मकान मालिकों की मनमानी पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मामूली टूट-फूट के नाम पर सिक्योरिटी डिपॉजिट से नहीं काट सकते पैसे !

मकान छोड़ते समय किराएदार और मकान मालिकों की मानमानी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया फैसला. अदालत ने साफ किया कि मकान में टूट-फूट गंभीर और जानबूझकर किया गया हो तभी मकानमालिक किराएदार के सिक्योरिटी डिपॉजिट से पैसे काट सकता है. पढ़ें फैसले के मुख्य बिंदू और जानें पूरा मामला.

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मकान मालिक और किराएदारों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला.

संजय शर्मा

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देश में एक बड़ी आबादी शहरों में किराए पर रहती है. मकान में जब तक किराएदार रहता है तब तक तो सब ठीक चलता है. जैसे ही वो मकान छोड़कर जाने लगता है तो मकान मालिक मामूली टूट-फूट या पेंट-पॉलिश के नाम पर उसके सिक्योरिटी डिपॉजिट से पैसे काटने लगता है. कई बार तो किराएदार मकान की हालत इतनी बदतर कर देते हैं कि मकान मालिक को उसे मेंटेंन कराने पर काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं. ऐसा ही एक मामला दिल्ली हाईकोर्ट में पहुंचा. उच्च अदालत ने सुनवाई करते हुए इस मामले में अहम फैसला सुनाया है. 

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दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसने से किराएदार और मकान मालिक दोनों के मनमानेपन से दोनों को ही राहत दी है. अदालत ने साफ किया है कि मकान मालिक दीवारों की पुताई, मामूली टूट-फूट या छोटी-मोटी मरम्मत के नाम पर तब तक किराएदार के सिक्योरिटी डिपॉजिट से पैसे नहीं काट सकते जब तक कि ये टूट-फूट जनबूझकर किया गया न हो या बेहद गंभीर किस्म का न हो.

इस फैसले से उन किराएदारों को राहत मिली है जिनके सिक्योरिटी डिपॉजिट से मकानमालिक छोटी-मोटी टूट फूट या दीवार की रंगाई-पुताई के नाम पर पैसे काट लेते हैं. वहीं इस फैसले से मकान मालिकों को भी राहत मिली है जिनके किराएदार ने घर में गंभीर किस्म की टूट-फूट की हो. हाईकोर्ट ने ये भी साफ किया है कि ऐसी परिस्थिति में किरायेदार से केवल उसी नुकसान की भरपाई ली जा सकती है जो सामान्य इस्तेमाल से ज्यादा हो. 

बिना सबूत ममनमानी कटौती नहीं की जा सकती- कोर्ट 

कोर्ट ने ये भी कहा कि मकान मालिक को यह भी साबित करना होगा कि नुकसान वास्तव में किरायेदार की वजह से हुआ है. साथ ही मरम्मत पर किया गया खर्च उचित और जरूरी था. बिना सबूत के सिक्योरिटी डिपॉजिट से मनमानी कटौती नहीं की जा सकती. 

ये है पूरा मामला 

हाई कोर्ट ने हाल ही मेंमैसर्स रिट्स हैरिटेज और अन्य बनाम संगीता गुप्ता के मुकदमे की सुनवाई के दौरान ये अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ किया है कि किन परिस्थितियों में मकान मालिक किरायेदार से मरम्मत और रिनोवेशन का खर्च वसूल सकता है. मकान मालिक ने दावा किया था कि उसने गंभीर रूप से हुए नुकसान के बाद मकान की मरम्मत पर 7 लाख रुपए खर्चे थे. इनमें से किराए पर चढ़ाए गए दूसरे और तीसरे माले की मरम्मत पर साढ़े चार लाख खर्च हुए.  

इस दावे पर मकान मालिक ने अदालत में बिल, रसीद, इनवॉइस और मकान खाली होने के बाद की फोटो भी नत्थी की. उनका कहना था कि किरायेदार के जाने के बाद संपत्ति की मरम्मत और रिनोवेशन पर लाखों रुपये खर्च करने पड़े. कोर्ट ने अपने निर्णय में यह माना कि यदि किरायेदार की वजह से मकान को सामान्य से ज्यादा बाहरी या भीतरी नुकसान हुआ है, तो उसकी भरपाई किराएदार से वसूली जा सकती है.

अदालत ने तस्वीरों की जांच के दौरान पाया कि कुछ बिजली के फिटिंग हटाए गए थे और संपत्ति को ऐसा नुकसान पहुंचा था जिसे सामान्य इस्तेमाल का हिस्सा नहीं माना जा सकता. ऐसे नुकसान के लिए किरायेदार जिम्मेदार हो सकता है. 

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