Joshimath Shrab Bandi News: उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र जोशीमठ में इन दिनों एक बड़ा सामाजिक बदलाव देखने को मिल रहा है. यहां शराबबंदी की मुहिम जंगल की आग की तरह फैल रही है. बद्रीनाथ यात्रा मार्ग पर के पास एक छोटे से गांव लामबगड़ से शुरू हुई ये अनूठी पहल अब पूरे क्षेत्र का संकल्प बन चुकी है. अब तक दो दर्जन से अधिक गांवों ने एक सुर में फैसला लिया है कि वे अपने सार्वजनिक और सामाजिक कार्यक्रमों को पूरी तरह नशामुक्त रखेंगे और शराब का पूरी तरह से बहिष्कार करेंगे.
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वहीं अगर इस दौरान कोई इस उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है तो उसे इसके लिए जुर्माना भी देना होगा. बताते चले की एक ओर जहां बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में शाराब बंदी का कानून लागू है, ऐसे में उत्तराखंड के ये गांव देश के लिए एक अलग उदाहरण पेश कर रहा है.
किन गांवों ने किया शराब का बहिष्कार
आपको बात दें कि बीते तीन दिनों के भीतर जोशीमठ ब्लॉक के तीन गांवों ने शराबबंदी लागू कर दी गई है. हालांकि, इसे लेकर काई कानून नहीं आया है. इन गांवों के ग्रामीणों ने खुद ही सामूहिक रूप से फैसला कर ये कदम उठाया है. इनमें पांडुकेश्वर, पुलना और रविग्राम गांव शामिल हैं. इसके तहत अब इन गांवों में शादी, मुंडन, सगाई या किसी भी धार्मिक आयोजन में न तो शराब बांटी जाएगी और न ही कोई व्यक्ति नशे में धुत होकर समारोह में शामिल हो सकेगा. ऐसे में अब इस फैसले को ऐतिहासिक कमद माना जा रहा है.
नियम तोड़ने पर लगेगा इतना जुर्माना
आपको बता दें कि गांवों ने इस मुहिम को कड़ाई से लागू करने के लिए जुर्माने की राशि भी तय की है. इसके तहत अगर कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता है या सामाजिक कार्यों में शराब पीता या पिलाता है तो उस पर 21 हजार से लेकर 51 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. इतना ही नहीं अगर कोई व्यक्ति शराब पीकर बारात या किसी समारोह में हंगामा करता है या उसमे शामिल होता है तो उसे भी इस दंड देना होगा.
महिलाओं की मुहिम ने बदली तस्वीर
बता दें कि इस मुहिम की शुरुआत नवंबर 2025 में जोशीमठ के लामबगड़ खीरों गांव से हुई थी. महिलाओं के द्वारा शुरू की गई इस मुहित में उन्हें पुरुषों का भी भरपूर साथ मिल रहा है. इसके तहत अब गांवों में हाेने वाले उत्सवों में अब नशे के कारण होने वाले विवाद कम हो गए हैं. वहीं महिलाएं भी इस मुहिम का कड़ाई से पालन करवा रही हैं, अगर कहीं भी नियम टूटते ही तो वे तुरंत इस पर जुर्माना वसूल लेतीं हैं. इस शामुक्त अभियान में जोशीमठ नगर के वार्डों सहित कई गांव शामिल हो चुके हैं.
मुहिम में जोड़े जाएंगे बचे हुए गांव
वही इस मुहिम को लेकर जोशीमठ के सुनील वार्ड के सभासद प्रदीप पंवार और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि युवा पीढ़ी को नशे की गर्त से बचाने के लिए ये निर्णय बेहद जरूरी था. इस मुहिम से परिवार के बीच शांत और सभ्य माहौल बन रहा है और सद्भाव भी बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि धीरे धीरे बचे हुए गांव भी इस मुहिम से जुड़ रहे हैं.
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