'नीचे उतरो, इसकी फोटो खींचो...' देहरादून में युवती को घेरकर प्रदर्शन में शामिल कराने की कोशिश, बजरंग दल पर लगा आरोप, वीडियो वायरल

Dehradun Bajrang Dal Protest Viral Video: देहरादून के घंटाघर पर कथित लैंड जिहाद विरोध प्रदर्शन के दौरान एक युवती के साथ बदसलूकी का वीडियो वायरल हो गया है. आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने युवती की स्कूटी रोककर उसे जबरन आंदोलन में शामिल होने के लिए घेर लिया. पुलिस हस्तक्षेप के बाद ही युवती वहां से निकल सकी. अब मामले में जांच और कार्रवाई शुरू हो गई है.

देहरादून में प्रदर्शन के दौरान स्कूटी सवार महिला से बदसलूकी
देहरादून में  प्रदर्शन के दौरान स्कूटी सवार महिला से बदसलूकी

सागर शर्मा

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Dehradun Protest:उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से प्रदर्शन के दौरान एक युवती के साथ बदसलूकी का शर्मनाक मामला सामने आया है. यहां एक बजरंग दल के एक प्रोटेस्ट के दौरान सड़क से गुजर रही एक युवती को कार्यकर्ताओं ने रोक लिया. इसके बाद युवती पर जबरदस्ती प्रदर्शन में शामिल होने का दबाव बनाया जाने लगा, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में दिख रहा है कि युवती बार-बार वहां से जाने के लिए रास्ता देने की बात कहती है, लेकिन प्रदर्शनकारी उससे स्कूटी साइड में लगाकर आंदोलन में शामिल होने को कहते हैं. युवती के लगातार मना करने पर प्रदर्शनकारियों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया. आरोप है कि इसके बाद युवती के साथ बदसलूकी की गई. इसके बाद पुलिस अफसरों के हस्तक्षेप के बाद युवती वहां से निकल सकी. क्या है पूरा मामला और कौन लोग थे जो प्रदर्शन कर रहे थे,आइए सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं इस खबर में..

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सबसे पहले जानिए क्या है पूरा मामला?

दरअसल, देहरादून के घंटाघर पर कथित लैंड जिहाद के खिलाफ बजरंग दल के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे. दस दौरान वहां से एक युवती स्कूटी से गुजर रही थी.  इस बीच उसे प्रदर्शनकारियों ने रोक लिया और  चारों तरफ से घेर लिया. प्रदर्शनकारियों को महिला का वहां से गुजरना और उनके आंदोलन में शामिल न होना इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने महिला के साथ बदसलूकी शुरू कर दी और उस पर जबरन आंदोलन में शामिल होने का दबाव बनाने लगे, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

'नीचे उतरो और आंदोलन में शामिल हो'

वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रदर्शनकारियों भीड़ के बीच घिरी महिला को नीचे उतरने के लिए मजबूर किया जा रहा है. प्रदर्शनकारी चिल्लाते हुए कह रहे हैं कि नीचे उतर, आंदोलन में शामिल हो, तुम यहां से नहीं जा सकती. जब महिला ने जाने की जिद की और विरोध किया तो कार्यकर्ताओं ने आम नागरिक की प्राइवेसी का खुलेआम उल्लंघन करते हुए आपस में कहा कि इसका नंबर लो, इसकी फोटो खींचो. इस पूरी धक्कामुक्की के बीच महिला बार-बार गुहार लगाती रही कि उसे कहीं जाना है और उसे देर हो रही है. लेकिन कार्यकर्ताओं ने उसकी एक न सुनी और जबरन उसकी स्कूटी को किनारे लगवाने के लिए दबाव बनाते रहे.

महिला-पुरुष कार्यकर्ताओं ने युवती को डराया-धमकाया

इस पूरे बवाल के बीच जब एक कार्यकर्ता ने आगे आकर महिला से स्कूटी साइड में पार्क करने को कहा तो पीछे से अन्य कार्यकर्ताओं की आवाज आई कि इतना मत पिघलिए भैया. यानी भीड़ में शामिल लोग महिला के साथ किसी भी तरह की नरमी बरतने के मूड में नहीं थे. महिला ने जब धक्कामुक्की का विरोध किया और साइड हटने को कहा तो वहां मौजूद महिला और पुरुष कार्यकर्ताओं ने उसे डराया-धमकाया. महिला को अंग्रेजी में बात करता देख प्रदर्शनकारियों ने ताना मारते हुए कहा कि बहुत इंग्लिश आती है तुम्हें, क्या बंगाल में क्या होगा पता है?  इसके बाद पीड़ित महिला ने खुद पुलिस अधिकारी को बुलाने की चेतावनी भी दी.

शुरुआत में गायब थी पुलिस, बाद में अफसरों ने छुड़वाई स्कूटी

जानकारी के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम  के बीच मौके पर पुलिस मौजूद नहीं थी. स्कूटी जबरन पार्क कराए जाने के बाद पीड़ित महिला खुद वहां आगे मौजूद पुलिस अफसरों के पास पहुंची. जब महिला ने पुलिस से इस पूरे मामले की शिकायत की तब जाकर एक पुलिस अफसर मौके पर आए. उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाया-बुझाया और किसी तरह महिला की स्कूटी को भीड़ के बीच से सुरक्षित बाहर निकलवाया.

ट्रैफिक बाधित करने का मुकदमा दर्ज

मामले में बात करते हुए देहरादून नगर कोतवाली के इंचार्ज हरिओम चौहान ने फोन पर बातचीत में बताया कि उन्होंने इस वीडियो का संज्ञान लिया है. वीडियो पर संज्ञान लेते हुए देहरादून में ट्रैफिक बाधित करने का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. 

क्या है लैंड जिहाद का मुद्दा?

दरअसल, जिस लैंड जिहाद को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे वो असल में वह एक राजनीतिक शब्द है. इसका सीधा मतलब होता है धार्मिक ढांचों की आड़ में सरकारी या सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जा करना. उत्तराखंड में पिछले कुछ सालों से यह मुद्दा काफी विवादों में रहा है. आरोप लगते रहे हैं कि राज्य के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में सरकारी जमीनों, प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट एरियाज, नदियों के किनारे और सड़कों के आसपास अवैध रूप से मजारे या अन्य धार्मिक ढांचे बना दिए गए हैं. राज्य सरकार भी इस पर कड़ा रुख अपना चुकी है और सर्वे कराकर अवैध ढांचों की लिस्टिंग की गई थी, जिन पर बुलडोजर की कार्रवाई भी हो चुकी है.

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