Ganga Nadi Nao Hadsa: बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी में नाव पलटने से 14 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई. हादसा उस वक्त हुआ, जब बच्चे और ग्रामीण नदी पार कर दूसरी तरफ श्राद्ध भोज में शामिल होने के बाद वापस लौट रहे थे. इस घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा है. इस बीच बिहार तक की टीम ने धर्मेंद्र कुमार से बात की, जिन्होंने हादसे के दौरान दो बच्चों की जान बचाई. धर्मेंद्र ने उस खौफनाक मंजर को बयां किया, जिसे देखकर हर कोई सहम गया.
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अंधेरे में चला रेस्क्यू, ऐसे ने धर्मेंद्र कुमार ऐसे बचाई बच्चों की जान
हादसे के वक्त मौके पर मौजूद स्थानीय निवासी धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि जैसे ही उन्हें नाव पलटने की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत अपने कपड़े उतारे और पानी में छलांग लगा दी. अंधेरा होने और टॉर्च की रोशनी न होने के बावजूद उन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर करीब 17 बच्चों को पानी से बाहर निकाला. हालांकि, इनमें से कई बच्चों को बचाया नहीं जा सका. ग्रामीणों के मुताबिक, नदी का यह हिस्सा कटाव के कारण काफी गहरा हो गया है और यहां करीब 20 फीट तक पानी है.
जर्जर नाव और ओवरलोडिंग बनी हादसे की बड़ी वजह
एक अन्य चश्मदीद चंद्रकेत राय ने बताया कि यह नाव पिछले 23-24 सालों से चार घरों की आवाजाही के लिए चल रही थी और अब यह पूरी तरह जर्जर हालत में आ चुकी थी. स्थानीय लोगों ने पहले ही इसे बदलने के लिए रिपोर्ट दी थी. घटना के समय नाव की क्षमता से अधिक लोग उस पर सवार हो गए थे. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाव पर करीब 21 लोग सवार थे, और ज्यादा वजन तथा बच्चों की घबराहट के कारण संतुलन बिगड़ा और नाव पलट गई.
गमगीन माहौल और एक ही गांव के उजड़े घर
यह दर्दनाक हादसा इतना भयानक था कि एक ही घर के 7-8 बच्चों सहित पड़ोस के अन्य बच्चे भी इसका शिकार हो गए. स्थानीय लोगों का कहना है कि उस पार रहने वाले सभी लोग इसी नाव के सहारे आते-जाते हैं. घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और प्रशासनिक स्तर पर स्थिति का जायजा लिया जा रहा है, जबकि इस हादसे ने जर्जर व्यवस्था और सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है.
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