देशभर में E 20 पेट्रोल को लेकर बवाल मचा हुआ है. लोग दावा कर रहे हैं कि इस फ्यूल से वाहन खराब हो रहे हैं पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है ऐसी एक भी शिकायत किसी कार कंपनी के जरिए समने नहीं आई है. इसी बीच रायपुर उपभोक्ता अदालत का एक फैसला खूब चर्चा में है. ये फैसले E 20 पेट्रोल से खराब हुई कार को लेकर ही है. इस मामले में अदालत ने कार मालिक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी से उपभोक्ता को दूसरी कार देने, रजिस्ट्रेशन का खर्च, मानसिक संताप के लिए एक लाख रुपए और अदालत की कार्यवाही में हुए खर्च के नाम पर 10 हजार रुपए देने का आदेश दिया है. इधर मारुति सुजुकी ने इस आदेश को ऊपर की अदालत में चुनौती देने की बात कही है.
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इस मामले में हैरान करने वाला पहलू ये है कि इस कार की मैन्युफैक्चरिंग 2023 की है पर ये E 20 पेट्रोल के लिए उपयुक्त नहीं है. अदालत में पहुंचे इस मामले पर अब सोशल मीडिया पर खूब रिएक्शन आ रहे हैं. लोग सवाल उठा रहे हैं कि एक तरफ कहा जा रहा है कि 2023 से E 20 उपयुक्त कार बन रही हैं पर यहां तो मामला कुछ और ही निकला. इस आदेश के बाद इधर मारुति सुजुकी ने लेटर जारी कर दावा किया है कि ये कार E20-कम्पैटिबल थी.
क्या है पूरा मामला ?
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के रहने वाले डॉ. प्रेमराज देब्ता ने जून 2024 में ग्रैंड विटारा IEE स्ट्रॉन्ग हाईब्रिड जेटा प्लस खरीदी थी. इसकी मैन्युफैक्चरिंग जनवरी 2023 में हुई थी. BBC पर प्रकाशित खबर के मुताबिक डॉ. प्रेमराज एक शाम अपना काम निपटाकर क्लीनिक से घर के लिए निकले. बीच रास्ते में अचानक उनकी कार बंद हो गई. वेा उसे लेकर सर्विस सेंटर गए. वहां बताया गया कि पेट्रोल में मिलावट के कारण कार बंद हुई है. ऐसा कई बार हुआ.
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पेट्रोल टंकी में दही जैसा जमा मिला, ये एथेनॉल था
बाद में डॉ. प्रेमराज देब्ता ने सरकारी लैब में पेट्रोल की जांच कराई जिसमें एथेनॉल निकला. ये पेट्रोल टैंक में जमा हुआ दही जैस पदार्थ था. जब डॉ. देब्ता ने इस रिपोर्ट के आधार पर डीलरशिप से शिकायत की तो उन्होंने ये कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि ये खराबी एथेनॉल मिले पेट्रोल की वजह से है. ये खराबी बाहरी कारण से है जो वारंटी में नहीं आती. इसके बाद डॉ. देब्ता उपभोक्ता अदालत पहुंचे. मामले में इन्होंने कार विक्रेता नेक्सा मैग्नेटो स्काई ऑटोमोबाइल्स और वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड को पक्षकार बनाया.
डॉ. देब्ता ने दलील दी कि उन्हें डीलरशिप की तरफ से कार खरीदते समय नहीं बताया गया कि ये E 20 पेट्रोल के लिए उपयुक्त नहीं है. ई-20 फ्यूल से जुड़ी किसी तरह की सावधानी बरतने की सलाह भी नहीं दी गई. कंपनी की तरफ से कार को लेकर स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए थी जो उन्होंने नहीं दी.
बाहरी कारण से खराब हुई है कार- विक्रेता की दलील
इधर कार विक्रेती ने दलील देते हुए कहा कि वाहन में खराबी पेट्रोल के कारण हुई. हर बार टंकी साफ कराई गई और हर बार पेट्रोल में गड़बड़ी मिली. यही नहीं विक्रेता ने भी ग्राहक के कार से निकले फ्यूल की जांच कराई थी जिसमें पेट्रोल में गड़बड़ी मिली थी. विक्रेता का तर्क था कि बाहरी कारणों से कार में आई गड़बड़ी वारंटी में कवर नहीं होती है.
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जिला उपभोक्ता आयोग ने दिया आदेश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि आधुनिक वाहनों में फ्यूल की क्वालिटी और उसके प्रति अनुकूलता एक महत्वपूर्ण विषय है. यदि निर्माता या विक्रेता ग्राहक को वाहन से जुड़े फ्यूल कम्पैटिबलिटी ओर उससे जुड़े जानकारी देने में विफल रहते हैं तो इसे सेवा में कमी मानी जाएगी. आयोग ने निर्देश दिया कि 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता की खराब कार वापस लेकर उसी मॉडल की नई E 20 फ्यूल पावर्ड कार दी जाए. अब कंपनी ऐसा नहीं करती है तो...
- वाहन की कीमत 18 लाख 29 हजार रुपए
- RTO रजिस्ट्रेशन 1 लाख 86 हजार 850 रुपए
- बीमा प्रीमियम 34 हजार 644 रुपए
- यानी कुल 20 लाख 50 हजार 494 रुपए ग्राह को देने होंगे.
- इसके अलावा मानसिक संताप के 1 लाख रुपए
- वाद खर्च के 10 हजार रुपए
- यानी टोटल: 21 लाख 60 हजार 494 रुपए अदा करने होंगे वो भी 45 दिनों के भीतर.
मरुति सुजुकी का आया रिएक्शन
मामले पर मारुति सुजुकी का रिएक्शन का आ गया है. उनका कहना है कि E20 फ़्यूल से जुड़े मामले में रायपुर कंज्यूमर कमीशन के आदेश वो ऊपर की अदालत में चुनौती देंगे. कमीशन ने माना कि ग्राहक को बेची गई गाड़ी E20 फ़्यूल के लिए सही नहीं थी. वहीं मारुति सुज़ुकी का कहना है कि कार पूरी तरह से E20-कम्पैटिबल थी और इसकी जानकारी ओनर मैनुअल में दी गई थी. कंपनी का दावा है कि फ़्यूल में मिलावट के सबूत थे और आदेश में अहम बातों को शामिल नहीं किया गया था. मारुति सुज़ुकी का कहना है कि वह इस फैसले को सही ऊपरी फोरम में चुनौती देगी.
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