"हां, नौकरी मांगने आई थी..." सीएम मोहन से मिलने गई सुमित्रा महाजन के बयान से गरमाई सियासत

इंदौर में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सीएम मोहन यादव से मुलाकात की. मीडिया के पूछने पर उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह ‘नौकरी मांगने आई थीं’. बैठक में नर्मदा पाइपलाइन लीकेज और इंदौर के जल संकट पर भी चर्चा हुई

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इंदौर की सियासत में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन यानी ‘ताई’ का एक मजाकिया बयान इन दिनों खासी चर्चा में है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद जब मीडिया ने ताई से पूछा कि आखिर वे सीएम से मिलने क्यों पहुंची थीं, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि ‘हाँ, मैं नौकरी मांगने आई थी.’ ताई के इस मजाकिया अंदाज ने सियासी गलियारों में चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है, लेकिन इस मुलाकात के दौरान सिर्फ मजाक ही नहीं हुआ, बल्कि इंदौर के गंभीर जल संकट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया. ताई ने शहर में नर्मदा पाइपलाइन में बार-बार होने वाले लीकेज पर गहरी चिंता जताई. उनका कहना था कि पाइपलाइन में रिसाव के कारण जलापूर्ति प्रभावित होती है, और यदि समय रहते इसका स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में पानी का संकट और अधिक गहरा सकता है.

पानी की समस्या पर ताई का अहम सुझाव और सियासी घमासान

इंदौर में पानी की समस्या के स्थायी समाधान के लिए सुमित्रा महाजन ने प्रशासन को एक अहम सुझाव दिया है. उन्होंने शहर की पाइपलाइनों की डिजिटल मैपिंग कराने की बात कही है, ताकि पाइपलाइन की सटीक लोकेशन का पता चल सके और लीकेज होने पर उसकी तुरंत पहचान कर जल्द से जल्द मरम्मत की जा सके.

लगातार आठ बार सांसद रह चुकीं सुमित्रा महाजन का यह सुझाव ऐसे वक्त पर सामने आया है, जब इंदौर में जलापूर्ति और पानी के इंतजामों को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं. हाल ही में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में जल संकट को लेकर एक आपातकालीन बैठक बुलाई थी, लेकिन इस बैठक में नौ में से पांच विधायकों की गैरमौजूदगी ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी थी. इसके बाद विधायक मालिनी गौड़ ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर आरोप भी लगाए थे.अब ताई द्वारा पानी की समस्या को लेकर प्रशासन को सुझाव दिए जाने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं क्या इंदौर में जल संकट से निपटने के लिए चल रही कोशिशों का नतीजा जल्द सामने आएगा? क्या पाइपलाइनों की डिजिटल मैपिंग से लीकेज की समस्या का स्थायी समाधान निकल पाएगा और क्या प्रशासन ताई के सुझाव पर गंभीरता से अमल करेगा?

फिलहाल, ताई का ‘नौकरी’ वाला मजाकिया बयान सुर्खियों में जरूर है, लेकिन पानी के मुद्दे पर उनकी चिंता ने एक बार फिर इंदौर की जल व्यवस्था को चर्चा के केंद्र में ला दिया है. मंत्री की बैठक, विधायकों के आरोप और अब ताई के सुझाव के बीच सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या इंदौर को जल संकट से बचाने के लिए ठोस और स्थायी कदम उठाए जाएंगे.

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