बिहार की राजनीति में पिछले 15 दिनों में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं. सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से सरकार एक्शन मोड में नजर आ रही है. महज 15 दिनों के छोटे से कार्यकाल में सम्राट चौधरी की कैबिनेट ने 85 अहम फैसले लिए हैं, जो राज्य के विकास और कानून-व्यवस्था को लेकर एक कड़ा संदेश दे रहे हैं. इन फैसलों के साथ-साथ राज्य में हुए दो एनकाउंटरों ने भी इस चर्चा को हवा दे दी है कि क्या बिहार में अब 'योगी मॉडल' की दस्तक हो चुकी है.
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15 दिनों में 85 फैसले
सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल को बिहार के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. तब से लेकर अब तक केवल दो कैबिनेट बैठकें हुई हैं, जिनमें ताबड़तोड़ निर्णय लिए गए. पहली कैबिनेट बैठक में 22 और दूसरी में 63 फैसले लिए गए, जिसका मतलब है कि हर दिन औसतन तीन से ज्यादा बड़े फैसले लिए जा रहे हैं. वर्तमान में सम्राट चौधरी खुद 29 विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और इन फैसलों के जरिए वह युवाओं, किसानों और बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.
रोजगार और शिक्षा पर सरकार का बड़ा दांव
सरकार ने बेरोजगारी की समस्या से निपटने के लिए राज्य के 75 आईटीआई को अत्याधुनिक बनाने की मंजूरी दी है. इसके अलावा सरकारी नौकरियों की दिशा में भी बड़े कदम उठाए गए हैं, जिसके तहत बिहार पुलिस में लगभग 10,000 नई भर्तियों और शिक्षा विभाग में 9152 शिक्षकों की भर्ती का रास्ता साफ किया गया है. स्थानीय संवेदकों को बढ़ावा देने के लिए एक अहम नीतिगत फैसला लिया गया है, जिसमें 25 लाख से 50 करोड़ तक के सिविल कार्यों में बिहार के मूल निवासियों या यहां रजिस्टर्ड कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी.
इंफ्रास्ट्रक्चर और बदलता बिहार
बिहार में शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए 11 सेटेलाइट सिटी बसाने का रोडमैप तैयार किया गया है. यह एक आधुनिक टाउनशिप होगी जिसमें तमाम सुख-सुविधाएं मौजूद होंगी. इसमें किसानों की जमीन का 45% हिस्सा सरकार विकसित करेगी और 55% किसान के पास रहेगा. इसके साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हरिहरनाथ मंदिर कॉरिडोर के निर्माण की भी स्वीकृति दी गई है. एक सांकेतिक बदलाव के तहत, संजय गांधी जैविक उद्यान का नाम बदलकर अब पटना जू कर दिया गया है.
फाइल अटकाने पर होगी कार्रवाई
सरकारी काम में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए मुख्यमंत्री ने कड़ा निर्देश जारी किया है. अब बिहार में कोई भी विभाग 30 दिनों से ज्यादा किसी फाइल को अटका कर नहीं रख सकता. यदि 30 दिन के भीतर फाइल का निपटारा नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. यह कदम भ्रष्टाचार और लालफीताशाही को खत्म करने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है.
कानून-व्यवस्था और दो एनकाउंटर की गूंज
सबसे ज्यादा चर्चा राज्य में हुए दो हालिया पुलिस एनकाउंटरों की हो रही है. पहला मामला भागलपुर का है, जहां एक सरकारी अधिकारी की हत्या करने वाले अपराधी को पुलिस ने 12 घंटे के भीतर एनकाउंटर में ढेर कर दिया. दूसरा मामला सिवान का है, जहां एक बीजेपी नेता के रिश्तेदार की हत्या के आरोपी को पुलिस ने मुठभेड़ में गोली मारी. इन घटनाओं ने अपराधियों में खौफ पैदा किया है और राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या सम्राट चौधरी अब नीतीश कुमार के पुराने मॉडल को छोड़ योगी आदित्यनाथ के 'बुलडोजर और एनकाउंटर' वाले रास्ते पर चल रहे हैं.
विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव हालांकि सरकार पर हमलावर हैं और 46% कार्य न होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन सम्राट चौधरी के ये 15 दिन बिहार की राजनीति में एक नई दिशा का संकेत दे रहे हैं.
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