मध्य प्रदेश में लाडली बहना योजना की लिस्ट से 5 लाख महिलाओं के नाम कटे, सामने आई ये असली वजह
मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना में बड़ा बदलाव आया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार 5 लाख से ज्यादा महिलाओं के नाम लिस्ट से बाहर हो गए हैं. आखिर क्यों कट रहे हैं बहनों के नाम और क्या अब योजना की राशि बढ़कर 3000 रुपये होने वाली है? जानिए पूरी सच्चाई.

Ladli Behna Yojana News: मध्य प्रदेश की सबसे चर्चित 'लाडली बहना योजना' एक बार फिर विवादों और चर्चाओं के केंद्र में है. विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है और योजना को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. मामला केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि अब सरकारी आंकड़ों ने भी चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. महिलाओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वास्तव में लाभार्थियों की संख्या कम हो रही है और क्या उन्हें मिलने वाली राशि में जल्द बढ़ोतरी होगी.
क्यों कम हो गई लाडली बहनों की संख्या
विधानसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, लाडली बहना योजना के तहत पंजीकृत महिलाओं की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. साल 2023 में जब इस योजना का आगाज हुआ था, तब करीब 1 करोड़ 31 लाख से अधिक महिलाएं इससे जुड़ी थीं. लेकिन ताजा जानकारी के अनुसार, अब यह संख्या घटकर 1 करोड़ 25 लाख 29 हजार के आसपास रह गई है. इसका सीधा मतलब है कि पिछले कुछ समय में लगभग 5 लाख 77 हजार 474 महिलाओं के नाम इस योजना की सूची से हटा दिए गए हैं.
सरकार ने नाम काटने के पीछे क्या तर्क दिया
विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने स्पष्ट किया है कि नाम बेवजह नहीं काटे गए हैं. सरकार के अनुसार, इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं. पहला कारण है महिलाओं की उम्र का 60 वर्ष से अधिक हो जाना, क्योंकि इस उम्र के बाद पात्रता समाप्त हो जाती है. दूसरा कारण लाभार्थियों का निधन होना है और तीसरा कारण तकनीकी आधार पर अपात्रता पाया जाना है. आंकड़ों के मुताबिक, बड़ी संख्या में महिलाएं 60 साल की उम्र पार करने के कारण ही इस सूची से बाहर हुई हैं.
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विपक्ष की मांग और 3000 रुपये का वादा
एक तरफ जहां नाम कटने पर हंगामा मचा है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस विधायक महेश परमार और अन्य विपक्षी नेता योजना की राशि बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द महिलाओं को मिलने वाली राशि बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह करनी चाहिए. वर्तमान में मोहन सरकार महिलाओं को 1500 रुपये प्रति माह दे रही है, जिसे दिवाली के समय बढ़ाया गया था. सरकार का कहना है कि वह अपने वादे पर कायम है और आने वाले समय में इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा.
नए पंजीयन और महिलाओं की चिंता
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल नए रजिस्ट्रेशन को लेकर है. कांग्रेस का आरोप है कि एक तरफ पात्र महिलाओं के नाम कट रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नए पंजीयन की खिड़की बंद पड़ी है. इससे ऐसी महिलाएं परेशान हैं जो अब इस योजना के दायरे में आने के योग्य हो चुकी हैं. इसके अलावा, जिन महिलाओं के नाम किसी तकनीकी खामी या गलत जानकारी की वजह से कटे हैं, उनके लिए दोबारा आवेदन करने या शिकायत दर्ज कराने का रास्ता फिलहाल साफ नहीं दिख रहा है.










