पंजाब चुनाव से पहले आप को झटका देने वाले सीएम मान के पूर्व OSD मंजीत सिंह सिद्धू कौन हैं? जानिए कांग्रेस में क्यों हुए शामिल
Punjab Politics: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले आम आदमी पार्टी को झटका लगा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के पूर्व OSD और AAP के शुरुआती सदस्यों में शामिल मंजीत सिंह सिद्धू कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. उन्होंने भगवंत मान पर निशाना साधते हुए कहा कि मान साहब सत्ता के साथ हैं, जबकि वह पंजाब के हितों के साथ खड़े हैं. जानिए उनके राजनीतिक सफर की पूरी कहानी.
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पंजाब में आगामी वर्ष यानी 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले है. चुनाव को लेकर सरगर्मी काफी तेज है और हर पार्टी अपने दम-खम से चुनाव लड़ने की तैयारी है. इसी बीच राज्य की राजनीति में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है. आम आदमी पार्टी (AAP) के शुरुआती दिनों से जुड़े रहे वरिष्ठ पत्रकार और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के पूर्व ओएसडी (OSD) मंजीत सिंह सिद्धू ने 'आप' छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है. 13 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नए अध्यक्ष प्रगट सिंह की मौजूदगी में उन्होंने कांग्रेस की औपचारिक सदस्यता ग्रहण की. विस्तार से जानिए पूरी बात.
36 साल पुरानी दोस्ती और राजनीतिक सफर
मंजीत सिंह सिद्धू और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के बीच कॉलेज के दिनों से 36 साल पुरानी गहरी दोस्ती रही है. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 15 वर्षों तक सक्रिय रहने के बाद, सिद्धू 2014 में आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे. उन्होंने पंजाब में 'आप' के संगठन को मजबूत करने और मीडिया विंग को संभालने में अहम भूमिका निभाई. 2022 में 'आप' की सरकार बनने के बाद जनवरी 2023 में उन्हें मुख्यमंत्री का OSD बनाया गया था. हालांकि, नवंबर 2023 में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए OSD पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद वे पंजाब विधानसभा में 'आप' की विधायी शाखा के सचिव के रूप में कार्य कर रहे थे.
'मैं पंजाब के हितों के साथ खड़ा हूं, मान साहब सत्ता के साथ': सिद्धू
कांग्रेस में शामिल होने के बाद मंजीत सिंह सिद्धू ने कहा कि उन्होंने पार्टी में 'आप' को खड़ा करने में कड़ी मेहनत की थी, लेकिन बाद में उन्हें नजरअंदाज किया जाने लगा. मुख्यमंत्री भगवंत मान पर सीधा निशाना साधते हुए सिद्धू ने कहा कि 'मान साहब सत्ता (कुर्सी) के साथ खड़े हैं, जबकि वे खुद पंजाब के हितों के साथ खड़े हैं.' उन्होंने साफ किया कि वे कांग्रेस में किसी पद की लालसा में नहीं आए हैं. उन्होंने कहा, 'मेरे पास कोई पद नहीं है. न तो मैंने उनसे किसी पद की मांग की है और न ही कभी करूंगा.'
राहुल गांधी और 'अच्छे समय' का जिक्र
अपने निर्णय पर बात करते हुए सिद्धू ने कहा कि लोग उनसे अक्सर पूछते थे कि वे चुप क्यों बैठे हैं. उन्होंने कहा, 'मैं एक अच्छे समय और स्वस्थ राजनीति का इंतजार कर रहा था. राष्ट्रीय स्तर पर स्थितियों में जो बदलाव शुरू हुआ है, उसमें जिन्होंने उस भावना को समझा, उनमें मैंने राहुल गांधी जी को देखा.'
सियासी समीकरण और आगे की राह
पंजाब में अगले साल की शुरुआत (जनवरी-फरवरी) में होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सीएम के इतने करीबी सहयोगी का कांग्रेस में जाना राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, हालिया सर्वेक्षणों में 117 सीटों वाली पंजाब विधानसभा में 'आप' की पकड़ फिलहाल मजबूत बताई गई है, जिसके बाद कांग्रेस और भाजपा अपनी रणनीतियों पर मंथन कर रही हैं.
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस में मंजीत सिंह सिद्धू की यह नई पारी पंजाब की राजनीति को किस दिशा में ले जाती है और 'आप' के इस पूर्व रणनीतिकार का अनुभव कांग्रेस के लिए कितना फायदेमंद साबित होता है.
