हिसाब-किताब: इलेक्टोरल बॉन्ड पर फंसी सरकार? समझिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला किसपर और कैसे पड़ा भारी

अभिषेक गुप्ता

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Electoral Bond: देश में इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर चर्चा तेज है. सुप्रीम कोर्ट(SC) भी इस मामले पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया(SBI) को छोड़ने के मूड में नजर नहीं आ रहा है. इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी हर सुनवाई में SC, SBI को लगातार झटका दे रहा है. पहले डेटा साझा करने की तारीख बढ़ाने की SBI की याचिका को खारिज कर दिया, फिर डेडलाइन दी. फिर जब SBI ने जो डेटा चुनाव आयोग से साझा किया उसे SC ने अधूरा बताकर एक बार फिर से फटकार लगाते हुए 21 तारीख को इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी सभी जानकारी साझा करने की नई डेडलाइन 21 मार्च को दे दी है. इस बार के हिसाब-किताब में TAK चैनल्स के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर ने इलेक्टोरल बॉन्ड का हिसाब-किताब किया हैं. आइए समझते है इलेक्टोरल बॉन्ड का पूरा मजरा. 

इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या है?

देश की सर्वोच्च अदालत ने इलेक्टोरल बॉन्ड(EB) को 15 फरवरी को असंवैधानिक घोषित कर दिया था. SC ने इलेक्टोरल बॉन्ड पर यह फैसला उसके खिलाफ दायर की गई कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया. SC ने अपने फैसले में यह भी आदेश दिया कि, 12 अप्रैल 2019 से 6 मार्च 2024 तक राजनैतिक दलों को इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम से मिले चंदे का पूरा ब्योरा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया(SBI), चुनाव आयोग को 6 मार्च शाम 5 बजे तक देगा जिसे चुनाव आयोग एक हफ्ते में यानी 13 मार्च तक अपनी वेबसाईट पर पब्लिश करेगा. 

पहले तो SBI ने डेटा साझा करने में आना-कानी की और SC में डेटा उपलब्ध कराने की डेट बढ़ाने की अर्जी लगाई. फिर जब SC को कोई मोहलत नहीं मिली तब  SBI ने कंपनियों और व्यक्तियों का ब्योरा दिया जिन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे थे. साथ ही उन पार्टियों का भी विवरण दिया जिन्हें ये चुनावी चंदा दिया गया था. इस मामले में नया मोड तब आया जब SBI के डेटा साझा करने के बाद SC ने उसे जमकर फटकार लगा दी. दरअसल मामला ये हुआ कि, SBI ने चुनाव आयोग से जो डेटा साझा किया था उसमें इलेक्टोरल बॉन्ड के खरीददार का जो 'अल्फा न्यूमेरिक नंबर' होता है उसे शेयर नहीं किया था.यही वजह है कि, SC ने उसे अधूरा बताया.

'अल्फा न्यूमेरिक नंबर' एक ऐसा नंबर है जिससे ये पता चल पाएगा कि, किस व्यक्ति या कंपनी ने किस राजनीतिक पार्टी को चंदा दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में ये कहा था कि, हम चाहते है कि, इलेक्टोरल बॉन्ड से जिस भी दल को जितना पैसा मिला है उसकी जानकारी पब्लिक डोमेन में होनी चाहिए जिससे जनता ये जान सके कि, किसने किसको कितना चंदा दिया है. SC ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम की गुप्त दान देने की व्यवस्था को संविधान में आर्टिकल 19(1) में दिए गए जानने के अधिकार का उल्लंघन बताया था. SBI ने जो डेटा दिया उससे साफ-साफ ये पता नहीं चल पा रहा था कि, किसने किस पार्टी को पैसा दिया है. इससे SC ने अपने आदेश में जिस बात का जिक्र किया था वो पूरा होता नजर नहीं आ रहा था. 

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SBI को देना होगा इलेक्टोरल बॉन्ड का पूरा डेटा: CJI

इस मामले पर हुई 18 मार्च की सुनवाई में चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने स्पष्ट आदेश दिया कि, SBI को इलेक्टोरल बॉन्ड के 'अल्फा न्यूमेरिक नंबर' चुनाव आयोग से साझा करना अनिवार्य है. वहीं CJI ने कहा कि, SBI को गुरुवार यानी 21 मार्च शाम 5 बजे तक इलेक्टोरल बॉन्ड के सभी विवरण घोषित करना होगा. फिर चुनाव आयोग SBI से विवरण प्राप्त होने के बाद तुरंत अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करेगा. 

किसने किसको कितना दिया पैसा?

SBI के डेटा आने के बाद कुछ राजनैतिक दलों ने अपने पार्टी को मिले चंदे का डेटा बताया है. अब तक की जानकारी के मुताबिक, फ्यूचर गेमिंग ने 509 करोड़ DMK को, मेघा इंजीनियरिंग ने 155 करोड़ DMK, JDS को, एंबेसी ग्रुप ने 22 करोड़ JDS को, इंडिया सीमेंट ने 14 करोड़ DMK को, बजाज ग्रुप ने 10.5 करोड़ NCP, AAP को, सन टीवी ने 10 करोड़ DMK को, त्रिवेणी ग्रुप ने 8 करोड़ DMK को, और चेन्नई सुपर किंग्स ने 5 करोड़ ADMK को दिया है. 

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पूरा वीडियो आप यहां देख सकते हैं- 

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