अमेरिकी पॉलिटिक्स के टॉप गैलरी तक पहुंचने वाली गाजियाबाद की सबा हैदर कौन हैं ?

डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार सबा हैदर ने इलिनॉय हाउस डिस्ट्रिक्ट-84 के चुनाव में करीब 71.8 फीसदी वोट हासिल कर अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी और रिटायर्ड नौसेना कमांडर ब्रायन स्कोपा को हरा दिया.

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सबा हैदर की तस्वीर सोशल मीडिया से.
सबा हैदर की तस्वीर सोशल मीडिया से.
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अमेरिका के इलिनॉय राज्य की राजनीति में अपनी धमक जमाने वाली सबा हैदर की चर्चा खूब है. उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की गलियों से सफर शुरू करने वाली सबा आज अमेरिकी राजनीति के शीर्ष गलियारों तक पहुंच चुकी हैं. गाजियाबाद में जन्मी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की गोल्ड मेडलिस्ट रहीं सबा हैदर ने अमेरिका के इलिनॉय राज्य विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. इस शानदार उपलब्धि के साथ वह इलिनॉय राज्य विधानसभा (House District-84) के लिए चुनी जाने वाली पहली दक्षिण एशियाई प्रवासी महिला बन गई हैं. 

पूर्व नौसेना कमांडर को भारी मतों से हराया  

डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरीं सबा हैदर ने अपने प्रतिद्वंद्वी और सेवानिवृत्त अमेरिकी नौसेना कमांडर ब्रायन स्कोपा को भारी मतों से शिकस्त दी. चुनाव में सबा को कुल 71.8% वोट मिले, जबकि इससे पहले मार्च में आयोजित प्राइमरी चुनाव में भी उन्होंने 63% से अधिक वोट हासिल कर अपनी मजबूत दावेदारी पेश की थी. 

इलिनॉय का 84वां हाउस डिस्ट्रिक्ट (नेपरविल, ऑरोरा, ओस्वेगो, मॉन्टगोमरी, बोल्डर हिल और प्लेनफील्ड) अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है. इस बड़े और विविध क्षेत्र में सबा की एकतरफा जीत यह साबित करती है कि उनका जनाधार केवल भारतीय या प्रवासी समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि हर वर्ग के लोगों ने उनकी नीतियों पर भरोसा जताया है. 

गाजियाबाद से अमेरिका तक का सफर 

सबा हैदर का जन्म गाजियाबाद में एक शिक्षित और संभ्रांत परिवार में हुआ. उनके पिता सैयद अली हैदर उत्तर प्रदेश जल निगम में वरिष्ठ अभियंता थे और उनकी मां शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी एक निजी स्कूल का संचालन करती थीं. 

सबा की शुरुआती पढ़ाई गाजियाबाद के प्रतिष्ठित होली चाइल्ड स्कूल से हुई. इसके बाद उन्होंने आरजी गर्ल्स कॉलेज से विज्ञान में स्नातक (B.Sc) किया, जहां वे गोल्ड मेडलिस्ट रहीं. उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) का रुख किया और वाइल्डलाइफ साइंसेज में एमएससी (M.Sc) की डिग्री हासिल करते हुए फिर गोल्ड मेडल अपने नाम किया.  करीब दो दशक (20 साल) पहले वह अपने पति के साथ अमेरिका शिफ्ट हो गईं, जो एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और वर्तमान में विश्व बैंक में कार्यरत हैं. 

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समाज सेवा से शुरू हुई राजनीतिक यात्रा 

अमेरिका पहुंचने के बाद सबा ने विज्ञान की पृष्ठभूमि के बावजूद खुद को सामाजिक सरोकारों से जोड़े रखा. उन्होंने स्थानीय समुदाय के मुद्दों पर सक्रियता दिखाई और नागरिक सेवाओं में हाथ बंटाना शुरू किया. 

उनकी राजनीतिक यात्रा में बड़ा मोड़ तब आया, जब वह ड्यूपेज काउंटी बोर्ड (DuPage County Board) के लिए चुनी गईं.  इस पद पर रहते हुए उन्होंने जमीनी समस्याओं को हल किया और आम जनता से सीधा संवाद कायम किया, जिसने उनकी जीत की मजबूत नींव रखी. 

पैतृक आवास पर जश्न का माहौल 

सबा हैदर की इस ऐतिहासिक जीत की खबर मिलते ही गाजियाबाद के चित्रगुप्त विहार स्थित उनके पैतृक आवास पर खुशी की लहर दौड़ गई. परिजनों और शुभचिंतकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इस कामयाबी का जश्न मनाया. 

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