बिहार की राजनीति में एक बड़े युग का अंत होने जा रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के अगले कदमों को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर अब विराम लगता दिख रहा है. जानकारी के अनुसार, नीतीश कुमार इसी महीने यानी मार्च 2026 में विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे. इसके साथ ही उनके राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री पद छोड़ने का पूरा शेड्यूल भी सामने आ गया है.
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30 मार्च से पहले MLC पद से इस्तीफा
नियमों के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता. नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं, जबकि वह अभी बिहार विधान परिषद के सदस्य भी हैं. निर्वाचन के 14 दिनों के भीतर उन्हें एक सीट छोड़नी होती है. माना जा रहा है कि नीतीश कुमार 30 मार्च 2026 से पहले विधान परिषद की सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप देंगे.
अप्रैल में संभालेंगे नई जिम्मेदारी, छोड़ेंगे 'सिंहासन'
नीतीश कुमार के दिल्ली जाने और बिहार की सत्ता सौंपने का पूरा घटनाक्रम कुछ इस प्रकार रह सकता है:
- 26 मार्च: नीतीश कुमार की 'समृद्धि यात्रा' का पटना में समापन होगा. इसके बाद इस्तीफे की प्रक्रिया तेज होगी.
- 12 अप्रैल: नीतीश कुमार दिल्ली में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे. मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है.
- 13-14 अप्रैल: राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद नीतीश कुमार वापस पटना लौटेंगे और राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपकर मुख्यमंत्री पद छोड़ देंगे. इसके बाद बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलेगा.
20 साल का रिकॉर्ड और बेटे की 'ट्रेनिंग'
नीतीश कुमार का विधान परिषद से नाता करीब 20 साल पुराना है. वह 20 मार्च 2006 को पहली बार परिषद के सदस्य बने थे और अब मार्च 2026 में ही इस पद को छोड़ रहे हैं. दो दशकों तक परिषद का सदस्य रहते हुए मुख्यमंत्री के रूप में बिहार की बागडोर संभालना अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है.
इस बीच, उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक सक्रियता भी चर्चा का विषय बनी हुई है. नीतीश कुमार की कई रैलियों और कार्यक्रमों में निशांत की मौजूदगी को उनके 'राजनीतिक डेब्यू' और भविष्य की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है.
बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन?
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार की कमान किसके हाथों में होगी, इसे लेकर कयासों का बाजार गर्म है. हालांकि कई नाम रेस में हैं, लेकिन अंतिम फैसला नीतीश कुमार और गठबंधन के सहयोगियों की सहमति से ही होगा. 14 अप्रैल के बाद बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होना तय माना जा रहा है.
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