कौन है रवींद्र सिंह भाटी जो 4 महीने पहले बना निर्दलीय विधायक, अब बाड़मेर से लड़ रहा सांसदी का चुनाव

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राजस्थान की बाड़मेर लोकसभा सीट अचानक चर्चा में आ गई है. कारण हैं शिव से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले रविंद्र सिंह भाटी. दरअसल भाटी ने हाल ही में राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में शिव सीट से बड़ी जीत दर्ज की थी.अब आगामी चुनाव के लिए भाटी ने बाड़मेर सीट से निर्दलीय नामंकन इस लोकसभा सीट से किया है. नवंबर में एक हफ्ते के लिए भाटी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे. लेकिन बीजेपी से टिकट ना मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया था और बड़ी जीत दर्ज की थी.

रविंद्र सिंह भाटी के बाड़मेर से नामंकन दाखिल करने के बाद ये सीट चर्चा में आ गई है. बता दें कि जब भाटी नामंकन दाखिल करने पहुंचे तो भारी तादाद में उनके समर्थक जन सैलाब की तरह यहां पहुंचे. उन्होंने बाड़मेर की सड़कों पर नांमाकन रैली निकाली.

त्रिकोणीय होगा मुकाबला

बाड़मेर लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी ने कैलाश चौधरी को अपना प्रत्याशी घोषित किया है. कांग्रेस ने उमेदराम बेनीवाल को यहां से टिकट दिया है. दोनों को कड़ा मुकाबला देने के लिए रविंद्र सिंह भाटी ने भी चुनावी ताल ठोक दी है. बाड़मेर जीतने के लिए तीनों ही प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक रखी है.

शिव सीट जीतने पर भाटी आए थे चर्चा में

दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव में रविंद्र सिंह भाटी ने निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए सबसे ज्यादा 78726 वोट हासिल किए थे. वहीं कांग्रेस के अमीन खान को 54692 और बीजेपी के स्वरूप सिंह खारा को 22412 वोट अपने नाम कर पाए थे. भाटी के कांग्रेस और बीजेपी को हराने के बाद से ही राज्य से लेकर पूरे देश की राजनीति की चर्चा में आ गए थे.

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2019 में कैसे थे इस सीटे के नतीजे

2019 लोकसभा चुनाव में राज्य की सभी 25 सीटों पर NDA ने क्लीन स्वीप किया था. भाजपा के कैलाश चौधरी ने बाड़मेर लोकसभा सीट से बड़ी जीत दर्ज की थी. उन्होंने कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह को 323808 वोटों से मात दी थी. कैलाश ने 826526 और मानवेंद्र ने 522718 वोट हासिल किए थे.

क्या कहते हैं बाड़मेर के समीकरण

बाड़मेर सीट पर जातीय आंकड़े की बात करें तो इस सीट पर 21,60,000 के करीब मतदाता हैं. इसमें 4.5 लाख जाट वोटर्स हैं तो वहीं राजपूत समाज से 3 लाख मतदाता आते हैं. मुस्लिम समाज के 2.70 लाख यहां से वोट करते हैं. जबकि एससी और एसटी के बात करें तो दोनों को मिलाकर कुल 4 लाख करीब वोटर्स हैं. ओबीसी की लगभग 23 जातियों को मिलाकर 6.5 लाख मतदाता हैं. वहीं 80 हजार ब्राह्मण और 1 लाख अन्य वोटर्स हैं.

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