बांकीपुर उपचुनाव: BJP के युवा चेहरे अभिषेक बंटी के सामने कितने मजबूत हैं प्रशांत किशोर? समझें पूरा समीकरण

सुजीत झा

• 09:45 AM • 08 Jul 2026

Bankipur By Election 2026: बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी के युवा उम्मीदवार अभिषेक कुमार 'बंटी' का मुकाबला जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर और आरजेडी की रेखा गुप्ता से है. जानिए इस हाई-प्रोफाइल सीट का जातीय समीकरण, पिछले चुनाव के आंकड़े, बीजेपी के मजबूत गढ़ की कहानी, प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव कितना अहम है और किसके पक्ष में दिख रहे हैं चुनावी समीकरण.

Bankipur By Election 2026
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बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव देश और प्रदेश की राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा अपने उम्मीदवार की घोषणा करने के साथ ही अब बांकीपुर के चुनावी रण की तस्वीर पूरी तरह से साफ हो गई है. इस सीट पर मुख्य मुकाबला त्रिकोणीय होने जा रहा है, जिसमें बीजेपी, जन सुराज और आरजेडी के उम्मीदवार आमने-सामने हैं. इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले पर न सिर्फ बिहार, बल्कि देश भर की राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें टिकी हुई हैं.

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बीजेपी ने खेला दांव, जन सुराज से प्रशांत किशोर खुद मैदान में

भारतीय जनता पार्टी ने बांकीपुर उपचुनाव के लिए अपने युवा मोर्चा से जुड़े कार्यकर्ता अभिषेक कुमार 'बंटी' को उम्मीदवार बनाया है. अभिषेक कुमार बंटी पार्टी के एक आम कार्यकर्ता रहे हैं और उनका यह पहला चुनाव है, इसलिए वे बहुत बड़े और चर्चित चेहरे नहीं हैं. वहीं दूसरी तरफ, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने खुद चुनावी मैदान में उतरने का बड़ा फैसला किया है. प्रशांत किशोर एक ऐसा नाम हैं जिन्हें पूरे बिहार और देश में जाना जाता है. इसके अलावा, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने एक बार फिर रेखा गुप्ता पर भरोसा जताया है, जो 2025 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी की उम्मीदवार थीं. इन तीनों चेहरों के सामने आने के बाद अब बांकीपुर की सियासी बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है.

बीजेपी का अभेद्य किला रहा है बांकीपुर

बांकीपुर या पटना का शहरी क्षेत्र हमेशा से ही भारतीय जनता पार्टी का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. इतिहास गवाह है कि जब बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की सरकार हुआ करती थी, तब भी इस क्षेत्र में बीजेपी का ही दबदबा रहता था. बांकीपुर विधानसभा सीट का अस्तित्व भले ही साल 2009 के परिसीमन के बाद आया और यहां पहला चुनाव 2010 में हुआ, लेकिन इससे पहले यह क्षेत्र पटना पश्चिम के नाम से जाना जाता था और साल 1990 से ही यहां लगातार बीजेपी जीतती आ रही है. ऐसे में इतिहास और परंपरा के लिहाज से यह सीट पूरी तरह बीजेपी के पक्ष में दिखाई देती है.

नितिन नवीन की सीट होने से बढ़ी अहमियत

बांकीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव कई मायनों में बहुत खास है क्योंकि यह सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान राज्यसभा सदस्य नितिन नवीन की रही है. नितिन नवीन के विधायक पद से हटने के बाद खाली हुई इस सीट के कारण यह चुनाव पहले से ही वीआईपी माना जा रहा था. वहीं, प्रशांत किशोर के खुद चुनावी रण में कूदने की वजह से इस सीट का राजनीतिक ग्राफ और ज्यादा ऊपर चला गया है.

सम्राट चौधरी के नेतृत्व और चेहरे का पहला इम्तिहान

यह चुनाव इस मायने में भी ऐतिहासिक है क्योंकि बिहार की राजनीति में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री है. वर्तमान में एनडीए सरकार की कमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हाथों में है और यह उपचुनाव उन्हीं के चेहरे और नेतृत्व में लड़ा जा रहा है. इससे पहले साल 2025 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार गठबंधन का मुख्य चेहरा थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रचार के लिए आ रहे थे. चूंकि यह एक उपचुनाव है, इसलिए प्रधानमंत्री यहां प्रचार के लिए नहीं आएंगे और पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कंधों पर होगी. ऐसे में पिछले दो-ढाई महीनों के दौरान बीजेपी सरकार के कामकाज को लेकर जनता की अपेक्षाएं कितनी पूरी हुई हैं, यह चुनाव उसका भी एक बड़ा लिटमस टेस्ट साबित होने वाला है.

