टिहरी: 14 दिन बाद भी नहीं मिला रेशमा का सुराग, 6 अगस्त को हुई थी लापता, परिवार को सता रहा अनहोनी का डर

पंकज भट्ट

• 05:21 PM • 19 Aug 2026

Tehri Missing Reshma: उत्तराखंड के टिहरी में 28 वर्षीय रेशमा के अचानक लापता होने का रहस्य दो हफ्ते बाद भी बरकरार है. पुलिस जंगलों से लेकर टिहरी झील और जलकुर नदी तक तलाश कर रही है. ड्रोन और SDRF की मदद से सर्च ऑपरेशन जारी है, जबकि मायके वालों ने ससुराल पक्ष पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

टिहरी की रेशमा का नहीं मिल रहा सुराग
टिहरी की रेशमा का नहीं मिल रहा सुराग
Google CTA

Reshma Missing Case: उत्तराखंड के टिहरी जिले में स्थित लंबगांव क्षेत्र से 6 अगस्त को अचानक गायब हुई रेशमा का दो हफ्ते बीत जाने के बावजूद कोई पता नहीं चल सका है. महिला की सुरक्षित वापसी के लिए स्थानीय पुलिस लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है. हालांकि, लंबे समय से कोई जानकारी न मिलने के कारण पीड़ित परिवार बेहद चिंतित है. इतने दिन बीत जाने के बाद भी रेशमा का कुछ पता नहीं चलने से अब परिवार को  किसी अप्रिय घटना का डर सता रहा है.

Read more!

पुलिस का बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान जारी

मामले को लेकर लंबगांव थाने में रेशमा के पति नवीन सिंह (निवासी जोगी) ने 7 अगस्त को गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी. इसके बाद से ही पुलिस की अलग-अलग टीमें सक्रियता से तलाश में जुट गई हैं. पुलिस बल आसपास के सघन जंगलों में लगातार बॉम्बिंग और कॉम्बिंग कर रहा है. इसके साथ ही टिहरी झील और जलकुर नदी के बहाव वाले इलाकों में एसडीआरएफ की टीम खोजबीन में लगी है.

दुर्गम इलाकों में ड्रोन कैमरों से निगरानी

पहाड़ी और कठिन भौगोलिक स्थिति को देखते हुए पुलिस हवा से भी निगरानी रख रही है. आसमान से ड्रोन कैमरों के माध्यम से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है. टिहरी पुलिस के सीओ चंद्रमोहन सिंह ने बताया कि सभी संभावित स्थानों पर अभियान चलाया जा रहा है. जैसे ही महिला के संबंध में कोई ठोस या उपयोगी जानकारी मिलेगी, नियमानुसार आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी.

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि टिहरी के जोगी गांव की 28 वर्षीय रेशमा 6 अगस्त से लापता हैं. पति नवीन सिंह ने 7 अगस्त को पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराई. पुलिस जंगल, टिहरी झील और जलकुर नदी में तलाश कर रही है और ड्रोन की मदद भी ली जा रही है. रेशमा के मायके वालों ने ससुराल पक्ष पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है. झील किनारे मिली चप्पल और दरांती को परिजन रेशमा का मानने से इनकार कर रहे हैं. परिवार ने अनहोनी की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच और फॉरेंसिक जांच की मांग की है.

मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर दागे सवाल

इस बीच रेशमा के मायके वालों ने ससुराल पक्ष के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े किए थे. रेशमा के बुजुर्ग पिता राम सिंह रावत का कहना था कि बेटी के 6 अगस्त को लापता होने की सूचना ससुराल वालों ने तुरंत नहीं दी थी. उन्हें इस बात की जानकारी रिश्तेदारों के जरिए बाद में मिली. खबर मिलते ही रेशमा का भाई विकास रावत दुबई से अपने गांव वापस लौट आया.

भाई विकास का आरोप है कि रेशमा की ननद और परिवार के अन्य सदस्य उसे लगातार मानसिक रूप से परेशान कर रहे थे. परिजनों का मानना है कि रेशमा ने करीब 28 महीनों तक अपने पति का घर पर इंतजार किया था और उसका एक ढाई साल का मासूम बच्चा भी है. ऐसे में वह अपनी मर्जी से कोई गलत कदम नहीं उठा सकती.

झील किनारे मिले सामान पर छिड़ा विवाद

वहीं गुमशुदगी के अगले दिन यानी 7 अगस्त को झील के समीप कपड़े, एक चप्पल और दरांती मिलने का दावा किया गया था. लेकिन विकास ने इन चीजों को रेशमा का मानने से साफ इनकार कर दिया था. उसका कहना था कि 6 अगस्त को जब उस स्थान पर छानबीन की गई थी तब वहां कुछ नहीं था तो अगले दिन अचानक सामान कहां से आया? परिजनों ने पुलिस से इन वस्तुओं के फिंगरप्रिंट और फॉरेंसिक जांच कराने की मांग कर रहे हैं ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके.

यह भी पढ़ें: BCA-MCA की पढ़ई, IT कंपनी में जॉब...कौन हैं पौड़ी के साहिल, जो अपनी बीमार पत्नी को कंधे पर उठाकर 6 KM पैदल चले, जानिए उनकी पूरी कहानी