उत्तराखंड गुरुद्वारा विवाद: प्रशासन और निहंग सिखों के बीच वार्ता सफल, रातभर के तनाव के बाद वापस लौटा जत्था
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उत्तराखंड के कर्णप्रयाग और नगरासू गुरुद्वारा विवाद को लेकर पिछले कुछ समय से चल रहा गतिरोध अब पूरी तरह समाप्त हो गया है. पंजाब और हिमाचल प्रदेश से उत्तराखंड की ओर कूच कर रहे निहंग सिखों और स्थानीय प्रशासन के बीच रातभर चली मैराथन बैठक के बाद सहमति का रास्ता साफ हो गया. शुक्रवार सुबह करीब 3:30 बजे निहंग सिख वापस लौटने पर राजी हो गए, जिसके बाद प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है. इस समझौते के साथ ही देहरादून और ऋषिकेश में जनजीवन फिर से सामान्य हो गया है.
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा मामला कर्णप्रयाग और नगरासू गुरुद्वारों से जुड़े एक पुराने मामले को लेकर शुरू हुआ था. इस मामले में पुलिस ने चार निहंगों को हिरासत में लिया था. इसी गिरफ्तारी का विरोध करने और अपने साथियों की जमानत की मांग को लेकर निहंग सिखों ने 25 जून को उत्तराखंड कूच करने का ऐलान किया था.
निहंगों का यह जत्था हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर स्थित कुल्हाल चेक पोस्ट पर एकत्र हुआ था. हालांकि, पांवटा साहिब में प्रशासन के साथ शुरुआती बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकल सका था, जिसके बाद निहंगों ने आगे बढ़ने का फैसला किया.
रातभर चला हाई-वोल्टेज ड्रामा, लगा लंबा जाम
निहंग सिखों के जत्थे ने स्पष्ट किया था कि उनका इरादा कानून-व्यवस्था को बिगाड़ना नहीं है. वे केवल शांतिपूर्वक हेमकुंड साहिब की यात्रा करना और अपने साथियों की रिहाई चाहते थे. इसके बाद लगभग 50 निहंग दोपहिया वाहनों से देहरादून की तरफ बढ़े, जबकि अधिकांश निहंग वापस पांवटा साहिब लौट गए.
इस बीच, सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए देहरादून पुलिस ने प्रेमनगर समेत कई सीमावर्ती इलाकों को छावनी में तब्दील कर दिया था. स्थिति तब और संवेदनशील हो गई जब निहंगों के एक गुट ने ऋषिकेश की ओर रुख किया. इसके बाद जोगीवाला चेक पोस्ट और देहरादून-ऋषिकेश हाईवे पर भारी बैरिकेडिंग की गई, जिससे सड़कों पर घंटों लंबा ट्रैफिक जाम लग गया. पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए जोगीवाला के पास से ही जत्थे को आगे बढ़ने से रोक दिया.
रेस कोर्स गुरुद्वारे में बनी सहमति
देहरादून पहुंचे निहंग सिखों को रेस कोर्स स्थित गुरुद्वारे में ठहराया गया, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. यहीं पर जिला प्रशासन, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सिख समुदाय के प्रबुद्ध प्रतिनिधियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई. पूरी रात चली इस बातचीत में दोनों पक्षों ने अपनी बातें रखीं. आखिरकार, सुबह तड़के 3:30 बजे निहंग सिख शांतिपूर्वक पांवटा साहिब वापस लौटने के लिए मान गए.
नियंत्रण में कानून-व्यवस्था
इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले सिख समाज के प्रतिनिधि और कांग्रेस नेता अमरजीत सिंह ने कहा कि निहंग सिखों का उद्देश्य कभी भी शांति व्यवस्था को भंग करना नहीं था. वे केवल अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाना चाहते थे. उन्होंने साफ किया कि यह देवभूमि के लोगों और सिख समाज के बीच की कोई लड़ाई नहीं है, बल्कि कुछ गलतफहमियों और बयानबाजी के कारण तनाव बढ़ा था. उन्होंने संकट को टालने के लिए प्रशासन के प्रयासों की सराहना की.
वहीं, देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान और एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल ने संयुक्त रूप से बताया कि पूरे घटनाक्रम को बेहद शांति और सूझबूझ के साथ संभाल लिया गया है. क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और सुरक्षा के लिहाज से लगाए गए प्रतिबंधों को हटा दिया गया है.
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