IAS Abhay Singh: कौन हैं IAS अभय सिंह? जिन्हें हटाने के लिए BJP के बागी नेता ने चुनाव आयोग को लिखी चिट्ठी, जानें 2019 के किस मामले का दिया हवाला

IAS Abhay Singh: उत्तर प्रदेश में IAS अभय सिंह को मतगणना से ठीक पहले चुनाव पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी से हटा दिया गया है. उनकी जगह IAS प्रकाश बिंदु को यह प्रभार सौंपा गया है. बीजेपी के बागी MLC देवेंद्र प्रताप सिंह की शिकायत के बाद यह मामला चर्चा में है. जानिए कौन हैं अभय सिंह और क्या है पूरा विवाद.

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गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर मतगणना से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
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IAS Abhay Singh: उत्तर प्रदेश में IAS अधिकारी अभय सिंह को चुनाव पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी से हटा दिया गया है. गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतगणना से ठीक पहले चुनाव आयोग ने उनकी जगह IAS प्रकाश बिंदु को यह जिम्मेदारी सौंपी है. बताया जा रहा है कि बीजेपी के बागी एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने अभय सिंह की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से शिकायत की थी. इस शिकायत में 2019 के अवैध खनन मामले और सीबीआई की छापेमारी का भी जिक्र किया गया था. ऐसे में आइए जानते हैं कौन हैं अभय सिंह और क्या है पूरा मामला.

जानिए अभय सिंह का प्रशासनिक सफर

अभय सिंह उत्तर प्रदेश कैडर के 2007 बैच के एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हैं. अपने अब तक के लंबे कार्यकाल में वह राज्य के कई महत्वपूर्ण जिलों में शीर्ष पदों पर तैनात रह चुके हैं. उन्होंने अपनी सेवा के दौरान बुलंदशहर और फतेहपुर जैसे बड़े जिलों में जिलाधिकारी (डीएम) के तौर पर अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दी हैं. वर्तमान समय में वह उत्तर प्रदेश शासन के अंतर्गत राजस्व परिषद के सदस्य के रूप में कार्यरत हैं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभाल रहे हैं.

अवैध खनन मामला और केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई

IAS अभय सिंह का नाम साल 2019 में देश भर में बड़े पैमाने पर चर्चा का विषय बना था. वह वह दौर था जब सीबीआई ने राज्य में अवैध खनन के कथित मामलों को लेकर व्यापक स्तर पर जांच और छापेमारी शुरू की थी. यह पूरा बहुचर्चित मामला साल 2012 से 2016 के बीच समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान हुए खनन पट्टों के आवंटन में कथित गड़बड़ी से जुड़ा माना गया था. इस बड़ी जांच के सिलसिले में लखनऊ, फतेहपुर, इलाहाबाद, आजमगढ़, देवरिया, गोरखपुर और नोएडा जैसे कई प्रमुख शहरों में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई थी.

आवास पर हुई थी छापेमारी और नकदी बरामदगी का गंभीर प्रकरण

जब सीबीआई की टीमों ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न ठिकानों पर दबिश दी थी, तब IAS अभय सिंह बुलंदशहर के जिलाधिकारी पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे. जांच एजेंसी ने उनके आधिकारिक आवास पर भी औचक छापा मारा था. उस दौरान उनके आवास से 47 लाख रुपये की भारी नकदी मिलने की बात मीडिया और जांच रिपोर्टों के सामने आई थी. उन पर यह भी गंभीर आरोप था कि फतेहपुर में जिला मजिस्ट्रेट रहते हुए उन्होंने खनन पट्टों के वितरण में कथित तौर पर अनियंत्रित अनियमितताएं की थीं. इस पूरी बड़ी कार्रवाई में बी. चंद्रकला और विवेक जैसे अन्य चर्चित IAS अधिकारियों के नाम भी प्रमुखता से सामने आए थे.

बीजेपी के बागी एमएलसी की शिकायत और चुनाव आयोग का कड़ा रुख

गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक निर्वाचन सीट पर जब IAS अभय सिंह को चुनाव पर्यवेक्षक बनाए जाने की घोषणा हुई, तो स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर उठने लगे. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के बागी एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त को एक लिखित पत्र भेजकर इस तैनाती पर कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने अपने शिकायत पत्र में साल 2019 के उसी बहुचर्चित सीबीआई छापे और अवैध खनन मामले का हवाला दिया. उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने का तर्क देते हुए अभय सिंह को पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी से तत्काल हटाने का औपचारिक अनुरोध किया था.

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