बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने शपथ लेकर राज्य में एक नए सियासी युग की शुरुआत कर दी है. शपथ ग्रहण के साथ ही मंत्रालयों का अस्थायी बंटवारा भी हो गया है, जिससे यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में बिहार कैबिनेट का स्वरूप कैसा होगा. सम्राट चौधरी ने अपने पास 29 विभाग रखे हैं, जबकि जेडीयू कोटे के दो उपमुख्यमंत्रियों विजय चौधरी और विजेंद्र यादव के बीच 18 विभागों का बंटवारा किया गया है. विस्तार से समझिए पूरा गणित.
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कब होगा कैबिनेट का विस्तार?
सूत्रों के अनुसार, बिहार में कैबिनेट का विस्तार 5 मई के बाद होने की संभावना है. दरअसल, पश्चिम बंगाल समेत कुछ राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों के परिणाम 4 मई को आने हैं. इसके बाद बिहार में कैबिनेट विस्तार को एक भव्य समारोह के रूप में आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह समेत बीजेपी शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की उम्मीद है.
कई पुराने चेहरे होंगे 'आउट', युवाओं को मिलेगा मौका
सम्राट चौधरी अपनी सरकार में 'नई टीम' के साथ उतरना चाहते हैं. खबर है कि बीजेपी कोटे से बनने वाले मंत्रियों में कई नए चेहरों की लॉटरी लग सकती है. सम्राट का मानना है कि नई टीम से जनता के बीच यह संदेश जाएगा कि बिहार में वास्तव में बड़ा बदलाव हुआ है. वहीं, जेडीयू कोटे में भी कुछ पुराने और दिग्गज मंत्रियों का पत्ता कट सकता है ताकि युवाओं को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सके.
विजय सिन्हा का क्या होगा?
सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा को लेकर है. नीतीश सरकार में सम्राट और विजय सिन्हा दोनों डिप्टी सीएम थे, लेकिन अब सम्राट मुख्यमंत्री बन गए हैं और विजय सिन्हा फिलहाल मंत्रिमंडल से बाहर हैं. कहा जा रहा है कि बीजेपी ने यह फैसला विजय सिन्हा पर ही छोड़ दिया है कि वे सम्राट की सरकार में मंत्री बनना चाहते हैं या नहीं. हालांकि, उनके फिर से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग संभालने की चर्चाएं भी गर्म हैं.
स्पीकर पद पर फंसा पेंच
सरकार और मंत्रालयों के बाद अब सबकी नजर बिहार विधानसभा के स्पीकर पद पर है. जेडीयू चाहती है कि पावर बैलेंस बनाए रखने के लिए स्पीकर का पद उनके पास रहे. हालांकि, बीजेपी इस महत्वपूर्ण पद को छोड़ने के मूड में नहीं दिख रही है. इस पर अभी बारगेनिंग जारी है और आने वाले दिनों में इस पर फैसला हो सकता है.
बिहार में बदली सोशल इंजीनियरिंग
बीजेपी ने सम्राट चौधरी को आगे कर नीतीश कुमार की 'सोशल इंजीनियरिंग' की काट ढूंढ ली है. अब देखना यह होगा कि सम्राट अपनी नई कैबिनेट में जातीय समीकरणों को कैसे साधते हैं और बिहार को विकास की किस दिशा में ले जाते हैं.
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