अफवाह या हकीकत? भोपाल में गैस रिफिल के लिए उमड़ी भीड़, 2-2 घंटे लाइन में लगने को मजबूर हुए लोग
Bhopal LPG cylinder shortage: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी और अफवाहों के चलते गैस एजेंसियों पर भारी भीड़ उमड़ रही है. लोग सुबह 6 बजे से खाली सिलेंडर लेकर 2-2 घंटे लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं. सप्लाई में देरी और गैस की किल्लत की खबरों के बीच सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सप्लाई पर नजर रखने के लिए मंत्रियों की समिति गठित की है.

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रसोई गैस (LPG) के संकट ने आम जनता की रसोई का बजट और सुकून दोनों बिगाड़ दिया है. पिछले कई दिनों से गैस सप्लाई में आई बाधा और किल्लत की आशंका के बीच राजधानी की सड़कों पर अभूतपूर्व अफरा-तफरी का माहौल देखा जा रहा है. आलम यह है कि जो सिलेंडर पहले एक फोन कॉल पर घर पहुंच जाता था, उसे हासिल करने के लिए आज कड़ाके की धूप में लोग सुबह 6 बजे से ही खाली सिलेंडर लेकर गैस एजेंसियों के बाहर मीलों लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं.
घंटों का इंतजार और सप्लाई में देरी
भोपाल की गैस एजेंसियों पर रिफिल करवाने पहुंचे लोगों का कहना है कि उन्हें एक अदद सिलेंडर के लिए 2 से ढाई घंटे तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. ग्राहकों की शिकायत है कि ऑनलाइन बुकिंग के तीन-चार दिन बाद भी घरों पर सप्लाई नहीं हो रही है, जिसके कारण उन्हें मजबूरन खुद एजेंसी पर आना पड़ रहा है. कतार में खड़े कई लोगों ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कभी गैस के लिए इतनी लंबी लाइन नहीं देखी.
अफवाहों और युद्ध के डर से बढ़ी भीड़
सूत्रों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध की खबरों और गैस की कमी की अफवाहों ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है. इसी डर के चलते जिनके पास सिंगल सिलेंडर है, वे जल्द से जल्द रिफिल करवाने के लिए दौड़ रहे हैं. एजेंसियों पर हालात इतने खराब हैं कि बुकिंग खिड़की पर लोगों के बीच धक्का-मुक्की और बहस की तस्वीरें भी सामने आ रही हैं.
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सरकार ने गठित की मंत्रियों की समिति
गैस और ईधन की इस स्थिति को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने एक विशेष मंत्रिमंडल समूह का गठन किया है. इसमें तीन मंत्री शामिल हैं जो प्रदेश में गैस, डीजल और पेट्रोल की सप्लाई पर लगातार नजर रखेंगे. वहीं, अलग-अलग जिलों के कलेक्टर्स को कालाबाजारी रोकने के सख्त निर्देश दिए गए हैं और अधिकारियों को मैदान में उतरकर कार्रवाई करने को कहा गया है.
जमीनी हकीकत दावों से अलग
हालांकि सरकार सप्लाई सुचारू होने के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल विपरीत है. एजेंसियों पर उमड़ रही भीड़ और उपभोक्ताओं का बढ़ता गुस्सा यह साफ जाहिर कर रहा है कि सप्लाई चेन में कहीं न कहीं बड़ी बाधा आ रही है.










