क्या नीतीश कुमार ही सुलझा पाएंगे अनंत सिंह और नीरज कुमार का विवाद? जानिए जेडीयू की अंदरूनी कलह का पूरा सच

इन्द्र मोहन

• 04:39 PM • 09 Sep 2026

Bihar Politics: नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और केंद्रीय राजनीति में व्यस्त होने के बीच जेडीयू में अंदरूनी खींचतान की चर्चा तेज है. मोकामा विधायक अनंत सिंह और जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार के बीच पुराना विवाद अब आगामी एमएलसी चुनाव के दौरान खुलकर सामने आ गया है. ऐसे में सवाल है कि क्या नीतीश कुमार के हस्तक्षेप से दोनों नेताओं के बीच विवाद सुलझ पाएगा और जेडीयू को राजनीतिक नुकसान से बचाया जा सकेगा?

JDU Internal Conflict
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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और केंद्रीय राजनीति में व्यस्त होने के बाद से जेडीयू के भीतर आंतरिक खींचतान की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद भले ही अभी नीतीश कुमार के पास ही है, लेकिन रोजमर्रा के सियासी मामलों से उनके दूर रहने के कारण बिहार जेडीयू के नेताओं के बीच तालमेल की कमी दिख रही है. ताजा मामला जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार और मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह के बीच जारी गतिरोध का है, जो अब खुलकर सार्वजनिक मंचों पर आ चुका है.

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अनंत सिंह को मनाने की बैठक रही बेनतीजा

हाल ही में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और विधानमंडल दल के नेता श्रवण कुमार की मौजूदगी में एक अहम बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी एमएलसी चुनाव को लेकर रणनीति बनाना और अनंत सिंह व नीरज कुमार के बीच जारी खींचतान को खत्म करना था. बैठक में दोनों नेता आमने-सामने बैठे भी, लेकिन बैठक खत्म होने के बाद जब अनंत सिंह बाहर निकले तो उन्होंने मीडिया से कोई बात नहीं की और चुप्पी साधे रखी. वहीं दूसरी ओर, नीरज कुमार और पार्टी नेता श्रवण कुमार लगातार यह दावा करते रहे कि संगठन पूरी तरह एकजुट है और पार्टी के भीतर कोई मतभेद नहीं है.

जानिए क्या है दोनों नेताओं के बीच विवाद का इतिहास

अनंत सिंह की इस चुप्पी के पीछे एक पुरानी चुनावी प्रतिद्वंदिता और रंजिश बताई जा रही है. दरअसल, नीरज कुमार और अनंत सिंह दोनों ही मोकामा क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं. पूर्व में मंत्री रहे और लगातार तीन बार विधान परिषद सदस्य चुने गए नीरज कुमार पार्टी के बेहद मुखर नेता माने जाते हैं. बीते विधानसभा चुनाव के दौरान जब पार्टी ने अनंत सिंह को उम्मीदवार बनाया था, तब नीरज कुमार ने क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले प्रत्याशियों के समर्थन से इनकार करते हुए खुद को उनके चुनाव प्रचार से अलग कर लिया था. अनंत सिंह अब उसी बात का हिसाब बराबर कर रहे हैं और नीरज कुमार के खिलाफ निर्दलीय या विरोधी प्रत्याशी डॉ. अनुज कुमार को खुलकर समर्थन देने का ऐलान कर चुके हैं.

क्या केवल नीतीश कुमार ही खत्म कर पाएंगे गतिरोध?

सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि जब तक खुद नीतीश कुमार इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे, तब तक यह विवाद शांत होना मुश्किल है. अनंत सिंह कई बार यह साफ कर चुके हैं कि वह केवल नीतीश कुमार के नेतृत्व को स्वीकार करते हैं और अगर नीतीश कुमार कहेंगे तभी वह मानेंगे. इसके अलावा अनंत सिंह द्वारा आगामी विधानसभा चुनाव न लड़ने की घोषणा के बाद उनके तेवर और ज्यादा आक्रामक नजर आ रहे हैं.

JDU के लिए क्यों बढ़ सकती है मुश्किल?

जेडीयू के लिए यह अंदरूनी कलह भारी पड़ सकती है क्योंकि प्रशांत किशोर की पार्टी 'जन सुराज' भी एमएलसी चुनाव में आठ सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है. अगर मोकामा और आसपास के इलाकों में अनंत सिंह का यह बगावती रुख कायम रहा तो नीरज कुमार के लिए विधान परिषद की राह मुश्किल हो सकती है. ऐसे में अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नीतीश कुमार खुद दखल देकर इस विवाद को सुलझाते हैं या फिर जेडीयू को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा.

अनंत सिंह और नीरज कुमार में क्यों है विवाद? असली वजह समझिए !