पंजाब में फिर साथ आएंगे BJP-अकाली दल? गठबंधन की चर्चा अंतिम दौर में, सीटों का फॉर्मूला लगभग तय

पंजाब में बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के दोबारा गठबंधन की चर्चा तेज है. सूत्रों के मुताबिक, सीटों के बंटवारे पर बातचीत अंतिम दौर में है. बीजेपी को 35 से 45 सीटें मिल सकती हैं. अकाली दल बड़े भाई की भूमिका में रह सकता है. हालांकि, गठबंधन का औपचारिक ऐलान अभी बाकी है.

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Akali Dal-BJP alliance
अकाली दल नेता सुखबीर बादल और पीएम नरेंद्र मोदी
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पंजाब की राजनीति में बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल एक बार फिर साथ आ सकते हैं. दोनों दलों के बीच गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत अंतिम दौर में पहुंचने की खबर है. सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही गठबंधन का औपचारिक ऐलान हो सकता है. इस बार बीजेपी 117 विधानसभा सीटों में से 35 से 45 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही है. वहीं, अकाली दल गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका में रह सकता है.

दोनों पार्टियां पहले भी लंबे समय तक साथ चुनाव लड़ चुकी हैं. लेकिन 2020 में कृषि कानूनों को लेकर उनके बीच गठबंधन टूट गया था. इसके बाद दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़े. अब दोनों को लग रहा है कि साथ आकर चुनाव लड़ना उनके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.

सीटों के बंटवारे पर क्या है चर्चा?

सूत्रों के अनुसार, पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों को लेकर दोनों दलों के बीच बातचीत चल रही है. बीजेपी को 35 से 45 सीटें मिल सकती हैं. बाकी सीटों पर अकाली दल और उसके सहयोगी दल चुनाव लड़ सकते हैं. हालांकि, सीटों के बंटवारे पर अभी औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है.

अकाली दल के सूत्रों का कहना है कि दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़कर देख चुकी हैं. अब यह समझ बन रही है कि अलग रहने से दोनों को नुकसान हो रहा है. ऐसे में पुराने सहयोगियों के दोबारा साथ आने की संभावना बढ़ गई है.

अकाली दल के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, गठबंधन के ऐलान में ज्यादा देरी नहीं होनी चाहिए. चुनाव से पहले दोनों पार्टियों को संगठनात्मक तालमेल बैठाना होगा. उम्मीदवारों के चयन और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय के लिए भी समय चाहिए.

गठबंधन में अकाली दल बड़े भाई की भूमिका में रह सकता है. अगर दोनों दल मिलकर चुनाव जीतते हैं, तो मुख्यमंत्री पद पर अकाली दल का मजबूत दावा माना जा रहा है. दूसरी तरफ, बीजेपी उन विधानसभा सीटों पर ज्यादा जोर दे रही है, जहां पिछले चुनावों में उसका प्रदर्शन बेहतर रहा था.

अमित शाह के बयान से गठबंधन की चर्चा तेज

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान के बाद पंजाब में बीजेपी और अकाली दल के संभावित गठबंधन की चर्चा को और बल मिला है. अमित शाह ने पंजाब में एनडीए की सरकार बनने की बात कही थी. अब तक बीजेपी नेता पंजाब में अपनी पार्टी की सरकार बनाने का दावा करते रहे हैं. ऐसे में एनडीए सरकार बनने की बात को दोनों दलों के दोबारा साथ आने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के आंतरिक आकलन में भी अकाली दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ने को फायदेमंद माना गया है. पार्टी के आकलन में गठबंधन के 80 से ज्यादा सीटें जीतने की संभावना का दावा किया गया है. हालांकि, यह बीजेपी का आंतरिक आकलन है. इसे चुनावी नतीजा या स्वतंत्र अनुमान नहीं माना जा सकता.

दोनों दलों के वोट बैंक से बन सकता है नया समीकरण

बीजेपी और अकाली दल के बीच गठबंधन की एक बड़ी वजह दोनों दलों का वोट बैंक और पंजाब में उनकी क्षेत्रीय पकड़ है. पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों के आंकड़ों में दोनों पार्टियों को मिले वोट इस संभावित गठबंधन की अहमियत दिखाते हैं.

2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पंजाब में करीब 25 लाख वोट मिले थे. उसका वोट प्रतिशत 18.56 रहा था. वहीं, अकाली दल को लगभग 18 लाख वोट मिले थे. पार्टी का वोट प्रतिशत 13.42 था. दोनों दलों के वोट जोड़ने पर आंकड़ा करीब 43 लाख पहुंचता है. संयुक्त वोट प्रतिशत लगभग 32 फीसदी बैठता है.

वहीं, 2022 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल को करीब 28.61 लाख वोट मिले थे. उसका वोट प्रतिशत 18.38 रहा था. बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को लगभग 12 लाख वोट मिले थे. इनका वोट प्रतिशत करीब 8 फीसदी था. दोनों के वोट मिलाने पर कुल आंकड़ा लगभग 40 से 41 लाख तक पहुंचता है. हालांकि, अलग-अलग चुनावों में मिले वोटों को सीधे जोड़कर विधानसभा सीटों का अनुमान लगाना पूरी तरह सटीक नहीं होता. लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदाताओं की पसंद अलग-अलग हो सकती है.

