चंद्रशेखर आजाद  (Chandrashekhar Azad)  एक वकील, दलित-बहुजन अधिकार कार्यकर्ता और राजनेता हैं. वह खुद को अंबेडकरवादी विचारधारा का समर्थक मानते हैं और भीम आर्मी के सह-संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. इसके अलावा, वह आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं. फरवरी 2021 में टाइम मैगजीन ने उन्हें दुनिया के 100 उभरते नेताओं (TIME100 Next) की सूची में शामिल किया था.

चंद्रशेखर आजाद का जन्म 3 दिसंबर 1986 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के छुतमलपुर कस्बे में हुआ था. उनके पिता गोवर्धन दास सरकारी स्कूल के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य रहे हैं, जबकि उनकी माता का नाम कमलेश देवी है. शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई की और वकालत के पेशे से जुड़े.

साल 2014 में चंद्रशेखर आजाद ने सतीश कुमार और विनय रतन सिंह के साथ मिलकर भीम आर्मी की स्थापना की. यह संगठन शिक्षा, सामाजिक न्याय और दलित-बहुजन समुदाय के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर काम करता है. संगठन की पहचान उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में तेजी से बढ़ी.

चंद्रशेखर आजाद ने वर्ष 2020 में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की स्थापना की, ताकि सामाजिक आंदोलन के साथ-साथ चुनावी राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई जा सके. उनकी पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 समेत कई चुनावों में हिस्सा लिया. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में समाजवादी पार्टी-बहुजन समाज पार्टी गठबंधन के समर्थन में अपना फैसला वापस ले लिया.

चंद्रशेखर आजाद कई सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं. हाथरस मामले में पीड़िता के परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया. कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में भी उन्होंने अपने समर्थकों के साथ भाग लिया. इसके अलावा, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध प्रदर्शनों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही. विभिन्न आंदोलनों के दौरान उन्हें कई बार पुलिस हिरासत और गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा. सहारनपुर हिंसा के मामले में उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत भी कार्रवाई की गई थी.

चंद्रशेखर आजाद आज दलित-बहुजन राजनीति के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं. सामाजिक न्याय, शिक्षा, संवैधानिक अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर उनकी सक्रिय भूमिका के कारण वे लगातार चर्चा में रहते हैं.

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