बिहार में नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब राज्य में सम्राट युग की शुरुआत हो चुकी है. भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने आज बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है, जिसके बाद नई सरकार का नया फॉर्मूला सामने आया है. पिछली सरकार में जब जदयू के पास मुख्यमंत्री पद था, तब भाजपा के पास दो डिप्टी सीएम का पद था. लेकिन अब यह फॉर्मूला उलटा हो गया है, बीजेपी से सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने है तो जदयू कोटे से विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को डिप्टी सीएम बनाया गया है.
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बिहार की राजनीति में विजय-बिजेंद्र कोई नया नाम नहीं है बल्कि दोनों ही बेहद अनुभवी और अपने शांत स्वभाव के कारण जाने जाते है. हालांकि गलियारों में एक चर्चा जरूर उठी है कि आखिर नीतीश कुमार ने इन्हीं दोनों नेताओं को ही क्यों उप मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी? आइए विस्तार से जानते है पूरी कहानी और दोनों ही नेताओं का बैकग्राउंड.
बिजेंद्र प्रसाद यादव कौन हैं?
जदयू कोटे से नई सरकार में डिप्टी सीएम बने बिजेंद्र प्रसाद यादव बिहार की राजनीति में एक पुराना नाम है और नीतीश कुमार के बेहद करीबी नेताओं में से एक है. बिजेंद्र यादव ने 1990 से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी और कोसी इलाके का एक बड़ा चेहरा बनकर उभरे. सबसे पहली बार उन्होंने 1990 में जनता दल से सुपौल में चुनाव जीता था और आज तक लगातार वहां की सत्ता पर अपना दबदबा बनाए हुए है.
1990 का दौर बिहार की सियासत में एक बड़ा बदलाव का समय था. कांग्रेस के शासन के बाद जनता दल का सियासी उदय हुआ और इसी में बिजेंद्र ने अपनी पहचान बनाई. पहले चुनाव जीतकर वे विधानसभा पहुंचे और फिर अपने काम करने के तरीके से सबका भरोसा जीत लिया. यहीं कारण है कि 1991 से लेकर आज तक जितनी भी सरकारें बनी है वो सभी में मंत्री रहे.
लालू के राइट हैंड तो नीतीश के करीबी
बिहार में एक दौर था जब बिजेंद्र यादव को लालू यादव का राइटहैंड माना जाता था. लालू ने उनकी ईमानदार छवि और कार्यशैली को देखते हुए 1991 में उन्हें राज्य मंत्री बनाया, जिसके बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया. 1995 में चुनाव जीतने के बाद वे नगर विकास मंत्री बने. अलग-अलग विभागों में काम करने की वजह से उनका प्रशासनिक अभुनव और भी मजबूत हो गया.
1997 में जब जनता दल टूटा तो शरद और लालू यादव अलग-अलग हो गए. तब बिजेंद्र यादव ने शरद यादव का साथ दिया, जिसके कारण उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर होना पड़ा. लेकिन जब शरद यादव और नीतीश कुमार साथ आए तो बिजेंद्र ने जदयू जॉइन कर लिया और 2000 में जदयू के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बने. फिर 2005 के चुनाव में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बने और जदयू को सत्ता में लाने के लिए अहम रोल निभाया.
2005 में सरकार बनते ही उन्हें कैबिनेट में जगह मिली और 2010 में मंत्री भी बनें. इस दौरान बिजेंद्र यादव ने सिंचाई, ऊर्जा, मद्य निषेध समेत कई विभाग का पदभार संभाला. इसके बाद वे वित्त मंत्री भी बने और 2015 में सियासी उठा-पटक के कारण उनके हाथ से मंत्री पद चला गया. लेकिन जल्द ही वह सत्ता में वापस आ गए और 2017 में NDA सरकार में भी मंत्री बने रहे.
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इस वजह से मिली इतनी बड़ी जिम्मेदारी
बिहार में 2005 के बाद जब भी नीतीश कुमार की सरकार बनी है, बिजेंद्र यादव उन सभी सरकारों में मंत्री बने रहे है. अब 2026 में जब बिहार में नई सरकार बनी है तो वो राज्य के उप मुख्यमंत्री बने है. बिजेंद्र यादव के अनुभव और उनकी कार्यशैली को देखते हुए ही नीतीश कुमार ने उनको नई सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे दी है.
विजय चौधरी को बनाकर साधा जातिगत समीकरण!
भले ही नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन बिहार में जातिगत राजनीति को साधने के लिए वह फेमस रहे हैं. विजय कुमार चौधरी को उप-मुख्यमंत्री बनाना भी इसी रणनीति का एक हिस्सा बताया जा रहा है. समस्तीपुर में जन्मे विजय चौधरी नीतीश कुमार के करीबी और उनके रणनीतिकार माने जाते है. विजय चौधरी एक पढ़े लिखे नेता है और राजनीति में आने से पहले वो SBI में नौकरी करते थे.
पारिवारिक राजनीतिक विरासत के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ दी और राजनीति में आ गए. उन्होंने 80 के दशक में कांग्रेस का दामन थाम, सियासी पारी की शुरुआत की. धीरे-धीरे सब बदला और फिर उन्होंने जदयू का हाथ पकड़ लिया. विजय चौधरी 2005 से लगातार अब तक विधायक बनते आ रहे है और राज्य में एक बड़ा भूमिहार चेहरा भी है. विजय चौधरी को तो नीतीश कुमार का राइट हैंड भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने हर कठिन परिस्थिति में नीतीश कुमार का साथ दिया है.
विजय चौधरी बिहार सरकार के कई महत्वपूर्ण विभाग में मंत्री भी रहे है और 2015-20 तक वे बिहार विधानसभा के अध्यक्ष रहे, लेकिन उसके बाद मंत्रिमंडल में वापस लौट गए. अब नीतीश कुमार के जाने के बाद वह सरकार में एक बड़ी पद पर बैठे है और दिल्ली-पटना के बीच अहम भूमिका निभाते हुए नजर आ सकते है.
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