शंभू हॉस्टल कांड में बड़ा खुलासा! 50% लड़कियां पश्चिम बंगाल से थीं, वकील ने बताया हॉस्टल में छिपे काले धंधे का सच

Patna hostel case: पटना के चर्चित शंभू गर्ल्स हॉस्टल कांड में अब ‘बंगाल कनेक्शन’ का बड़ा खुलासा हुआ है. पटना हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता कौशलेंद्र कुमार ने दावा किया है कि हॉस्टल में रहने वाली करीब 50 प्रतिशत लड़कियां पश्चिम बंगाल से थीं, जिन्हें NEET की तैयारी के नाम पर पटना लाया गया था. आरोप है कि हॉस्टल की आड़ में लड़कियों की सप्लाई, लग्जरी गाड़ियों का आना-जाना और एक बड़े सिंडिकेट का संचालन किया जा रहा था.

Shambhu Girls Hostel
पटना हाईकोर्ट के वकील ने शंभू गर्ल्स हॉस्टल को लेकर किया बड़ा खुलासा

सुजीत झा

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पटना के चर्चित 'शंभू गर्ल्स हॉस्टल' मामले में जैसे-जैसे दिन बीत रहा है, वैसे-वैसे नए खुलासे हो रहे है. इसी बीच अब एक और चौंकाने वाला 'बंगाल एंगल' सामने आया है. पटना हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता कौशलेंद्र कुमार ने इस पूरे मामले में सनसनीखेज दावे किए हैं. बिहार तक से खास बातचीत में उनका कहना है कि हॉस्टल के ऊपरी फ्लोर्स पर रहने वाली लगभग 50 प्रतिशत लड़कियां पश्चिम बंगाल से थीं और वे वहां पढ़ाई के लिए नहीं, बल्कि किसी और मकसद से लाई गई थीं. आइए विस्तार से जानते हैं पूरी कहानी.

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नीट के नाम पर बंगाल से लड़कियों की सप्लाई

वरीय अधिवक्ता कौशलेंद्र कुमार के मुताबिक, हॉस्टल का मुख्य आरोपी मनीष रंजन एक बड़े सिंडिकेट का हिस्सा है. आरोप है कि वह बंगाल से लड़कियों को नीट (NEET) की तैयारी के नाम पर पटना बुलाता था, लेकिन असल में हॉस्टल की आड़ में उन्हें बड़े-बड़े बिजनेसमैन और रसूखदार लोगों को सप्लाई किया जाता था. वकील ने दावा किया कि हॉस्टल में रहने वाली इन लड़कियों को वहां एक सुरक्षित ठिकाना (सेफ हाउस) मिला हुआ था.

लग्जरी गाड़ियों का तांता और अकूत संपत्ति

कौशलेंद्र कुमार ने हॉस्टल के बाहर लगने वाली गाड़ियों पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि,'हॉस्टल के बाहर रात के समय फॉर्च्यूनर और हाईलेक्स जैसी महंगी लग्जरी गाड़ियां लगती थीं. अगर पिछले एक महीने के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए, तो बड़े-बड़े लोगों के चेहरे सामने आ जाएंगे.' उन्होंने यह भी खुलासा किया कि आरोपी मनीष रंजन महज 4-5 साल पहले पटना आया था और देखते ही देखते उसने अवैध तरीके से अकूत संपत्ति बना ली.

पुलिस और जांच टीम पर गंभीर आरोप

वरीय अधिवक्ता ने पटना पुलिस और एसआईटी (SIT) की कार्यप्रणाली पर भी तीखे सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि हॉस्टल की मालकिन नीलम अग्रवाल को थाने में बैठाने के महज 10 मिनट बाद ही छोड़ दिया गया, जबकि पुलिस के पास उसे 24 घंटे तक रोकने का अधिकार था. वकील का कहना है कि पुलिस के कुछ अधिकारी इस सिंडिकेट को बचाने की कोशिश कर रहे हैं और कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.

डीजीपी और कानून व्यवस्था पर सवाल

कौशलेंद्र कुमार ने बिहार के डीजीपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि इस लड़की सप्लायर सिंडिकेट की गहराई से जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह मामला अब सिर्फ पटना का नहीं बल्कि पूरे देश का है और पुलिस की लापरवाही से सरकार की छवि खराब हो रही है. उन्होंने उन पुलिस अफसरों पर भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की है जो कथित तौर पर आरोपियों को ढाल दे रहे हैं. इस नए खुलासे के बाद पटना का कोचिंग और हॉस्टल हब एक बार फिर सवालों के घेरे में है.

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