बिहार से जाते-जाते नीतीश कुमार ने किया खेला? उनके इस दांव से बीजेपी को लंबे समय तक उठाना पड़ सकता है नुकसान

बिहार की राजनीति में अचानक बदले समीकरण ने नई बहस छेड़ दी है. मुख्यमंत्री की कुर्सी बदलते ही बीजेपी के अंदरूनी समीकरण भी हिलते नजर आ रहे हैं. सम्राट चौधरी की ताजपोशी और विजय सिन्हा की खामोशी ने सवर्ण वोट बैंक और पार्टी की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

नीतीश कुमार ने जाते-जाते खेला बड़ा दांव
नीतीश कुमार ने जाते-जाते खेला बड़ा दांव

इन्द्र मोहन

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Nitish Kumar Masterstroke: बिहार में सत्ता का समीकरण बदलते ही राजनीति की एक नई तस्वीर सामने आई है. शह और मात के खेल में नीतीश कुमार ने एक बार फिर सबको हैरान कर दिया है. प्रदेश में नई सरकार के गठन के साथ ही सम्राट चौधरी की ताजपोशी तो हो गई. इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब बीजेपी के कद्दावर नेता विजय सिन्हा  के बयानों में छिपा दर्द छलक कर सामने आ गया है. इससे अब  कई नए सवाल खड़े हो गए हैं. 

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दरअसल, साल 2005 से जो सवर्ण वोट बैंक भारतीय जनता पार्टी का सबसे मजबूत आधार माना जाता था अब उस पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. नीतीश कुमार ने जाते-जाते एक ऐसा दांव चल दिया है जिसका नुकसान बीजेपी को लंबे समय तक उठाना पड़ सकता है. इस पूरी उठापटक के केंद्र में बीजेपी नेता विजय सिन्हा और सवर्णों की नाराजगी देखी जा रही है.

विजय सिन्हा का छलका दर्द कही ये बात

बिहार में नई सरकार का गठन हुआ और सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली. जब सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे तब विजय सिन्हा के चेहरे पर इसका दर्द साफ नजर आ रहा था. इसके बाद उन्होंने मीडिया से बात करते हुए खुद को पार्टी का सिपाही बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने कमांडर के आदेश पर गठबंधन की राजनीति के लिए सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा. लेकिन सियासी जानकार इसे विजय सिन्हा का साइडलाइन होना मान रहे हैं. जो नेता कल तक डिप्टी सीएम की हैसियत से कड़े फैसले ले रहा था, आज वह खुद को बलिदान देने वाला सिपाही बता रहा है.

नीतीश कुमार ने जाते-जाते खेला ये बड़ा दांव

राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले नीतीश कुमार ने सरकार बनाने के फॉर्मूले में एक अलग दांव चल दिया. माना जा रहा है कि नीतीश कुमार ने अपने इस कदम से बीजेपी और आरजेडी के वोट बैंक पर निशाना साधा है. उन्होंने जेडीयू कोटे से विजय चौधरी को आगे कर भूमिहार जाति को साधने की कोशिश की है. विजय चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाकर नीतीश ने बीजेपी के उस कोर वोट बैंक में सेंधमारी की है जो पिछले 20 सालों से बीजेपी के साथ खड़ा था. इसके साथ ही उन्होंने विजेंद्र यादव को आगे बढ़ाकर आरजेडी के यादव वोट बैंक को भी अपने पाले में लाने का रास्ता साफ कर दिया है. नीतीश की यह रणनीति बीजेपी के लिए आने वाले चुनाव में बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है.

बीजेपी के लिए डैमेज कंट्रोल की बड़ी चुनौती

सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक अब सिर्फ एक ही चर्चा है कि आखिर बीजेपी विजय सिन्हा को कैसे मैनेज करेगी. सवर्ण वोट बैंक खासकर भूमिहार और ब्राह्मणों में पहले से ही कुछ कानूनों को लेकर नाराजगी चल रही थी और अब विजय सिन्हा को उपमुख्यमंत्री न बनाए जाने से यह नाराजगी और बढ़ सकती है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर बीजेपी ने जल्द ही कैबिनेट विस्तार में इस डैमेज को कंट्रोल नहीं किया तो इसका सीधा असर भविष्य के चुनाव परिणामों पर पड़ेगा.

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