नीतीश कुमार का 'सस्पेंस' बरकरार! इस्तीफा देने में क्यों नहीं दिखा रहे जल्दबाजी? क्या फिर पलटी मारेंगे सुशासन बाबू

Bihar Politics: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का रास्ता साफ होने के बावजूद उनके इस्तीफे को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. जदयू नेताओं के बयानों ने अटकलों को और तेज कर दिया है. क्या नीतीश कुमार आखिरी वक्त में फिर कोई बड़ा सियासी फैसला लेंगे? जानिए इस्तीफे में देरी की वजह, 6 महीने तक सीएम बने रहने का संवैधानिक विकल्प और निशांत कुमार की एंट्री से बदले समीकरणों का पूरा विश्लेषण.

Bihar CM latest update
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इन्द्र मोहन

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का रास्ता साफ हो चुका है, लेकिन उनके इस्तीफे और दिल्ली रवानगी को लेकर सस्पेंस कम होने का नाम नहीं ले रहा है. राज्यसभा के लिए चुने जाने के कई दिन बीत जाने के बाद भी नीतीश कुमार ने अभी तक बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है. जानकारों का कहना है कि सुशासन बाबू की विदाई इतनी सादी नहीं होगी और वे जाते-जाते कोई बड़ा सरप्राइज दे सकते हैं.

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जेडीयू एमएलसी के बयान ने बढ़ाई धड़कनें

जेडीयू एमएलसी खालिद अनवर के हालिया बयान ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, 'कौन कह रहा है कि नीतीश कुमार जा रहे हैं? वे बिहार के बेटे हैं और यहीं रहेंगे.' खालिद अनवर का यह भी कहना है कि यह कहना जल्दबाजी होगी कि नीतीश कुमार अब सीएम की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे. राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह बयान बीजेपी पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, ताकि सत्ता हस्तांतरण के समय जेडीयू का पलड़ा भारी रहे.

6 महीने तक सीएम बने रहने का संवैधानिक विकल्प

संवैधानिक नियमों के मुताबिक, यदि नीतीश कुमार 30 मार्च को विधान परिषद से इस्तीफा दे भी देते हैं, तब भी वे अगले 6 महीने तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं. दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री के तौर पर उनके आगे के दिनों का कार्यक्रम और यात्राएं पहले से ही तय हैं. 1 अप्रैल तक के उनके व्यस्त शेड्यूल को देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि वे कुर्सी छोड़ने की किसी जल्दबाजी में हैं.

निशांत कुमार की एंट्री और अनंत सिंह का समर्थन

नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री और पार्टी में उनकी ब्रांडिंग ने नए समीकरण पैदा कर दिए हैं. मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने तो खुलेआम निशांत को 'मुख्यमंत्री मटेरियल' बता दिया है. चर्चा यह भी है कि निशांत कुमार को भविष्य में उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, ताकि वे सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाना सीख सकें. फिलहाल, बिहार की जनता और राजनीतिक दल इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि क्या नीतीश कुमार एक बार फिर अपनी 'पलटीमार' छवि के अनुरूप कोई चौंकाने वाला फैसला लेंगे या फिर बीजेपी का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ करेंगे.

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