भोपाल एम्स में बड़ी गड़बड़ी: 14 रुपये की आर एस की ट्यूब 943 रुपये में खरीदी, 125 से ज्यादा दवाएं और सर्जिकल आइटम 500% तक महंगे मिले

भोपाल एम्स में दवाओं और सर्जिकल सामानों की खरीद में बड़ा खुलासा. 14 रुपये की ट्यूब 943 रुपये में खरीदी गई. 125 से अधिक दवाएं और 200 सर्जिकल आइटम 500% से 6500% तक महंगे मिले. जानिए पूरी खबर.

ADVERTISEMENT

NewsTak
Google CTA

भोपाल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS Bhopal) में चिकित्सा उपकरणों और दवाओं की खरीदी में एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है. एम्स की आंतरिक समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, संस्थान में 14.27 रुपये की हाई प्रेशर एक्सटेंशन ट्यूब को 943.49 रुपये तक के भारी दामों पर खरीदा गया. जांच में सामने आया है कि 125 से अधिक दवाओं और 200 से ज्यादा सर्जिकल आइटमों की दरें बाजार और अन्य अनुबंधों की तुलना में 500 से 6500 प्रतिशत तक अधिक थीं.

145 करोड़ से बढ़कर 245 करोड़ हुआ बजट

रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान का कुल खरीदी बजट वर्ष 2022-23 में 145 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर सीधे 245 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. स्थायी वित्त समिति (SFC) की जनवरी 2026 की बैठक में बजट में हुई इस बेतहाशा बढ़ोतरी पर चिंता जताई गई और खर्चों को नियंत्रित करने की सलाह दी गई थी. हालांकि, एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो अधिक दरों पर सप्लाई करने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई की गई और न ही अतिरिक्त भुगतान की वसूली हुई है.

आयुष्मान और बीपीएल मरीजों की जेब पर भारी बोझ

एम्स की इस आंतरिक रिपोर्ट और दस्तावेजों में इस बात पर गंभीर चिंता जताई गई है कि इन अत्यधिक दरों पर हो रही खरीद के कारण आयुष्मान भारत योजना के निर्धारित पैकेज की सीमाएं अक्सर समाप्त हो जाती हैं, जिससे संस्थान को अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ता है. इसके अलावा, बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) के मरीजों को मुफ्त दवाइयां और सर्जिकल सामग्री मुहैया कराने वाले एम्स के बजट पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है.

बिलिंग और एमआरपी में भी बड़ा अंतर

जाति-जांच और शिकायतों के बाद तत्कालीन कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के निर्देश पर 15 अप्रैल 2025 को एक विशेष समिति गठित की गई थी. समिति ने 31 मई 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें अमृत फार्मेसी (AMRIT Pharmacy) और अन्य वेंडर्स की दरों में भारी अंतर उजागर हुआ. इसके अलावा, सेंट्रल फार्मेसी के रिकॉर्ड और शिकायतों में यह भी सामने आया कि मरीजों को मिलने वाले कई सामानों (जैसे प्लेन शीट और लिगेटिंग क्लिप्स) पर छपी एमआरपी (MRP) से ज्यादा दरों पर बिलिंग की गई.

मंत्रालय के अधिकारी मौन

एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट निजी अस्पतालों में दवाओं की कीमतों और मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने के लिए बाध्य किए जाने पर सुनवाई कर चुका है, वहीं केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन आने वाले इस संस्थान में हो रही इन अनियमितताओं पर जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह मौन साधे हुए हैं. एम्स प्रबंधन अब भविष्य के लिए टेंडर प्रक्रिया और अमृत फार्मेसी से खरीदी को सीमित करने की बात कह रहा है, लेकिन पुराने वित्तीय नुकसान और दोषियों पर कार्रवाई को लेकर स्थिति अब भी अस्पष्ट है.