AAP और कांग्रेस के वोट प्रतिशत में क्या बदलाव आया?

पंजाब में बीजेपी और अकाली दल की नजर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के वोट बैंक पर भी है. 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 42 फीसदी वोट हासिल किए थे. पार्टी ने 117 में से 92 सीटों पर जीत दर्ज की थी. वहीं, कांग्रेस को 22.98 फीसदी वोट मिले थे.  इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में आम आदमी पार्टी का वोट प्रतिशत घटकर 26.30 फीसदी रह गया. कांग्रेस का वोट प्रतिशत 26.02 फीसदी रहा.

बीजेपी नेताओं का मानना है कि वोटों में आए इस बदलाव के बीच अकाली दल के साथ गठबंधन से विपक्षी मुकाबला मजबूत हो सकता है. हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर चुनावी नतीजों की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती.

45 विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी अकाली दल से आगे रही

बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनाव के विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों को भी अपने पक्ष में बता रही है. पार्टी के मुताबिक, उसे 23 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त मिली थी. छह सीटों पर वह दूसरे और 16 सीटों पर तीसरे स्थान पर रही थी. इन आंकड़ों के आधार पर बीजेपी का दावा है कि कुल 45 विधानसभा क्षेत्रों में उसका प्रदर्शन अकाली दल से बेहतर रहा. दूसरी तरफ, अकाली दल नौ विधानसभा क्षेत्रों में पहले स्थान पर रहा था. पांच सीटों पर पार्टी दूसरे और पांच पर तीसरे स्थान पर रही थी.

बीजेपी का तर्क है कि अगर दोनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़ते, तो कई विधानसभा क्षेत्रों में मुकाबले की तस्वीर अलग हो सकती थी. इसी आधार पर पार्टी इस बार पुराने गठबंधन की तुलना में ज्यादा सीटें चाहती है.

पहले 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी बीजेपी

बीजेपी और अकाली दल के पुराने गठबंधन में सीटों का बंटवारा काफी हद तक तय रहता था. बीजेपी आमतौर पर पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 23 पर चुनाव लड़ती थी. इस बार बीजेपी पिछले लोकसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन का हवाला देकर ज्यादा सीटों की मांग कर रही है. 35 से 45 सीटों का संभावित फॉर्मूला इसी वजह से अहम माना जा रहा है.

हालांकि, सीटों का बंटवारा गठबंधन की राह में सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है. पंजाब में बीजेपी को पारंपरिक रूप से शहरी इलाकों में मजबूत माना जाता है, जबकि अकाली दल की पकड़ ग्रामीण क्षेत्रों में रही है. लेकिन इस बार अकाली दल अर्ध-शहरी यानी सेमी-अर्बन सीटों पर भी चुनाव लड़ना चाहता है. इनमें कुछ ऐसी सीटें हो सकती हैं, जहां बीजेपी अपनी स्थिति मजबूत मानती है. ऐसे में दोनों दलों को उम्मीदवारों के चयन और सीटों की अदला-बदली पर सहमति बनानी होगी.

अपने पुराने नेताओं को भी साथ लाने की कोशिश में अकाली दल

गठबंधन की चर्चा के बीच अकाली दल अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश भी कर रहा है. पार्टी से अलग हुए नेताओं और बिखरे हुए धड़ों को दोबारा साथ लाने पर विचार किया जा रहा है. अकाली दल उन पुराने नेताओं की वापसी को लेकर भी चर्चा कर रहा है, जिन्होंने आपसी मतभेदों के चलते पार्टी छोड़ दी थी. इससे पार्टी को अपने संगठन और राजनीतिक आधार को मजबूत करने में मदद मिल सकती है. ऐसे में बीजेपी के साथ गठबंधन के अलावा अकाली दल के लिए अपने पुराने नेताओं को एकजुट करना भी अहम होगा.

1996 से 2020 तक साथ रहे दोनों दल

बीजेपी और अकाली दल का गठबंधन पंजाब की राजनीति में काफी पुराना रहा है. दोनों दल 1996 से 2020 तक साथ रहे. इस दौरान गठबंधन ने कई बार सरकार बनाई. 1997 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल ने 75 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को 18 सीटें मिली थीं. दोनों दलों ने शानदार प्रदर्शन किया था.

2007 के चुनाव में अकाली दल को 49 और बीजेपी को 19 सीटें मिलीं. इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल ने 56 और बीजेपी ने 12 सीटें जीतीं. इस जीत के साथ गठबंधन लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटा. हालांकि, 2020 में कृषि कानूनों को लेकर दोनों दलों के रिश्तों में दरार आ गई. इसके बाद गठबंधन टूट गया. दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़े, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली.

अब एक बार फिर साथ आने की चर्चा ने पंजाब की राजनीति में नए समीकरणों की संभावना पैदा कर दी है. फिलहाल, बीजेपी और अकाली दल के बीच बातचीत अंतिम दौर में होने की बात कही जा रही है. लेकिन गठबंधन की असली तस्वीर सीटों के बंटवारे, मुख्यमंत्री पद के संभावित फॉर्मूले और शहरी-अर्ध-शहरी सीटों पर सहमति बनने के बाद ही साफ होगी.

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