नालंदा घूमने के साथ उठाए सिलाव के खाजे का लुत्फ, दुनियाभर में है फेमस

News Tak Desk

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बिहार की धरती पर, ज्ञान और अध्यात्म का संगम, नालंदा नाम का एक शहर है. प्राचीन काल से ही यह विश्वविद्यालय अपनी शिक्षा और ज्ञान के लिए प्रसिद्ध रहा है. नालंदा विश्वविद्यालय में बौद्ध धर्म, दर्शन, तर्कशास्त्र, चिकित्सा, ज्योतिष, गणित, भाषा और साहित्य जैसे विषयों की शिक्षा दी जाती थी. यहाँ नालंदा विश्वविद्यालय के कई प्रसिद्ध विद्वान और शिक्षक हुए हैं, जिनमें नागार्जुन, धर्मपाल, असंग, शिलाभद्र, जिनगुप्त और इत्सिंह शामिल हैं. आज नालंदा एक पुरातत्व स्थल है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा इसकी खुदाई की जा रही है. नालंदा को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है. क्या आपको पता है नालंदा अपने विश्वविद्यालय और खंडहरों के लिए तो फेमस है ही साथ ही यहां एक ऐसी जगह है जहां की एक खास मिठाई दुनियाभर में फेमस है.

नालंदा घूमने के दौरान आप इन जगहों को देख सकते हैं

नालंदा विश्वविद्यालय

यह विश्वविद्यालय 5वीं शताब्दी से 12वीं शताब्दी तक फलता-फूलता रहा. यहां आप प्राचीन इमारतों के अवशेष, मठों, पुस्तकालयों और अध्ययन कक्षों को देख सकते हैं. आज, नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल हैं, और हजारों पर्यटक हर साल यहां ज्ञान के इस प्राचीन केंद्र की झलक पाने के लिए आते हैं.

जरासंध का अखाड़ा

जरासंध का अखाड़ा, जो बिहार के राजगीर में स्थित है, महाभारत काल के प्रसिद्ध योद्धा जरासंध से जुड़ा एक ऐतिहासिक स्थल है. यह अखाड़ा अपनी विशालता और भव्यता के लिए जाना जाता है, और माना जाता है कि यहीं पर जरासंध अपने पहलवानों के साथ कुश्ती लगाया करते थे. आज, जरासंध का अखाड़ा खंडहर में तब्दील हो चुका है, लेकिन इसकी भव्यता अभी भी देखी जा सकती है. यह अखाड़ा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है. यह स्थल पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है, जो यहां महाभारत काल के इस प्रसिद्ध अखाड़े को देखने आते हैं.

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सिलाव का खाजा दुनियाभर में है फेमस

सिलाव बिहार स्थित राजगीर और नालंदा के बीच स्थित एक छोटा सा कस्बा है. इस स्थान पर बनने वाली मिठाई बेहद प्रसिद्ध है. यह मिठाई 52 परतों में बनाया जाता है. इस मिठाई के बारे में कहा जाता है कि इसके ऊपर एक सिक्का गिरते ही चकनाचूर हो जाती है. इस मिठाई को बनाने के लिए आटे, मैदा, चीनी तथा इलायची का प्रयोग किया जाता है. यह मिठाई देखने में बिल्कुल पैटीज़ जैसी होती. खाजा की डिमांड बिहार में मांगलिक कार्यों में भी होता है. इन बढ़ती डिमांडो के चलते ही इस खाजा की बिक्री ऑनलाइन भी होने लगी है. सिलाव का खाजा देश ही नहीं विदेशों में भी प्रसिद्द है. आपको बता दें, सिलाव के खाजे को जीआई टैग भी मिल चुका है. तो अगली बार जब आप नालंदा घूमने आएं तो सिलाव के खाजे का लुत्फ उठाना न भूलें.

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