जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक प्रोटेस्ट के दौरान शुक्रवार को एक अलग नजारा देखने को मिला. मंच पर एक पुलिस कॉन्स्टेबल पहुंचा और कहने लगा अहिंसा नहीं करनी है और इन गुंडो को तो हम देख लेंगे. पता चला ये उत्तराखंड पुलिस विभाग में कॉन्स्टेबल के पद पर हैं. शेयर सिंह ने मंच पर ऐलान करते हुए कहा कि अब वो रिजाइन कर रहे हैं. इसके साथ ही कंधे पर लगे अपने बैज को उन्होंने अभिजीत दीपके को सौंप दिया. सबके जेहन में एक ही सवाल था कि शेरसिंह कहां के रहने वाले हैं. कौन हैं और क्या वाकई ये स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट से प्रभावित होकर पुलिस विभाग से इस्तीफा दे रहे हैं.
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दरअसल हरिद्वार के पथरी निवासी और 2009 बैच के सिपाही शेर सिंह (बैज नंबर 118) वर्तमान में पिथौरागढ़ में तैनात थे, लेकिन वे पिछले काफी समय से बिना अनुमति ड्यूटी से गायब चल रहे थे. इस कारण इन्हें सस्पेंड कर दिया गया था. यही नहीं शेर सिंह पर अलग-अलग धाराओं में केस भी दर्ज हैं.
शेरसिंह पर लगे ये आरोप
उत्तराखंड पुलिस द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक शेरसिंह की अंतर-राज्यीय आपराधिक संगठन 'वाल्मीकि गैंग' के साथ मिलीभगत सामने आई थी. यही नहीं इनके बीच पैसों के लेन-देन आरोप भी लगा था. आरोपों की गंभीरता और विभागीय हित को देखते हुए प्रशासन ने 8 सितंबर 2025 को उनका तबादला हरिद्वार से पिथौरागढ़ कर दिया था.
इन धाराओं में दर्ज कया गया केस
- शेर सिंह के खिलाफ इन धाराओं में दर्ज किए गए केस.
- धारा 420 IPC- धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति सौंपने के लिए प्रेरित करना.
- धारा 467 IPC – मूल्यवान प्रतिभूति (valuable security), वसीयत या अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जालसाजी.
- धारा 468 IPC – धोखाधड़ी के उद्देश्य से की गई जालसाजी.
- धारा 471 IPC – जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का असली के तौर पर इस्तेमाल करना.
- धारा 120B IPC – गैर-कानूनी काम करने या गैर-कानूनी तरीकों से कानूनी काम करने की आपराधिक साजिश.
- धारा 111 BNS, 2023 – संगठित अपराध (Organised crime).
- धारा 351 BNS, 2023 – आपराधिक धमकी.
- धारा 352 BNS, 2023 – शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना.
7 महीने तक ड्यूटी से रहे गायब, 20 जुलाई को हुए निलंबित
जेल से रिहा होने के बाद शेर सिंह लंबी अवधि तक बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के ड्यूटी से अनुपस्थित रहे. उन्होंने कुल मिलाकर लगभग सात महीने तक काम नहीं किया. यद्यपि उन्होंने अप्रैल और मई के दौरान कुछ समय के लिए ड्यूटी की, लेकिन इसके बाद वे फिर से गायब हो गए.
अनुपस्थिति के कारण के रूप में उन्होंने तनाव और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित कुछ मेडिकल दस्तावेज विभाग में जमा कराए थे. हालांकि, प्रारंभिक जांच में बिना अनुमति लगातार अनुपस्थित रहने का दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ नियम 14(1) के तहत विभागीय जांच शुरू की गई. बार-बार अनुशासनहीनता के चलते 20 जुलाई 2026 को उन्हें आधिकारिक तौर पर सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया.
जंतर-मंतर पहुंचकर बैज सौंपने से गरमाया माहौल
विभागीय कार्रवाई और सस्पेंशन के बीच शेर सिंह का अचानक दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचना और सार्वजनिक रूप से अपना पुलिस बैज अभिजीत दीपके को सौंप देना एक नया मोड़ ले आया है. इस पूरे वाकये का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है.
कुमाऊं रेंज की IG निवेदिता कुकरेती कहती हैं, "अभी, शेर सिंह नाम का एक कॉन्स्टेबल छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को भड़काने वाला बेबुनियाद बयान दे रहा है, जो वायरल हो रहा है. इस कॉन्स्टेबल के बारे में यह ध्यान देने वाली बात है कि वह 28 जून, 2026 से पिथौरागढ़ जिले से बिना इजाज़त गैर-हाज़िर था. इस मामले में, पिथौरागढ़ के SP ने उसे नोटिस जारी किया था और कोई जवाब न मिलने पर उसे 20 जुलाई, 2026 को सस्पेंड कर दिया गया था.
बेगुनाह लोगों को डराता था शेर सिंह- IG निवेदिता
कॉन्स्टेबल का पहले का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है. वह और उसका एक साथी, कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि के साथ मिलकर संगठित अपराध में शामिल थे. वे बेगुनाह लोगों को डराते-धमकाते थे और उनकी ज़मीन हड़प लेते थे. उसे 15 जनवरी, 2025 को गिरफ़्तार करके जेल भेजा गया था. वह कई महीने जेल में रहा और अभी ज़मानत पर बाहर है. इस मामले में भी उसके खिलाफ़ नौकरी से निकालने की कार्रवाई चल रही थी और अभी, उसके दिए गए बेबुनियाद बयान के संबंध में ज़रूरी कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा रही है."
इनपुट: अंकित शर्मा
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