अयोध्या राम मंदिर विवाद के बाद हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में लागू हुआ नया नियम, अब बिना जेब वाले कुर्ते पहनेंगे पुजारी

मुदित अग्रवाल

• 12:57 PM • 07 Jul 2026

Haridwar Mansa Devi News: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बाद हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर ने बड़ा कदम उठाया है. अब मंदिर के सभी पुजारी बिना जेब वाले कुर्ते पहनेंगे और चढ़ावे की निगरानी के लिए सात सदस्यीय विशेष समिति बनाई गई है. आखिर क्यों लिया गया यह फैसला, जानिए पूरी कहानी.

मनसा देवी मंदिर के पुजारी पहनेंगे बिना जेब वाले कुर्ते
मनसा देवी मंदिर के पुजारी पहनेंगे बिना जेब वाले कुर्ते
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Mansa Devi Temple Haridwar: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर सामने आए विवाद के बाद अब हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में एक बड़ा बदलाव किया गया है. दरअसल, ट्रस्ट ने अब मंदिर की व्यवस्थाओं को पूरी तरह पारदर्शी और साफ-सुथरा बनाने के लिए एक नया नियम बनाया है. इस नए नियम के तहत अब मंदिर में मौजूद सभी पुजारियों के लिए बिना जेब वाले कुर्ते पहनने होंगे. मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि उनके इस कदम के पीछे का उद्देश्य मंदिर में आने वाले चढ़ावे की राशि पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है. 

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निगरानी के लिए बनी सात सदस्यीय विशेष टीम 

मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रवींद्र पुरी महाराज ने बताया कि इसके साथ ही एक 7 सदस्यीय समिति का गठन भी किया गया है. इस समिति को मंदिर में साफ-सफाई और अन्य सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त का जिम्मा सौंपा गया है. उन्होंने बताया कि समिति के सदस्यों को शपथ भी दिलाई गई है. मंदिर प्रशासन का कहना है कि अगर व्यवस्था में किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी या हेरफेर पाई जाती है कि उस व्यक्ति या जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर पुलिस में FIR भी दर्ज कराई जाएगी.

पुजारियों के लिए दो-तीन दिन में तैयार होगी यूनिफॉर्म

श्रीमहंत डॉ. रवींद्र पुरी महाराज ने बताया कि सात पुजारियों की नई टीम मंदिर के चढ़ावे पर पूरी नजर रखेगी. उन्होंने कहा कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर सभी पुजारियों के लिए बिना जेब वाली यूनिफॉर्म तैयार करवा दी जाएगी. इसके बाद ड्यूटी के दौरान सभी पुजारियों को अनिवार्य रूप से वही पोशाक पहननी होगी. यदि कोई भी पुजारी चढ़ावे की रकम को छिपाने या रखने की कोशिश करता हुआ पाया जाता है तो उस पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा.

दोबारा नहीं चढ़ाया जा सकेगा एक बार चढ़ा हुआ प्रसाद

चढ़ावे की रकम के साथ-साथ मंदिर में पूजा सामग्री और प्रसाद को लेकर भी नियम बेहद कड़े कर दिए गए हैं. अब से मंदिर में एक बार चढ़ाया गया नारियल, फूल या अन्य कोई भी प्रसाद दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. मंदिर प्रशासन ने रीसाइकिल प्रसाद की पुरानी परंपरा पर पूरी तरह से रोक लगा दी है  ताकि श्रद्धालुओं के मन में शुद्धता को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रम या अविश्वास पैदा न हो.

सोशल मीडिया के भ्रम और विवादों को रोकने की तैयारी

इस नई व्यवस्था और कड़े नियमों की घोषणा सोमवार को मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रवींद्र पुरी महाराज ने खुद मंदिर परिसर में की. उन्होंने बताया कि आजकल देश के बड़े सनातन मंदिरों और मठों की छवि को खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं. सोशल मीडिया पर मंदिरों को लेकर कई तरह के भ्रामक वीडियो और झूठे आरोप फैलाए जाते हैं. इन्हीं सब आशंकाओं और विवादों को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए मंदिर की निगरानी व्यवस्था को और ज्यादा मजबूत किया गया है.

कांवड़ मेले की तैयारियों पर भी रहेगी कड़ी नजर

नवगठित समिति केवल चढ़ावे और पैसों के लेन-देन तक ही सीमित नहीं रहेगी. इस टीम को मंदिर की स्वच्छता, आंतरिक व्यवस्थाओं और आने वाले कांवड़ मेले की तैयारियों की देखरेख करने का जिम्मा भी सौंपा गया है. आगामी कांवड़ यात्रा के दौरान यहां लाखों की संख्या में भक्तों के पहुंचने की उम्मीद है, जिसे देखते हुए इस समिति को विशेष जिम्मेदारियां देकर मुस्तैद किया गया है. पूरे परिसर की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों की मदद भी ली जा रही है.

चंपत राय के समर्थन में आए रवींद्र पुरी महाराज

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर हाल ही में सामने आए विवाद पर बात करते हुए रवींद्र पुरी महाराज ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का खुलकर समर्थन किया. उन्होंने कहा कि कई बार किसी आम कर्मचारी या ड्राइवर की निजी गलती का ठीकरा पूरी संस्था के प्रमुख पर फोड़ दिया जाता है, जो कि सरासर गलत है. उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति के व्यवहार की पूरी जानकारी हमेशा प्रमुख को नहीं हो सकती, इसलिए चंपत राय को गलत तरीके से निशाना बनाया गया. मंदिर ट्रस्ट का एकमात्र उद्देश्य श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना और मंदिर के पैसे को समाज तथा उत्तराखंड के हित में पूरी पारदर्शिता से खर्च करना है.

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