दक्षिणमुखी से उत्तरमुखी होंगे हनुमान जी, उज्जैन में मंदिर शिफ्टिंग पर क्यों मचा बवाल?
उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर को सड़क चौड़ीकरण के चलते टंकी चौक के पास शिफ्ट करने की तैयारी है. नया मंदिर तैयार है, लेकिन प्रतिमा अब तक नहीं हट सकी. नई जगह हनुमान जी दक्षिणमुखी से उत्तरमुखी हो जाएंगे. श्रद्धालु मंदिर को यहीं रखने की मांग कर रहे हैं. अब IIT से स्कैनिंग होगी.
ADVERTISEMENT

1/8
मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में खड़े हनुमान जी का मंदिर इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है. मंदिर को सड़क चौड़ीकरण के लिए दूसरी जगह शिफ्ट करने की तैयारी है. इसके लिए टंकी चौक के पास नया मंदिर भी तैयार कर दिया गया है. हालांकि, अब तक हनुमान जी की प्रतिमा अपनी मौजूदा जगह से नहीं हटाई जा सकी है. इस बीच मंदिर की दिशा को लेकर भी श्रद्धालुओं के बीच चर्चा तेज हो गई है. वर्तमान मंदिर में हनुमान जी दक्षिणमुखी हैं. नई जगह पर स्थापना होने के बाद प्रतिमा का मुख उत्तर दिशा की ओर हो जाएगा. इसी बदलाव को लेकर कई भक्त सवाल उठा रहे हैं. कुछ श्रद्धालु इसे भगवान की नाराजगी से जोड़कर देख रहे हैं और मंदिर को मौजूदा स्थान पर ही रखने की मांग कर रहे हैं.

2/8
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच मंदिर शिफ्ट करने की योजना
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को लेकर बड़े स्तर पर विकास कार्य प्रस्तावित हैं. इसी के तहत कंठाल से छत्री चौक तक सड़क को चौड़ा करने की योजना है. खड़े हनुमान जी का मंदिर इसी प्रस्तावित सड़क विस्तार की जद में आ रहा है. प्रशासन ने मंदिर को मौजूदा जगह से हटाकर टंकी चौक के पास स्थापित करने की योजना बनाई है. इसके लिए नए मंदिर का ढांचा भी तैयार हो चुका है. यहां स्थापना से जुड़ी कई तैयारियां पूरी कर ली गई थीं. बताया गया कि जन्माष्टमी के आसपास प्रतिमा को नए मंदिर में ले जाने की तैयारी थी. नए मंदिर को सजाया भी गया था. लेकिन प्रतिमा को हटाने की कोशिश आगे नहीं बढ़ सकी.

3/8
दक्षिणमुखी से उत्तरमुखी हो जाएंगे हनुमान जी
मंदिर को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा प्रतिमा की दिशा को लेकर हो रही है. अभी खड़े हनुमान जी का मुख दक्षिण दिशा की ओर है. वहीं, नए मंदिर में उनकी स्थापना उत्तर दिशा की ओर होने की बात सामने आ रही है. श्रद्धालुओं का एक वर्ग इस बदलाव से सहमत नहीं है. उनका कहना है कि जिस दिशा में वर्षों से हनुमान जी की पूजा होती आई है, उसे बदलना उचित नहीं होगा. इसी वजह से कुछ भक्त मान रहे हैं कि शायद बजरंगबली खुद अपनी जगह छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं. हालांकि, भगवान के नाराज होने की बात श्रद्धालुओं की आस्था और मान्यता से जुड़ी है. इसे प्रशासनिक या तकनीकी तथ्य के तौर पर नहीं कहा गया है.

4/8
चमत्कारी मंदिर की मान्यता, दूर-दूर से पहुंच रहे भक्त
स्थानीय लोगों के बीच खड़े हनुमान मंदिर को लेकर गहरी आस्था है. श्रद्धालु इसे चमत्कारी मंदिर मानते हैं. यहां आने वाले कई लोगों का विश्वास है कि बजरंगबली के दर्शन और पूजा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. मंदिर में मिलने वाले ताबीज और झड़नी को लेकर भी लोगों के बीच अलग-अलग मान्यताएं हैं. कई श्रद्धालु दावा करते हैं कि इनके इस्तेमाल से उन्हें परेशानियों और बीमारियों में राहत मिली. गुरुवार को भी मंदिर में भक्तों की अच्छी भीड़ दिखाई दी. कोई हनुमान चालीसा का पाठ कर रहा था तो कोई हाथ जोड़कर भगवान के सामने खड़ा था. कई श्रद्धालु मंदिर की तस्वीरें और वीडियो भी बना रहे थे.

