Nainital News: नैनीताल के निजी स्कूलों की मनमानी पर DM ललित मोहन रयाल का बड़ा एक्शन, 46 स्कूलों ने लौटाए 39 लाख रुपए

लीला सिंह बिष्ट

04 Sep 2026 (अपडेटेड: Sep 4 2026 10:11 AM)

नैनीताल में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की सख्ती के बाद 46 प्राइवेट स्कूलों ने अभिभावकों को 39 लाख रुपए लौटाए. अब फीस वृद्धि, टीसी चार्ज और परीक्षा शुल्क पर कड़े नियम हुए लागू.

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नैनीताल में डीएम के एक्शन से निजी स्कूलों में मची खलबली.
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नैनीताल में जिले में निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर जिला अधिकारी ललित मोहन रयाल ने बड़ा एक्शन लिया है. इस एक्शन की चर्चा शहर में खूब है. डीएम ने मनमानी फीस, अवैध तरीके से फीस वसूली और अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को देखते हुए एक्शन ले लिया है. जिला अधिकारी के निर्देश के बाद निजी स्कूलों में जांच शुरू हुई और हैरान करने वाली बातें सामने आई हैं. 

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जांच में जिले के 87 निजी स्कूलों में अवैध तरीके से फीस वसूली की बात सामने आई. इसपर प्रशासन ने उन स्कूलों को अवैध तरीके वसूली गई फीस को अभिभावकों को वापस करने का निर्देश दिया. यही नहीं प्रशासन ने ये भी कहा कि स्कूल अधिक ली गई फीस को बच्चों के आगामी महीने की फीस में सैटल कर सकते हैं. प्रशासन की सख्ती के बाद 46 निजी स्कूलों ने अभिभावकों को 39 लाख 5 हजार 405 रुपये रिटर्न कर दिए हैं. 

8 स्कूलों ने नियम के खिलाफ बढ़ाई ट्यूशन फीस 

इधर 8 स्कूल ऐसे पाए गए जिनमें नियमों के खिलाफ ट्यूशन फीस बढ़ाई गई थी. इसे कम किया गया. वहीं 39 स्कूलों ने परीक्षा शुल्क को कम किया. यही नहीं 15 स्कूलों ने प्रशासन के एक्शन के बाद नॉमिनेशन फीस को कम किया. इनमें कुछ स्कूलों ने नॉमिनेशन फीस को पूरी तरह खत्म कर दिया. 

TC के नाम पर वसूली जा रही मनमानी फीस पर भी लगाई रोक  

जिलाधिकारी के निर्देशों के बाद ट्रांसफर सर्टिफिकेट यानी टीसी देने के नाम पर भी मनमाने तरीके से वसूली की गई है. जांच में सामने आया कि कुछ स्कूल निर्धारित 1 रुपए की बजाय 100 रुपए से 1,000 रुपए तक वसूल रहे थे. प्रशासन की सख्ती के बाद अब टीसी शुल्क महज 1 रुपए कर दिया गया है. स्कूल पहले से वसूल ली गई एक्स्ट्रा फीस को या तो वापस किया या तो समायोजित कर दिया.

स्कूलों को फीस को लेकर जारी किए दिशा-निर्देश 

यही नहीं जिलाधिकारी ने निजी स्कूलों की फीस में बढ़ोत्तरी को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश भी जारी कर दिया है. निजी स्कूल 3 सालों में अधिकतम 10 फीसदी फीस ही बढ़ा सकेंगे और इसके लिए अभिभावक-शिक्षक संघ यानी PTA की मंजूरी भी जरूरी होगी. शिक्षण और परीक्षा शुल्क के अलावा कई अन्य शुल्कों को अलग-अलग नामों से वसूलने की बजाय उन्हें निर्धारित नियमों के अनुसार विकास शुल्क के दायरे में जाएगा. उच्च कक्षाओं में परीक्षा शुल्क की अधिकतम सीमा 600 से ज्यादा नहीं होगी. 

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों को एक्शन होगा. RTE एक्ट के तहत 1 लाख तक और CBSE उपविधियों के तहत 5 लाख तक के जुर्माने के साथ मान्यता रद्द करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है. जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की इस सख्ती के बाद निजी विद्यालयों की फीस को लेकर बदलाव शुरू हो गया है. डीएम के एक्शन से अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है. 

जिन्होंने अतिरिक्त फीस वापस नहीं की उन्हें चेतावनी 

यहीं नहीं प्रशासन ने उन स्कूलों को चेतावनी दी है जिन्होंने अभी तक अतिरिक्त शुल्क वापस नहीं किया है. प्रशासन ने साफ किया है कि ऐसे स्कूलों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी और उनकी मान्यता तक रद्द की जा सकती है. 

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