उत्तराखंड: जैनी कांड के बहाने आमने-सामने आए CM धामी और हरक सिंह, जानें क्या है 23 साल पुराना मामला?

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले सियासत गरमा गई है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा 2003 के पुराने जैनी कांड का जिक्र करने के बाद कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने तीखा पलटवार किया है. कांग्रेस ने भी सरकार को घेरते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं, जानिए पूरा मामला.

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जैनी कांड के बहाने आमने-सामने आए CM धामी और हरक सिं
जैनी कांड के बहाने आमने-सामने आए CM धामी और हरक सिं
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Jaini Kand 2003: उत्तराखंड की सियासत में करीब 23 साल पुराना जैनी प्रकरण केंद्र में आ गया है. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत के बीच छिड़ी इस नई राजनीतिक जंग ने राज्य के सियासी तापमान को काफी बढ़ा दिया है. मुख्यमंत्री द्वारा अंकिता भंडारी हत्याकांड के जवाब में पुराने मामलों का जिक्र करने के बाद अब यह पूरा प्रकरण चर्चा का विषय बन गया है. आइए जानते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की असल वजह क्या है और किस तरह से नेताओं के बीच तीखे बयानों का दौर शुरू हुआ है.

अंकिता हत्याकांड के बाद क्यों छिड़ी बहस?

हाल ही में हल्द्वानी में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस द्वारा चलाई जा रही न्याय यात्रा और सरकार पर लग रहे आरोपों का कड़ा जवाब दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि अंकिता पूरे उत्तराखंड की बेटी और बहन थी, जिसके तीनों दोषियों को अदालत पहले ही आजीवन कारावास की सजा सुना चुकी है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोर्ट फैसला दे चुका है, तो कांग्रेस इस मामले को बार-बार राजनीतिक मुद्दा क्यों बना रही है और मृत पार्टी को जिंदा करने के लिए ऐसा कर रही है. इसी दौरान उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए उत्तराखंड के पुराने विवादों जैसे तंदूर कांड और जैनी कांड का जिक्र छेड़ दिया.

हरक सिंह रावत का फूटा गुस्सा, दी कड़ी चुनौती

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया. हरक सिंह ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं और उन्होंने उस लड़की को छुआ तक नहीं था. उन्होंने अपनी और अपने परिवार की कसम खाते हुए दावा किया कि घटना के सामने आते ही उन्होंने खुद सीबीआई जांच की मांग की थी और मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. हरक सिंह ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उन्होंने अपना मुंह खोला, तो तत्कालीन नेताओं के लिए जवाब देना मुश्किल हो जाएगा. साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री धामी के राजनीतिक अनुभव पर भी तीखा तंज कसा.

कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार को घेरा

इस मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी मैदान में उतर आए हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की तुलना जैनी प्रकरण से करके जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है. गोदियाल का कहना है कि जैनी कांड के समय खुद हरक सिंह रावत ने आगे आकर सीबीआई जांच की मांग की थी और इस्तीफा दिया था, लेकिन आज अंकिता के मामले में कथित वीआईपी के नामों पर पर्दा डाला जा रहा है और सबूत नष्ट करने के गंभीर आरोप सरकार पर लग रहे हैं.

क्या है 23 साल पुराना जैनी प्रकरण?

यह पूरा विवाद साल 2003 का है, जब उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी और हरक सिंह रावत राजस्व मंत्री के पद पर थे. उस दौरान असम मूल की एक महिला ने आरोप लगाया था कि नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए और उनके बच्चे के पिता वही हैं. इस मामले के तूल पकड़ने के बाद राजनीति गरमा गई थी और मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी. लेकिन अब 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक बार फिर से इस पुराने मुद्दे के उठने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है.

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