बिहार में सवर्ण मुख्यमंत्री क्यों नहीं? 36 साल का सूखा और ललन सिंह के नाम पर छिड़ी नई सियासी जंग

Bihar politics 2026: बिहार की राजनीति में सवर्ण मुख्यमंत्री को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है. ललन सिंह के नाम की चर्चा के बीच 36 साल बाद फिर सवर्ण नेतृत्व की संभावनाएं तेज हुई हैं. जानिए क्यों सत्ता से दूर हुए सवर्ण और क्या बदल सकता है बिहार का सियासी समीकरण.

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Bihar politics 2026
बिहार में सवर्ण मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाएं हुई तेज
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बिहार में इन दिनों मुख्यमंत्री को लेकर सियासी पारा काफी हाई है. लोग नए मुख्यमंत्री को लेकर कई तरह के कयास लगा रहे हैं. इसी सियासी सरगर्मी के बीच एक नया सवाल तैरने लगा है कि, क्या बिहार में कोई सवर्ण नेता फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच पाएगा? करीब 36 साल पहले 1990 में जगन्नाथ मिश्रा बिहार के आखिरी सवर्ण मुख्यमंत्री थे, जिसके बाद राज्य की सत्ता समाजवाद के नाम पर पिछड़ों और अति-पिछड़ों के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है. अब नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच, अगले मुख्यमंत्री की जाति को लेकर गुणा-गणित तेज हो गया है.