काशी में है देवी का अनोखा मंदिर, नवरात्रि में दर्शन-पूजन का है विशेष महत्व

News Tak Desk

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भगवान शिव के त्रिशूल पर बसे काशी में मां आद्य शक्ति अदृश्य रूप में दुर्गाकुंड मंदिर में विराजमान हैं. ऐसा माना जाता है कि काशी से ही हिंदू धर्म की स्थापना हुई थी और यही संस्कृति का केंद्र है. नवरात्रि माह में इस मंदिर में दर्शनार्थियों की भीड़ बढ़ जाती है. मान्यता है कि इस मंदिर में मां के सामने खड़े होकर दर्शन करने मात्र से ही कई जन्मों के पाप जलकर भस्म हो जाते हैं. मंदिर में एक अलग तरह की सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह महसूस होता है. आइए जानते हैं काशी के मां दुर्गा के दिव्य मंदिर के बारे में.

ऐसे हुआ था मंदिर का निर्माण

बताया जाता है कि मंदिर का निर्माण साल 1760 में बंगाल की रानी भवानी ने कराया था. उस समय मंदिर निर्माण में 50 हजार रुपए की लागत आई थी. इस मंदिर में माता दुर्गा यंत्र के रूप में विराजमान हैं. मान्यता है कि असुर शुंभ और निशुंभ का वध करने के बाद मां दुर्गा ने यहां विश्राम किया था. कहा जाता है कि माता यहां पर आदि शक्ति स्वरूप में विराजमान करती हैं और यह मंदिर आदिकाल से है.

पाताल लोक से जुड़ा है दुर्गा कुंड मंदिर का रहस्य

लाल पत्थरों से बने अति भव्य इस मंदिर के एक तरफ एक पवित्र कुंड स्थित है, जिसे दुर्गा कुंड कहते है. लोगों का कहना है इस दुर्गा कुण्ड में पानी पाताल से आता है इसलिए इस कुण्ड का पानी कभी नहीं सूखता है. पाताल से आने वाले पानी के अलावा इस मन्दिर के बारे में ऐसे सैकड़ो अबूझ रहस्य है जिसके बारे में आज के वैज्ञानिक भी मौन हैं.

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मंदिर में दर्शन की क्या है टाइमिंग?

बता दें कि दुर्गा मंदिर सप्ताह के सभी दिन प्रातः 05:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक, सायं 04:00 बजे से रात्रि 09:00 बजे तक खुला रहता है. इसके अलावा यहां कोई प्रवेश शुल्क नहीं लगता है.

कैसे जाएं मां दुर्गा के मंदिर?

मां दुर्गा के मंदिर जाने के लिए वाराणसी के कैंट स्टेशन से ऑटो आसानी से मिल जाएगा. आप चाहें तो अपने निजी वाहन से भी वहां पहुंच सकते हैं.

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