कभी AK-47, कभी गोलीबारी तो कभी हत्या का केस! 10 साल में कितनी बार जेल गए ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह?
Anant Singh Jail History: बिहार के मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं. एमएलसी चुनाव में जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध करने के बाद उन्हें पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया. वहीं, दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है. जानिए पिछले 10 साल में किन मामलों में अनंत सिंह को जेल जाना पड़ा.
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बिहार के मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. MLC चुनाव में जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध करने के बाद उन्हें पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया. इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा गया. अब उनकी पत्नी नीलम देवी को सरकारी आवास खाली करने का आदेश भी दिया गया है. इसी बीच, दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है. सवाल है कि क्या अनंत सिंह को एक बार फिर जेल जाना पड़ सकता है? पिछले दस साल में उन्हें किन-किन मामलों में जेल जाना पड़ा है? विस्तार से जानिए पूरी बात.
नीरज कुमार का विरोध करने के बाद बढ़ीं मुश्किलें
बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट के चुनाव में जदयू ने नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था. अनंत सिंह ने पार्टी के इस फैसले का विरोध किया और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया. उन्होंने नीरज कुमार को हराने की बात भी कही. इसके बाद जदयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया.
पार्टी ने इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने की मांग की. हालांकि, उनकी विधायकी पर अंतिम फैसला विधानसभा अध्यक्ष को लेना है. दूसरी तरफ, नीलम देवी को सरकारी आवास 25 नवंबर तक खाली करने का आदेश दिया गया है.
2015 में पुटुस यादव हत्याकांड में हुई गिरफ्तारी
अनंत सिंह के जेल जाने का सिलसिला 2015 से चर्चा में रहा है. जून 2015 में पुटुस यादव हत्याकांड के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था और जेल भेज दिया गया था. जेल में रहते हुए ही अनंत सिंह ने निर्दलीय चुनाव जीता था. इस मामले में बाद में उन्हें जमानत मिली.
2019: पैतृक आवास से AK-47 और हैंड ग्रेनेड बरामद होने का मामला
अगस्त 2019 में उनके पैतृक आवास से AK-47, कारतूस और हैंड ग्रेनेड बरामद होने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की थी. इस मामले में अनंत सिंह ने दिल्ली की अदालत में सरेंडर किया था और उन्हें जेल भेज दिया गया.
जून 2022 में इस मामले में उन्हें दस साल की सजा सुनाई गई. इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता भी समाप्त हो गई. हालांकि, अगस्त 2024 में पटना हाई कोर्ट ने हथियार बरामदगी से जुड़े मामलों में उनकी सजा रद्द कर दी और उन्हें बरी कर दिया. इसके बाद वह जेल से बाहर आए.
जनवरी 2025: गोलीबारी के मामले में किया सरेंडर
जनवरी 2025 में मोकामा के नौरंगा-जालालपुर इलाके में गोलीबारी के मामले में अनंत सिंह का नाम आया था. इसके बाद उन्होंने अदालत में सरेंडर कर दिया था. इस मामले में उन्हें न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया था. अगस्त 2025 में पटना हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आ गए थे.
अक्टूबर 2025: दुलारचंद यादव हत्याकांड में गिरफ्तारी
इसके बाद अक्टूबर 2025 में मोकामा में दुलारचंद यादव की मौत का मामला सामने आया. इस मामले में अनंत सिंह को 1 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया और न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया. जेल में रहते हुए अनंत सिंह ने जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर चुनाव जीता और फिर से विधायक बने. करीब चार महीने जेल में रहने के बाद पटना हाई कोर्ट ने 19 मार्च 2026 को उन्हें जमानत दे दी. वह 23 मार्च को जेल से बाहर आ गए.
30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
अब दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है. अगर सुप्रीम कोर्ट उनकी जमानत रद्द करने का आदेश देता है, तो उन्हें फिर जेल जाना पड़ सकता है.
अनंत सिंह पर पार्टी की कार्रवाई के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं. नीरज कुमार का एमएलसी चुनाव में विरोध करने के बाद उनके खिलाफ एक के बाद एक कार्रवाई हुई है. अब सभी की नजर 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर है. अगर उनकी जमानत रद्द हो जाती है, तो उन्हें एक बार फिर जेल जाना पड़ सकता है.
