Dehradun Jama Masjid sealed controversy:राजधानी देहरादून के थानाें रोड इलाके में सोमवार को MDDA की एक कर्रवाई के बाद हड़कंप मच गया. दरअसल, यहां मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण यानी MDDA की टीम ने कार्रवाई करते हुए जामा मस्जिद परिसर को सील कर दिया. इस कार्रवाई के बाद से स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है. ऐसे में एहतियातन कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए इलाके में भारी पुलिस फोर्स को तैनात किया गया है.
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जानकारी के अनुसार MDDA की तरफ से बीते 27 मई को मस्जिद प्रबंधन को एक सील नोटिस जारी किया गया था. इस नोटिस के दिए जाने के बाद सोमवार को टीम मौके पर पहुंची और पूरे परिसर को सील कर दिया. MDDA की इस कार्रवाई के बाद से मुस्लिम समुदाय के लोग आक्रोशित हो गए और उन्होंने इस कार्रवाई का जमकर विरोध किया.
मुस्लिम पक्ष ने MDDA पर लगाया गंभीर आरोप
लोगों का कहना है कि इससे पहले भी मस्जिद परिसर के केवल एक कमरे को ही सील किया गया था. उनके मुताबिक ये कमरा इमाम के रहने के लिए अल्पसंख्यक विभाग की मंजूरी से पेयजल विभाग द्वारा साल 2023 में बनाया गया था. लेकिन उस समय भवन का नक्शा पास न होने की बात कहकर रमज़ान से करीब तीन महीने पहले भारी पुलिस बल के साथ उसे सील कर दिया गया था.
कार्रवाई का विरोध कर रहे मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि एमडीडीए द्वारा हाल ही में जो नोटिस जारी किया गया था उसमें सिर्फ 20 गुणा 40 फीट के हिस्से को ही सील करने की बात लिखी गई थी. लेकिन जब टीम मौके पर आई तो उन्होंने नियमों के उलट जाकर पूरी मस्जिद और उसके पूरे परिसर को ही सील कर दिया.
जमीन के मालिक दिलशाद ने ये कहा?
इस भूमि पर अपने स्वामित्व का दावा करने वाले दिलशाद ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने कई साल पहले यह जमीन मस्जिद के निर्माण के लिए दान में दी थी. उनका कहना है कि उन्हें खुद यह बात समझ में नहीं आ रही है कि आखिर एमडीडीए की टीम ने पूरे के पूरे परिसर को सील करने की इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों की है.
सोमवार की सुबह जब एमडीडीए की टीम मौके पर पहुंची तो उनके साथ भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद था. टीम ने मस्जिद के अंदर बने सभी कमरों को बंद करने के साथ ही उसके मुख्य प्रवेश द्वार यानी मेन गेट पर भी सरकारी सील लगा दी. इस कार्रवाई को लेकर वहां मौजूद स्थानीय लोगों और मस्जिद कमेटी से जुड़े लोगों में गहरा गुस्सा देखने को मिला है. हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर एमडीडीए के अधिकारियों की तरफ से अब तक कोई भी आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
हिंदू संगठनों ने लगाए ये आरोप
वही मामले पर हिंदू संगठनों ने देहरादून के जौलीग्रांट पर हवन कर पूजा अचना की. उनका कहना है की मस्जिद पूरी तरह से अवैध है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा की मस्जिद का दाखिल खारिज अवैध तरीके से किया गया जिसकी जांच की जाने चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने इस मामले में शामिल अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की. हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि पहले घर में नमाज अदा की जाती थी लेकिन बाद में 2016 में इसे दाननामा समिति के नाम करा दिया गया. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि उत्तराखंड का सामाजिक सौहाद्र खराब नहीं होने दिया जाएगा. फिलहाल, पुलिस-प्रशासन पूरे क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि माहौल सामान्य बना रहे.
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