प्रशांत किशोर के लिए 'डू एंड डाई' का मुकाबला

जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर के लिए बांकीपुर का यह उपचुनाव 'करो या मरो' (Do or Die) जैसी स्थिति लेकर आया है. साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा था, जहां पार्टी ने 236 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे लेकिन 232 सीटों पर उनके प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी. पूरे प्रदेश में जन सुराज का वोट प्रतिशत 4 फीसदी से भी नीचे रहा था. ऐसे में, जिस चुनावी रणनीतिकार ने 2014 में नरेंद्र मोदी, 2015 में बिहार के महागठबंधन और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए बड़ी जीत की रणनीतियां बनाईं, उनके लिए अपनी पार्टी की इस हार के बाद खुद को साबित करना बेहद जरूरी है. यदि प्रशांत किशोर यहां से जीत दर्ज करते हैं तो उनका राजनीतिक कद तेजी से उभरेगा, अन्यथा यह उनके लिए एक और बड़ा झटका साबित हो सकता है.

वोटों का गणित और 2025 के चुनावी आंकड़े

साल 2025 के पिछले विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो बीजेपी के नितिन नवीन को करीब 62.7% वोट मिले थे, जबकि दूसरे स्थान पर रहीं आरजेडी की रेखा गुप्ता को 29.6% यानी करीब 47,000 वोट मिले थे. तब जीत का अंतर लगभग 51,000 वोटों का था, जिसे पाटना किसी भी विरोधी दल के लिए बेहद कठिन चुनौती है. हालांकि, प्रशांत किशोर की एंट्री से इस बार राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव आ सकता है. बीजेपी ने भले ही एक कम चर्चित लेकिन समर्पित कार्यकर्ता को उतारा है, जिससे नाराज कार्यकर्ताओं को मनाया जा सके, लेकिन प्रशांत किशोर की राष्ट्रव्यापी पहचान और जन सुराज का गांव-गांव तक बना संगठन बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश करेगा, हालांकि बूथ स्तर पर बीजेपी का संगठन अभी भी काफी मजबूत है.

जातीय और सामाजिक समीकरणों का खेल

बांकीपुर एक शहरी क्षेत्र है, जहां सामाजिक और जातीय संरचना काफी दिलचस्प है। इस विधानसभा क्षेत्र में लगभग 35% मतदाता सवर्ण (अपर कास्ट) हैं, जो परंपरागत रूप से बीजेपी के साथ रहे हैं. इसके बाद दूसरे नंबर पर ओबीसी (यादव, कुर्मी, कुशवाहा और बनिया आदि) की आबादी करीब 33% है. अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) 13%, अनुसूचित जाति (SC) 9% और अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या लगभग 10% के करीब है. बीजेपी के कोर वोट बैंक की बात करें तो इसमें 15% कायस्थ और ब्राह्मणों समेत सवर्ण मतदाता शामिल हैं. साथ ही ओबीसी के अंतर्गत आने वाले बनिया वर्ग का भी करीब 15% वोट बैंक बीजेपी का मजबूत आधार रहा है. इस बार आरजेडी की उम्मीदवार रेखा गुप्ता खुद बनिया समाज से आती हैं, जो बीजेपी के कोर वोट बैंक में सेंध लगा सकती हैं.

शहरी मतदाताओं का रुख और नाराजगी का मुद्दा

चूंकि बांकीपुर एक पूरी तरह से शहरी और शिक्षित मतदाताओं वाला क्षेत्र है, इसलिए यहां जातिवाद का असर ग्रामीण इलाकों के मुकाबले थोड़ा कम देखने को मिलता है. आजकल मध्यम वर्ग में महंगाई, पेट्रोल और एथेनॉल जैसे मुद्दों को लेकर सरकार के प्रति कुछ नाराजगी भी देखी जा रही है. शहरी क्षेत्र के शिक्षित और मध्यम वर्गीय लोग सरकार के कुछ कामकाज से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं, जिसका सीधा राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश प्रशांत किशोर करेंगे.

बीजेपी की साख दांव पर, आरजेडी में अंदरूनी कलह

भले ही महज एक सीट के हारने या जीतने से बिहार की एनडीए सरकार की स्थिरता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन बीजेपी के लिए अपने इस सबसे मजबूत किले को खोना एक बहुत बड़ा और तगड़ा राजनीतिक झटका होगा. यही वजह है कि बीजेपी इस चुनाव को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है. वहीं विपक्षी खेमे की बात करें तो आरजेडी द्वारा रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाए जाने से कांग्रेस के भीतर नाराजगी की खबरें हैं, क्योंकि माना जा रहा था कि आरजेडी को यहां उम्मीदवार नहीं उतारना चाहिए था. इस अंदरूनी खींचतान के बीच मुकाबला त्रिकोणीय हो चुका है. अब देखना यह होगा कि 30 जुलाई को होने वाले इस मतदान में बीजेपी का पारंपरिक वोटर किसके पाले में जाता है, क्योंकि वही बांकीपुर का नया सिकंदर तय करेगा.

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कौन हैं अभिषेक कुमार? जिन्हें BJP ने बांकीपुर की हाई-प्रोफाइल सीट पर बनाया अपना उम्मीदवार