Uttarakhand Chardham Yatra 2026 : चारधाम यात्रा में 3 मई को बना नया रिकॉर्ड, 57,000+ पहुंचे तीर्थ, जानें किस धाम में पहुंचे सबसे अधिक श्रद्धालु

Uttarakhand Chardham Yatra 2026 update: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2026 ने रफ्तार पकड़ ली है, जहां अब तक लाखों श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं. केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में भारी भीड़ के बीच अब हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने की तैयारियां तेज हो गई हैं, जहां सेना बर्फ हटाने में जुटी है.

चारधाम यात्रा में 3 मई को बना नया  रिकॉर्ड
चारधाम यात्रा में 3 मई को बना नया रिकॉर्ड

अंकित शर्मा

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Chardham Yatra 2026 update: उत्तराखंड में इन दिनों चारधाम यात्रा की धूम है और श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है. 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया से शुरू हुई इस यात्रा में अब तक 6 लाख 62 हजार से ज्यादा लोग दर्शन कर चुके हैं. एक ओर जहां एक ओर गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ में रौनक बनी हुई है, वहीं अब सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने की तैयारियां भी अंतिम चरण में पहुंच गई हैं. चमोली जिले में स्थित इस पांचवें धाम के कपाट 23 मई को खुलने हैं, जिसके लिए सेना के जवान और सेवादार दिन-रात भारी बर्फ को हटाकर रास्ता तैयार करने में जुटे हैं.

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चारधाम यात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का भारी सैलाब

उत्तराखंड की चारधाम यात्रा 2026 में भक्तों का उत्साह चरम पर है. केवल 3 मई के आंकड़ों पर नजर डालें तो एक ही दिन में कुल 57,800 यात्रियों ने दर्शन किए हैं. इसमें केदारनाथ में सबसे अधिक 23,784, बद्रीनाथ में 17,037, यमुनोत्री में 8,669 और गंगोत्री में 8,310 श्रद्धालु पहुंचे. अब तक की कुल संख्या 6,62,978 पहुंच चुकी है, जिसमें सबसे ज्यादा 3,08,085 श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंचे हैं. इस बार यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को गंगोत्री-यमुनोत्री के कपाट खुलने के साथ हुई थी, जबकि केदारनाथ 22 अप्रैल और बद्रीनाथ 23 अप्रैल को खुले थे.

हेमकुंड साहिब में सेना और सेवादारों ने शुरू किया काम

चारधाम यात्रा के सफल आगाज के बाद अब  हेमकुंड साहिब के कपाट खोलने को लेकर भी तैयारियां तेज हो गई हैं. बता दें कि यहां से कपाट खुलने की तारीख  23 मई है. ऐसे में  इसकी तैयारियों को लेकर भारतीय सेना के 22 जवान और हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के 22 सेवादारों की टीम मुख्य गुरुद्वारे तक पहुंच चुकी है. 15,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस पवित्र स्थान पर पहुंचने के बाद टीम ने सबसे पहले अरदास की और गुरुद्वारे के दरवाजे खोलकर पूजा-अर्चना की. अब यह टीम गुरुद्वारे के आसपास और पवित्र सरोवर पर जमी भारी बर्फ को हटाने का काम तेजी से करेगी.

भारी ग्लेशियर को काटकर बनाया जा रहा है पैदल रास्ता

हेमकुंड साहिब की यात्रा का सबसे कठिन हिस्सा वह 3 किलोमीटर का पैदल मार्ग है जो हमेशा भारी ग्लेशियर और बर्फ की आगोश में रहता है. यहां सड़क जैसी कोई सुविधा न होने के कारण बर्फ को काटकर गलियों जैसा रास्ता बनाया जाता है. सेना और सेवादारों की टीम बीते एक महीने से इस दुर्गम क्षेत्र में व्यवस्था बनाने में जुटी है. पैदल मार्ग का आधा से ज्यादा काम पूरा हो चुका है, लेकिन अब भी कुछ हिस्सों में बर्फ की गलियां बनाना और गुरुद्वारे के पास की व्यवस्था दुरुस्त करना शेष है, जिसे यात्रा शुरू होने से पहले पूरा कर लिया जाएगा.

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