Sher Singh Viral Video: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन में अपना इस्तीफा लहराकर चर्चा में आए उत्तराखंड के पूर्व सिपाही शेर सिंह का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वह कुमाऊं आईजी निवेदिता कुकरेती के बयान को सीधी चुनौती देते नजर आ रहे हैं. शेर सिंह ने खुद को हिस्ट्रीशीटर बताए जाने पर पलटवार करते हुए दावा किया है कि वह जल्द ही दूसरों की हिस्ट्रीशीट खोलेंगे. बताया जा रहा कि ये बयान दो दिन पुराना है. इस दौरान वे भीम आर्मी द्वारा जिला मुख्यालय पर आयोजित प्रदर्शन में छात्रों के समर्थन में शामिल होने पहुंचे थे.
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सरकार पर गंभीर लगाए आरोप
वायरल वीडियो में शेर सिंह दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई कार्रवाई का जिक्र करते हुए सरकार और प्रशासन पर जमकर बरसे. उन्होंने आरोप लगाया कि वहां प्रदर्शन कर रहे बच्चों के साथ बर्बरता की गई है. शेर सिंह ने दावा किया कि नकली पुलिस बनाकर वहां भेजी गई. उन्होंने कहा देश में 21 बच्चों ने अपनी जीवन लीला समाप्त की थी. शेर सिंह ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अपनी आने वाली नस्लों को बचाने के लिए आज घरों से बाहर निकलना जरूरी है, वरना आने वाली पीढ़ियां इसका खामियाजा भुगतेंगी.
फास्ट ट्रैक कोर्ट पर उठाए सवाल
शेर सिंह ने अपने बयान में प्रधानमंत्री और फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि फास्ट ट्रैक कोर्ट बलात्कारियों के लिए बने थे और वे पहले से मौजूद हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अगर सरकार को इन मामलों में गंभीरता दिखानी ही थी, तो 20 तारीख से पहले ही बच्चों से वार्ता की जानी चाहिए थी. उनका दावा है कि यदि समय पर बातचीत हो जाती, तो 21 बच्चों की जान नहीं जाती और 4 अन्य बच्चों की मौत भी नहीं होती.
हिस्ट्रीशीट पर आईजी को खुली चुनौती
अपनी नौकरी और बर्खास्तगी के मुद्दे पर बोलते हुए शेर सिंह ने कुमाऊं आईजी के बयानों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि उनके पास दस्तावेज मौजूद हैं, जिनके मुताबिक वह 2 अप्रैल के भारत बंद के दौरान सस्पेंड हुए थे और उस समय संबंधित अधिकारी देहरादून में तैनात थीं. शेर सिंह ने दावा किया कि वह उस मामले में निर्दोष साबित हो चुके हैं और उसकी कॉपी उनके पास मौजूद है. खुद को हिस्ट्रीशीटर बताए जाने पर उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में जल्द ही साक्ष्य सामने रखेंगे.
भीम पाठशालाओं की वजह से कार्रवाई का दावा
शेर सिंह ने वीडियो में कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा बहुत पहले ही दे दिया था. हालांकि, उनका आरोप है कि अधिकारियों ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि वह अपने समाज के हक की आवाज उठाएं. शेर सिंह का कहना है कि उन्होंने अलग-अलग गांवों में 85 से अधिक 'भीम पाठशालाएं' खोली हुई थीं, जिसके कारण उनके खिलाफ यह रुख अपनाया गया.
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