोत्री धाम के मुख्य मंदिर के पास उबलते हुए गर्म पानी के प्राकृतिक कुंड मौजूद हैं. इन कुंडों की विशेषता यह है कि श्रद्धालु इनमें चावल और आलू डालकर प्रसाद तैयार करते हैं.

गंगोत्री धाम है यात्रा का दूसरा पड़ाव

चारधाम यात्रा के दूसरा महत्वपूर्ण पड़ाव गंगोत्री धाम को माना गया है. ये मंदिर भी उत्तरकाशी जिले में ही मौजूद है. गंगोत्री धाम समुद्र तल से लगभग 3,100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. इस धाम को देवी गंगा का मायके और उनके पृथ्वी पर अवतरण का स्थान माना जाता है. यह मंदिर 18वीं शताब्दी में गोरखा सेनापति अमर सिंह थापा द्वारा बनवाया गया था और बाद में जयपुर के महाराजा द्वारा इसका जीर्णोद्धार किया गया.

तीसरे पड़ाव में करें बाबा के दर्शन 

यमुनोत्री और गंगोत्री के दर्शन के बाद यात्री भगवान शिव के दर्शन के लिए केदारनाथ की तरफ बढ़ते हैं. साल 2026 में केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे. बाबा केदार के ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए भक्तों को करीब 16 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई पूरी करनी होती है. कपाट खुलने के दिन से ही यहां हजारों की संख्या में भक्तों का तांता लगना शुरू हो जाता है.

बद्रीनाथ धाम में यात्रा का समापन

चारधाम यात्रा का अंतिम पड़ाव बद्रीनाथ धाम है जहां भगवान विष्णु विराजमान हैं. साल 2026 में बद्रीनाथ मंदिर के कपाट 23 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर खोले जाएंगे. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बद्रीनाथ के दर्शन के बिना चारधाम यात्रा अधूरी रहती है और यहां पहुंचकर ही यात्रा का पूरा फल मिलता है. यहां का शांत वातावरण और ठंडी जलवायु भक्तों को एक अलग ही मानसिक शांति प्रदान करती है.

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