HPSC भर्ती में OBC वर्ग की खाली सीटों पर सवाल किया तो कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने क्या वजह बताई?

हरियाणा Tak की रिपोर्ट के अनुसार, HPSC भर्तियों में ओबीसी वर्ग की सीटें खाली रहने और कैटेगरी सर्टिफिकेट की तारीख के विवाद पर कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने स्पष्ट किया कि आय सीमा (8 लाख रुपये) लागू होने के कारण करंट फाइनेंशियल ईयर का सर्टिफिकेट जरूरी है.

ADVERTISEMENT

रणबीर गंगवा
रणबीर गंगवा
Google CTA

हरियाणा में सरकारी नौकरियों और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर युवाओं के बीच उठ रहे सवालों पर कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने बड़ा बयान दिया है. एचपीएससी (HPSC) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे युवाओं की मांगों और ओबीसी (OBC) वर्ग की खाली रह गई सीटों के मुद्दों पर उन्होंने स्थिति स्पष्ट की.

क्या है पूरा मामला?

युवाओं ने कैटेगरी सर्टिफिकेट की तारीख (करंट फाइनेंशियल ईयर) को लेकर आ रही दिक्कतों और भर्ती परीक्षाओं में 35% न्यूनतम अंकों के क्राइटेरिया के कारण ओबीसी व अन्य वर्गों की सीटें खाली रहने का मुद्दा उठाया था. युवाओं का कहना था कि आरक्षण की मूल भावना प्रतिनिधित्व देने की है, ऐसे में आरक्षित सीटें खाली नहीं जानी चाहिए.

रणबीर गंगवा का जवाब:

कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने स्पष्ट किया कि नौकरियों के विज्ञापनों में नियम और शर्तें पहले से तय होती हैं. उन्होंने बताया कि बैकवर्ड क्लास (BC) का आरक्षण केवल जाति के आधार पर नहीं, बल्कि इसमें क्रीमी लेयर और आय सीमा (Income Limit) भी शामिल होती है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस आय सीमा को 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख रुपये किया है. यही वजह है कि पात्रता की जांच के लिए करंट फाइनेंशियल ईयर का इनकम सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है.

पंचायती राज चुनावों और नौकरियों के सर्टिफिकेट में अंतर को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि पहली बार कुछ युवाओं से दस्तावेज में तकनीकी चूक हुई थी, जिस पर सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए कैबिनेट में दोबारा सर्टिफिकेट लगाने की अनुमति देने का फैसला लिया था, लेकिन भविष्य के लिए सही दस्तावेज लगाना जरूरी है.

सीटें खाली रहने पर सफाई

भर्तियों में पद खाली रहने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि ऐसा केवल आरक्षित वर्ग के साथ नहीं है, बल्कि कई बार पेपर का स्तर कठिन होने के कारण जनरल कैटेगरी की सीटें भी खाली रह जाती हैं. यह किसी वर्ग विशेष को टारगेट करके नहीं छोड़ा जाता. यदि पद खाली रह जाते हैं, तो उन्हें आगामी भर्ती प्रक्रिया के तहत भरा जाता है. उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले आरक्षित वर्गों के बैकलॉग को छोड़ दिया जाता था, जबकि वर्तमान सरकार ने स्पेशल ड्राइव चलाकर बैकलॉग भरने का काम किया है.

ये भी पढ़ें: Haryana Electricity Strike: बिना लाइसेंस रद्द हुए कर्मचारी कैसे मान गए और क्यों खत्म की हड़ताल? रविंद्र घणगस ने बताई अंदर की कहानी