5/8
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो
खड़े हनुमान मंदिर की चर्चा सोशल मीडिया पर भी तेजी से बढ़ी है. मंदिर और प्रतिमा को लेकर लगातार वीडियो और रील सामने आ रही हैं. कुछ वीडियो में प्रतिमा के नहीं हटने को चमत्कार बताया जा रहा है. वहीं, कुछ लोग इसे प्रशासन और विकास कार्यों से जोड़कर देख रहे हैं. सोशल मीडिया की वजह से मंदिर की पहचान उन लोगों तक भी पहुंची है, जो पहले इसके बारे में नहीं जानते थे. बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन को मंदिर के आसपास बैरिकेडिंग भी करनी पड़ी है.

6/8
भक्तों की मांग- विकास हो, लेकिन मंदिर भी यहीं रहे
गुरुवार को मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से बातचीत की गई. स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आए भक्तों ने भी मंदिर को लेकर अपनी राय रखी. अधिकांश लोगों की मांग थी कि खड़े हनुमान जी को इसी स्थान पर रहने दिया जाए. श्रद्धालुओं का कहना है कि उज्जैन में विकास कार्य जरूरी हैं और सिंहस्थ 2028 की तैयारियां भी महत्वपूर्ण हैं. लेकिन धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखते हुए रास्ता निकाला जा सकता है. लोगों ने यह भी कहा कि विकास कार्यों के कारण उज्जैन में पहले ही 60 से ज्यादा मंदिरों को अलग-अलग स्थानों पर शिफ्ट किया जा चुका है. ऐसे में अगर इस मंदिर को मौजूदा जगह पर बचाया जा सके तो शहर के विकास पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा. श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर से लाखों लोगों की आस्था जुड़ी है. इसलिए स्थान और प्रतिमा की दिशा में बदलाव से लोगों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं.

7/8
पुजारी बोले- पहले सहमति बनती तो विवाद नहीं होता
मंदिर के पुजारी महेश बैरागी ने कहा कि मंदिर शिफ्ट करने के मुद्दे पर प्रशासनिक अधिकारियों से सशर्त बातचीत हुई थी. उनका कहना है कि अगर शुरुआत में सभी पक्षों से सहमति बनती और धार्मिक परंपराओं को ध्यान में रखकर प्रक्रिया आगे बढ़ती तो स्थिति इतनी जटिल नहीं होती. पुजारी के मुताबिक सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है. महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले कई भक्त अब खड़े हनुमान जी के दर्शन के लिए भी पहुंच रहे हैं. उन्होंने बताया कि पिछले चार दिनों में मंदिर में भीड़ लगातार बढ़ी है.

8/8
अब IIT की तकनीकी जांच से खुलेगा रास्ता
मंदिर और प्रतिमा को लेकर अब प्रशासन तकनीकी विकल्प पर भी काम कर रहा है. पुजारी महेश बैरागी के अनुसार IIT की मदद से मंदिर और प्रतिमा की स्कैनिंग कराने की तैयारी है. इस जांच के जरिए यह समझने की कोशिश होगी कि प्रतिमा और आसपास की संरचना की वास्तविक स्थिति क्या है. साथ ही यह भी देखा जाएगा कि प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए दूसरी जगह ले जाना तकनीकी रूप से संभव है या नहीं. उधर, जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया पर चल रही कुछ बातों को भ्रामक बताया है. प्रशासन का कहना है कि प्रतिमा को हटाने के लिए अभी तक किसी मशीन या बल का इस्तेमाल नहीं किया गया है. अब सबकी नजर तकनीकी जांच और प्रशासन के अगले कदम पर है. एक तरफ सिंहस्थ 2028 और सड़क चौड़ीकरण की जरूरत है, तो दूसरी ओर खड़े हनुमान जी से जुड़ी श्रद्धालुओं की आस्था बड़ा मुद्दा बनी हुई है.
