क्यों इतनी खतरनाक है 'जुगाड़' से बनी कार्बाइड गन? पिछले साल 186 लोग हुए थे घायल, अब प्रशासन सख्त
भोपाल में दीपावली पर हादसों को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है. BNSS की धारा 163 के तहत कार्बाइड गन, कार्बाइड तोप और ऐसे खतरनाक उपकरणों के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है.
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दीपावली और आने वाले त्योहारों के दौरान आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा हादसों को रोकने के लिए भोपाल पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. पुलिस कमिश्नर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करते हुए कार्बाइड गन और धमाका करने वाले खतरनाक उपकरणों के निर्माण, बिक्री, भंडारण और उपयोग पर पूरी तरह से रोक लगा दी है.
पुलिस के आदेश के अनुसार, लोहे, स्टील या पीवीसी (PVC) पाइप में ज्वलनशील या विस्फोटक पदार्थ भरकर तेज धमाका करने वाले उपकरण गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं. इस प्रतिबंध के दायरे में कार्बाइड गन, कार्बाइड तोप, कार्बाइड लैम्प और इस प्रकार के अन्य सभी उपकरण शामिल हैं.
इन गतिविधियों पर रहेगा पूरी तरह से प्रतिबंध
पुलिस कमिश्नर के निर्देशों के तहत निम्नलिखित गतिविधियों पर रोक लगाई गई है:
- ऐसे उपकरणों का अवैध निर्माण, संयोजन, असेंबलिंग, मरम्मत या रूपांतरण करना.
- इन्हें खरीदना-बेचना, बिक्री के लिए प्रदर्शित करना, वितरण करना, भंडारण करना और आपूर्ति करना.
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसका मुख्य उद्देश्य त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना और पटाखों व विस्फोटक उपकरणों से होने वाले हादसों को रोकना है.
आंखों को नुकसान, आग और विस्फोट का बड़ा खतरा
पुलिस के अनुसार, भीड़भाड़ वाले बाजारों, रिहायशी इलाकों और संकरी गलियों में इन उपकरणों का प्रयोग आसपास मौजूद लोगों के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है. बच्चों की मौजूदगी वाले स्थानों पर यह गतिविधियां और भी खतरनाक साबित हो सकती हैं. इनके इस्तेमाल से:
- लोगों के घायल होने और त्वचा जलने का खतरा रहता है.
- आंखों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है.
- क्षेत्र में आग लगने और अप्रत्याशित विस्फोट की घटनाएं हो सकती हैं.
पिछली दीपावली पर 186 लोग हुए थे घायल
भोपाल में दीपावली 2025 के दौरान पटाखों और कार्बाइड गन से जुड़ी घटनाओं के कारण 186 लोगों की आंखों में चोट आई थी. इनमें से 15 मरीजों को आंखों के इलाज के लिए सर्जरी करानी पड़ी थी, जबकि 10 मरीजों की आंखों में गंभीर चोटें आई थीं. उस समय प्रशासन की ओर से कार्रवाई करते हुए 55 कार्बाइड गन जब्त की गई थीं. बीते वर्ष हुए इन हादसों की पुनरावृत्ति को रोकने के उद्देश्य से इस बार त्योहारों से पहले ही यह सख्ती बरती जा रही है.
क्या है कार्बाइड गन और यह क्यों है इतनी खतरनाक?
- यह कोई कंपनी या फैक्टरी में बनी प्रामाणिक बंदूक नहीं है, बल्कि पीवीसी पाइपों की मदद से तैयार किया गया एक स्थानीय जुगाड़ है. शुरुआत में इसका उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों द्वारा फसलों को बचाने और बंदरों या अन्य जंगली जानवरों को खेतों से भगाने के लिए किया जाता था, जिसे 'पीवीसी मंकी रिपेलर गन' भी कहा जाता था.
- पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम खर्च में बहुत तेज आवाज पैदा करने के कारण इसकी मांग तेजी से बढ़ी. बाजारों में महज 150 से 200 रुपये में मिलने वाली इस गन को युवाओं और बच्चों ने आतिशबाजी के आसान विकल्प के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जिससे हादसों का ग्राफ बढ़ा.
- गन के पिछले हिस्से में कैल्शियम कार्बाइड का टुकड़ा रखकर उसमें थोड़ा पानी मिलाया जाता है. पानी और कैल्शियम कार्बाइड के मिलते ही एसिटिलीन (Acetylene नाम की अत्यधिक ज्वलनशील गैस बनती है. जब माचिस या स्पार्क से इसे आग दी जाती है, तो दबाव के साथ तीव्र विस्फोट होता है, जिससे भारी मात्रा में गर्मी और जहरीली गैसें निकलती हैं.
- इसे बनाने में बेहद हल्के और सस्ते प्लास्टिक या पीवीसी पाइप का इस्तेमाल होता है, जो आंतरिक विस्फोट के अत्यधिक दबाव को नहीं झेल पाते. कई बार रासायनिक क्रिया के दौरान पाइप बीच में से ही फट जाता है या उसके टुकड़े-टुकड़े होकर उड़ जाते हैं, जिससे आसपास मौजूद लोगों के चेहरे, हाथ और शरीर पर गंभीर चोटें आती हैं.
