केलोंग मंडी जाने का बना रहे हैं प्लान? तो पहले जानिए इसका इतिहास, पूरा रूट और परमिशन लेने का तरीका

कमल नयन सिलोड़ी

• 02:08 PM • 26 Jul 2026

Kilong Mandi Uttarakhand News: उत्तराखंड के चमोली जिले में भारत-चीन सीमा के पास स्थित किलोंग मंडी छह दशक बाद फिर चर्चा में है. कभी भारत-तिब्बत व्यापार का प्रमुख केंद्र रही यह ऐतिहासिक जगह अब सीमा दर्शन योजना, बेहतर सड़क और प्राकृतिक खूबसूरती की वजह से पर्यटकों और स्थानीय लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है.

केलोंग मंडी कैसे पहुंचें? जानिए पूरा तरीका
केलोंग मंडी कैसे पहुंचें? जानिए पूरा तरीका
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Kilong Mandi Uttarakhand News: उत्तराखंड के चमोली जिले की नीति घाटी में स्थित किलोंग मंडी एक बार फिर सुर्खियों में है. भारत-चीन सीमा के पास बसी यह मंडी सालों पहले भारत और तिब्बत के बीच व्यापार का एक मुख्य केंद्र हुआ करती थी. लेकिन साल 1962 के युद्ध के बाद से यहां व्यापार पूरी तरह रुक गया था. इसके बाद यह ऐतिहासिक स्थान गुमनामी के अंधेरे में खो गया था. अब करीब छह दशक बीत जाने के बाद किलोंग मंडी एक बार फिर से लोगों की उत्सुकता और आकर्षण की वजह बन रही है.

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यह खूबसूरत जगह चारों तरफ से ऊंचे पहाड़ों, शांत वातावरण और मखमली बुग्यालों से घिरी हुई है. यहां की प्राकृतिक सुंदरता आने वाले हर व्यक्ति का मन मोह लेती है. ऐसा माना जाता है कि इस विस्तृत समतल जगह के कारण ही पुराने समय में पूर्वजों ने इसे व्यापारिक मंडी का रूप दिया होगा. एक दौर था जब स्थानीय व्यापारी कई दिनों की मुश्किल पैदल यात्रा करके यहां पहुंचते थे.

1962 के युद्ध से पहले इस सामान का व्यापार

युद्ध से पहले यहां भारतीय और तिब्बती व्यापारियों की काफी चहल-पहल रहती थी. तिब्बत के व्यापारी इसी रास्ते से भारत आते थे. इस मंडी में मुख्य रूप से ऊन, नमक और जड़ी-बूटियों जैसी चीजों का बड़ा व्यापार किया जाता था. हालांकि, 1962 में भारत-चीन युद्ध छिड़ने के बाद दोनों देशों के बीच का यह व्यापार हमेशा के लिए बंद हो गया और पूरी मंडी एकदम वीरान पड़ गई.

सीमा दर्शन योजना से आसान हुआ सफर

अब भारत सरकार की सीमा दर्शन योजना और बेहतर सड़क नेटवर्क की वजह से किलोंग मंडी तक पहुंचना काफी सुगम हो गया है. नीति गांव से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस स्थान पर जाने के लिए प्रशासन से विशेष अनुमति लेना जरूरी होता है. जरूरी परमिशन मिलने के बाद अब पर्यटक और स्थानीय लोग इस ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल को देखने के लिए आ रहे हैं.

पूर्वजों की पुरानी स्मृतियों को संजो रहे स्थानीय निवासी

इन दिनों सीमांत इलाके के लोग भी अपने पूर्वजों की पुरानी यादों से जुड़ने के लिए यहां पहुंच रहे हैं. स्थानीय निवासी लक्ष्मण फरकिया ने बताया कि यह मंडी उनके पूर्वजों की विरासत है. उनके बुजुर्ग इसी रास्ते से तिब्बत सामान ले जाते थे और वहाँ से तिब्बती नमक और अन्य चीजें लाते थे. बचपन में केवल इसकी कहानियाँ सुनने वाले लक्ष्मण को अब जाकर यहाँ आने का मौका मिला है.

सेना की सुरक्षा में है इलाका, पास ही स्थित है नीति पास

इस इलाके की सुरक्षा में भारतीय सेना तैनात है. बता दें कि किलोंग मंडी से करीब 5 से 10 किलोमीटर आगे नीति पास स्थित है. 1962 से पहले यही मार्ग प्रसिद्ध कैलाश-मानसरोवर यात्रा का मुख्य रास्ता माना जाता था, जो युद्ध के बाद बंद हो गया था. आज यह मंडी सिर्फ एक इतिहास नहीं, बल्कि भारत-तिब्बत की पुरानी संस्कृति और पूर्वजों की जीवंत विरासत का प्रतीक बनकर उभर रही है.

कैसे पहुंचें केलोंग मंडी? जानिए पूरा तरीका

अगर आप केलोंग मंडी और भारत-चीन सीमा के नजदीकी क्षेत्र का दौरा करना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको इनर लाइन परमिट बनवाना होगा. यह परमिट आप जोशीमठ स्थित एसडीएम कार्यालय से ऑफलाइन बनवा सकते हैं. इसके अलावा pass.chamoli.org वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन भी आवेदन किया जा सकता है.

परमिट के लिए आपको अपने यात्रा संबंधी सभी जरूरी विवरण देने होंगे. यदि आप अपनी निजी कार, बाइक या स्कूटी से जा रहे हैं, तो वाहन की पूरी जानकारी दर्ज करनी होगी. कई पर्यटक जोशीमठ से ही वाहन बुक करके भी इस यात्रा पर जाते हैं. आमतौर पर लोग समूह बनाकर भारत-चीन सीमा के नजदीकी क्षेत्रों के दर्शन के लिए निकलते हैं.

जोशीमठ से केलोंग मंडी की दूरी करीब 120 किलोमीटर है. यहां से आगे नीति पास तक भी जाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए भी निर्धारित नियमों और अनुमति का पालन करना जरूरी है. ध्यान रहे कि इस यात्रा के लिए मेडिकल फिटनेस अनिवार्य है. ऊंचाई वाले क्षेत्र में जाने से पहले स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक शर्तों को पूरा करना जरूरी होता है.

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