केंद्र सरकार के सवा करोड़ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी खुशखबरी है. सरकार ने महंगाई भत्ते (DA) में 2 फीसदी की ताजा बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है. हालांकि यह संख्या छोटी लग सकती है, लेकिन इसने आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन से पहले एक बड़े सैलरी रिवोल्यूशन की नींव रख दी है. इस बढ़ोतरी के साथ ही अब कुल डीए 60% के स्तर पर पहुंच गया है.
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डीए 60% होने का क्या है गणित?
केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक, महंगाई भत्ते (DA) का 50% के पार जाना एक टर्निंग पॉइंट माना जाता है. नया डीए 1 जनवरी 2026 से लागू माना जाएगा, जिसका अर्थ है कि कर्मचारियों को जनवरी से अप्रैल तक का एरियर भी मिलेगा.
सैलरी पर असर
अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 40,000 रुपये है, तो 60% डीए के हिसाब से उसे 24,000 रुपये केवल भत्ते के रूप में मिलेंगे. इस तरह उसकी कुल सैलरी 64,000 रुपये हो जाएगी.
क्या बेसिक सैलरी में मर्ज होगा 50% डीए?
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांग है कि आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट आने से पहले 50% डीए को बेसिक सैलरी में मर्ज कर दिया जाए. अगर सरकार इस मांग को मान लेती है, तो कर्मचारियों की किस्मत चमक जाएगी.
नया बेसिक पे: मान लीजिए अभी बेसिक 50,000 रुपये है, तो 50% डीए मर्ज होने पर नया बेसिक 75,000 रुपये हो जाएगा. बेसिक पे बड़ते ही कई फायदें होंगे.
भत्तों में उछाल: एचआरए (HRA) और अन्य भत्ते इसी नए बेसिक (75,000) पर कैलकुलेट होंगे, जिससे सीधे तौर पर हर महीने हजारों रुपये का फायदा होगा.
फिटमेंट फैक्टर: आठवां वेतन आयोग जब अपना फिटमेंट फैक्टर लागू करेगा, तो वह इसी बढ़े हुए बेसिक पर आधारित होगा, जिससे सैलरी में रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि होने की उम्मीद है.
जब 148% तक पहुंचा था डीए
यह पहली बार नहीं है जब डीए इस स्तर पर पहुंचा है. चौथे वेतन आयोग के अंत में (1995-96) डीए 148% तक चला गया था. वहीं 2004 में भी 50% डीए को बेसिक में मर्ज करके इसे 'डियरनेस पे' का नाम दिया गया था. सातवें वेतन आयोग के कार्यकाल में 60% का स्तर अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है.
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