सुदीप बंदोपाध्याय (जन्म 1949, मुर्शिदाबाद) भारतीय राजनीति और विशेषकर पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों का एक बेहद चर्चित और संभ्रांत चेहरा हैं. कड़क सफेद खादी, कश्मीरी शॉल और विदेशी चश्मे जैसे अपने खास 'फैशन स्टेटमेंट' के लिए मशहूर सुदीप दा ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कांग्रेस से की थी और 1987 में पहली बार विधायक बने. साल 1998 में वे ममता बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संस्थापक नेताओं में शामिल हुए और दिल्ली में पार्टी का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे। वे कोलकाता उत्तर सीट से लगातार जीत दर्ज कर 6 बार लोकसभा सांसद रहे. जनवरी 2017 में रोज वैली घोटाले में जेल जाने के बावजूद वे ममता बनर्जी के लिए चट्टान की तरह डटे रहे.
हालांकि, टीएमसी में अभिषेक बनर्जी का कद बढ़ने और अगस्त 2025 में संसदीय दल के नेता पद से हटाए जाने के बाद समीकरण बदल गए. खुद को उपेक्षित पाकर 77 वर्षीय सुदीप बंदोपाध्याय ने साल 2026 में पाला बदल लिया और अमित शाह के नेतृत्व में 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) का दामन थाम लिया. दिलचस्प बात यह है कि जहां सुदीप दा बागियों के नेता बनकर उभरे हैं, वहीं उनकी पत्नी और चौरंगी सीट से हैट्रिक विधायक नयना बंदोपाध्याय (पूर्व अभिनेत्री) ने पति का साथ न देकर ममता बनर्जी के प्रति अपनी वफादारी चुनी है. चुनावी हलफनामे (2024) के अनुसार, लगभग 8.5 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक सुदीप बंदोपाध्याय पर वर्तमान में 'गद्दारी' और बीमारी का बहाना बनाकर भाजपा नेताओं से मिलने के गंभीर आरोप लग रहे हैं.
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