Bihar MLC Election: अनंत सिंह की नाराजगी और जन सुराज के हमलों के बीच नीतीश कुमार के एक मास्टस्ट्रोक ने कैसे दिलाई नीरज कुमार को जीत?
Bihar MLC Election Result: पटना स्नातक सीट से जदयू के नीरज कुमार की जीत के बीच नीतीश कुमार की भूमिका चर्चा में है. अनंत सिंह की नाराजगी, जन सुराज के हमलों और चुनाव प्रचार के दौरान नीरज कुमार से नीतीश की मुलाकात से लेकर अनंत सिंह पर पार्टी की कार्रवाई तक, जानिए पूरा सियासी घटनाक्रम.
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बिहार के पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जदयू के मुख्य प्रवक्ता और पूर्व मंत्री नीरज कुमार ने तमाम राजनीतिक विरोधों और चुनौतियों के बीच शानदार जीत दर्ज की है. इस चुनाव के दौरान जहां एक तरफ जन सुराज और राजद हमलावर थे, वहीं दूसरी तरफ मोकामा से जदयू विधायक बाहुबली अनंत सिंह ने खुलकर नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और जन सुराज समर्थित उम्मीदवार का समर्थन किया था. ऐसे में चुनाव के दौरान यह सवाल उठ रहा था कि क्या पार्टी नेतृत्व का समर्थन नीरज कुमार के साथ है या नहीं. विस्तार से जानिए पूरी बात.
अस्पताल से घर लौटे नीरज कुमार से मिले नीतीश कुमार
चुनाव प्रचार के दौरान जब नीरज कुमार की तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तो डिस्चार्ज होने के ठीक बाद पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद उनके घर उनसे मिलने पहुंचे. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह कदम विपक्ष और प्रशांत किशोर द्वारा उठाए जा रहे सवालों का सबसे बड़ा और करारा जवाब था. इस मुलाकात की तस्वीर वायरल होने से मतदाताओं के बीच स्पष्ट संदेश चला गया कि पार्टी और नेतृत्व पूरी तरह से नीरज कुमार के साथ खड़े हैं. इसके अलावा, निशांत कुमार और अन्य वरिष्ठ नेताओं के प्रचार ने भी चुनावी मैदान में अहम भूमिका निभाई.
अनंत सिंह पर गिरी गाज, पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित
चुनाव संपन्न होने और परिणाम आने के बाद जदयू ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर बगावत करने वाले बाहुबली विधायक अनंत सिंह के खिलाफ सख्त कदम उठाया है. पार्टी ने अनुशासनहीनता का हवाला देते हुए अनंत सिंह को 6 साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी साफ कर दिया कि पार्टी हमेशा अनुशासन के दायरे में चलती है और इसके विपरीत कार्य करने वालों पर कार्रवाई तय है.
नीतीश कुमार की रणनीति से साफ हुआ सियासी संदेश
भले ही नीतीश कुमार ने इस चुनाव में कोई सार्वजनिक जनसभा या चुनावी प्रचार नहीं किया हो, लेकिन उनके समय पर उठाए गए राजनीतिक कदमों जैसे नीरज कुमार के घर पहुंचकर समर्थन जताना और चुनाव बाद अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई करना, ने यह पूरी तरह साबित कर दिया कि पार्टी के भीतर वफादार और जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाती है.
