देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल में रोती युवती के आरोपों का सच क्या? रियलिटी चेक में सामने आई ये हकीकत
Dehradun accident girl video: देहरादून के सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंची घायल युवती का रोते-बिलखते वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. आरोप है कि इमरजेंसी के बावजूद उसे इधर-उधर भेजा गया और व्हीलचेयर तक ठीक नहीं मिली. वीडियो सामने आते ही मामले में प्रशासन का बयान सामने आया है.

Dehradun Coronation Hospital viral video: राजधानी देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल में इलाज के लिए पहुंची एक युवती के वायरल वीडियो ने अस्पताल प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है. वीडियो में युवती ने आरोप लगाया कि पैर में गंभीर दर्द के बावजूद उसे इलाज के लिए इधर उधर भेजा गया और व्हीलचेयर पर बैठने के बाद भी मदद के लिए कोई वार्ड बॉय मौजूद नहीं था. युवती रोते बिलखते हुए वीडियो में अपना दर्द बयां कर रही है. मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है.
वायरल वीडियो में युवती ने क्या कहा?
वायरल वीडियो में लड़की रोते हुए कह रही है मैं कोरोनेशन में इलाज के लिए आई हूं, अभी थोड़ी देर पहले मेरा एक्सीडेंट हुआ. एक कार मेरे पैर में एक कार वाले टायर चढ़ा दी. मैं यहां कोरोनेशन अस्पताल में आई हूं. यहां कुछ सुविधा उपलब्ध नहीं है. युवती ने आरोप लगाया कि उसे पुरानी व्हीलचेयर दी गई, जो ठीक से नहीं चल रही है. लड़की कहती है कि एक्सीडेंट के बाद से उसके पैर कांप रहे हैं. वे कहती है कि मुझे अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड ने पर्ची काटने के लिए कहा है. युवती कहती है कि इतनी ज्यादा इमरजेंसी में भी ये पहले ओपीडी में भिजवाते हैं. वे आगे कहती है कि पीछे मेरा दोस्त पर्ची कटवा रहा है. मेरी हालत खराब है ये इधर से उधर भेजने में लगे हैं. युवती ने आरोप लगया कि इन्होंने हॉस्पिटल की हालत बहुत गंदी करी हुई है.
अस्पताल प्रशासन की सफाई
युवती का वीडियो वायरल होते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया. मामले में कोरोनेशन के सीएमएस डॉ. मनु जैन ने अपनी सफाई पेश की है. उन्होंने बताया कि जिस समय युवती अस्पताल आई थी, उस वक्त इमरजेंसी में पांच से छह कैदियों का मेडिकल परीक्षण चल रहा था, जिसके कारण डॉक्टरों पर काफी दबाव था. प्रशासन का कहना है कि युवती की स्थिति जानलेवा नहीं थी, इसलिए उसे प्रक्रिया के तहत आर्थोपेडिक सर्जन और एक्सरे के लिए भेजा गया था. हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच कमेटी बना दी गई है, जिसमें उच्च स्तर के अधिकारी और महिला डॉक्टर शामिल हैं.
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व्हीलचेयर और सुविधाओं का रियलिटी चेक
अस्पताल प्रशासन भले ही सब कुछ ठीक होने का दावा कर रहा हो, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट कुछ और ही इशारा करती है. जब अस्पताल की व्हीलचेयर की जांच की गई तो पाया गया कि वे जंग खा चुकी हैं और उनके हैंडल तक ढीले हैं. सीएमएस ने तर्क दिया कि युवती व्हीलचेयर को उल्टा चला रही थी इसलिए उसे दिक्कत हुई. लेकिन अस्पताल की मशीनों और उपकरणों की जर्जर हालत ने सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
स्टाफ की कमी से जूझ रहा है अस्पताल
इस पूरी घटना के पीछे अस्पताल में कर्मचारियों की भारी कमी भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है. सूत्रों के मुताबिक, कोरोनेशन अस्पताल में सपोर्टिंग स्टाफ के 48 पद खाली पड़े हैं, जबकि लंबे समय से केवल 3 पदों को ही मंजूरी मिली है. वार्ड बॉय और नर्सिंग स्टाफ की कमी के कारण अक्सर मरीजों को खुद ही अपना इंतजाम करना पड़ता है. फिलहाल प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि जो मरीज अकेले आते हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर अटेंड किया जाए.










